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क्या AI आने वाले समय में इंसान के काबू से बाहर हो जाएगा? -द लेंस
आज एआई सिर्फ़ हमारे सवालों के जवाब नहीं दे रहा, वो ख़ुद फ़ैसले भी लेना शुरू कर चुका है.
और यही बात दुनिया के बड़े एआई रिसर्चर्स को डरा रही है.
एआई से जुड़ी कई बड़ी कंपनियां ख़ुद कह रही हैं कि रेगुलेशन ज़रूरी है, ऐसे में चिंता जायज़ है और ये सवाल भी गंभीर है.
द लेंस के इस एपिसोड में हम समझने की कोशिश करेंगे कि
- क्यों एआई को इंसानियत के लिए ख़तरा बता रहे हैं इसे विकसित करने वाले ही कुछ नाम?
- एआई के इस्तेमाल को लेकर सबसे बड़ा डर या ख़तरा क्या है?
- एआई के विकास को थोड़ा कम करने की बात की जा रही है लेकिन क्या ये नियम बड़ी कंपनियों को फ़ायदा पहुंचाएगा और छोटी कंपनियों को नुक़सान?
- क्या एआई आने वाले समय में इंसान के काबू से बाहर हो जाएगा?
कलेक्टिव न्यूज़रूम के डायरेक्टर ऑफ़ जर्नलिज़म मुकेश शर्मा के साथ इस चर्चा में शामिल हैं, ग्रोथस्कूल के संस्थापक वैभव सिसिंटी, ऑल्टर्ड की संस्थापक गायत्री अग्रवाल और आईआईटी दिल्ली के डिपार्टमेंट ऑफ़ इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग एंड यार्डी स्कूल ऑफ़ आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस में प्रोफ़ेसर तन्मॉय चक्रवर्ती.
प्रोड्यूसरः सईदुज़्जमान
गेस्ट कोऑर्डिनेटरः संगीता यादव
वीडियो एडिटिंगः आशीष जैन
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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