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आधे घंटे तक शेर की गिरफ़्त में रहने के बाद कैसे बचाई एक शख़्स ने अपनी जान
- Author, गोपाल कटेशिया, अल्पेश डाभी
- पदनाम, राजकोट और भावनगर से
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 6 मिनट
भावनगर ज़िले के गराजिया गांव में 6 जुलाई की सुबह शेरों के एक झुंड ने कालूभाई परमार नाम के एक मवेशी चराने वाले शख़्स पर हमला कर दिया, जिससे वह घायल हो गए.
गांव के लोगों ने बताया कि घायल शख़्स को गंभीर चोटें आने की वजह से इलाज के लिए 60 किलोमीटर दूर भावनगर शहर के सर तख्तसिंहजी जनरल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है.
भावनगर ज़िले में शेरों के इंसानों पर कथित हमले की यह दूसरी घटना है. इससे पहले, 18 जून को पालिताना तालुका से सटे महुवा तालुका के गढडा गांव में नागजीभाई गुजरिया नाम के एक युवक की लाश उसके घर के पास झाड़ी में मिली थी.
नागजीभाई के परिवार ने दावा किया था कि नागजीभाई की मौत शेरों के हमले में हुई थी.
शेर के चंगुल में कैसे आया व्यक्ति
बीबीसी न्यूज़ गुजराती के अल्पेश डाभी के मुताबिक़, कालूभाई ने हॉस्पिटल से मीडिया को बताया कि यह घटना सोमवार सुबह करीब 8:30 बजे हुई, जब वह अपने घर पर थे.
कालूभाई ने कहा, "मैं सुबह 8:30 बजे अपनी गाय को पानी पिलाने जा रहा था, तभी शेर बैठा हुआ था. वहीं से उसने मुझ पर हमला कर दिया. पहले उसने मेरे कंधे पर मारा और मुझे गिरा दिया. फिर उसने मेरा हाथ अपने मुँह में ले लिया. उसने मुझे करीब आधे घंटे तक पकड़े रखा. फिर मैंने उसे सहलाया, तो उसने मुझे छोड़ दिया."
हमले की पुष्टि करते हुए, शेत्रुंजी वाइल्डलाइफ़ डिपार्टमेंट के डिप्टी कंज़र्वेटर ऑफ़ फ़ॉरेस्ट चिराग अमीन ने बीबीसी को बताया कि एक शेर ने गराजिया गाँव में एक किसान पर हमला किया, जिससे उसे चोटें आईं.
लगभग 50 साल के कालूभाई ने आगे कहा कि लोगों ने फ़ॉरेस्ट डिपार्टमेंट को सूचित किया था लेकिन फ़ॉरेस्ट डिपार्टमेंट की टीम शेर के वहाँ से जाने से पहले गराजिया नहीं पहुँच पाई.
हमले के दौरान रिकॉर्ड किए गए वीडियो में आसपास के लोग चिल्लाते और शेर पर पत्थर फेंकते दिखाई दे रहे हैं.
शेर ने कैसे छोड़ा?
कालूभाई ने बताया कि शेर के उनको जकड़ लेने के बाद गांव वाले भी उनकी ज़्यादा मदद नहीं कर पाए.
वीडियो में दिख रहा है कि शेर अचानक कालूभाई को छोड़कर चला गया. कालूभाई का कहना है कि शेर उन्हें छोड़कर उनकी गायों की तरफ़ चला गया था.
हालांकि, गांव के नेता करमशीभाई चौहान ने बीबीसी को बताया कि शेर कालूभाई की दो गायों को नुक़सान पहुंचाए बिना चला गया.
करमशीभाई ने कहा, "शेर अचानक गांव में घुस आया और कालूभाई के पड़ोसी के खेत में जाकर उनकी तरफ दौड़ा. लेकिन उनकी भैंस ने उसको सींग दिखाए, जिसके बाद शेर वहां से भाग गया और कालूभाई के घर की तरफ़ गया जहां दो गायें बंधी हुई थीं. लेकिन गायों के बजाय उसने कालूभाई पर हमला कर दिया. आखिर में, कालूभाई को छोड़कर वह उनकी गायों की तरफ़ दौड़ा. हालांकि, आखिर में वह गायों को नुकसान पहुंचाए बिना वहां से भाग गया."
करमशीभाई की पत्नी जिकुबेन गराजिया गांव की मौजूदा सरपंच हैं. करमशीभाई ने कहा, "हमले में कालूभाई की गर्दन, कंधे और हाथ में चोटें आईं. उन्हें पहले इलाज के लिए पालिताना के एक अस्पताल में ले जाया गया. लेकिन वहां के डॉक्टर ने कहा कि चूंकि चोटें गंभीर हैं, इसलिए उन्हें भावनगर ले जाना होगा."
शेर ने क्यों किया हमला
गराजिया गांव शेत्रुंजय पहाड़ के नीचे बसा है, जो पालिताना शहर से क़रीब पांच किलोमीटर दूर है. लोकल फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने बीबीसी को बताया कि शेत्रुंजय पहाड़ एक रिज़र्व्ड जंगल है और यहां शेर और तेंदुए रहते हैं.
यह गांव शेत्रुंजी वाइल्डलाइफ डिवीज़न की पालिताना रेंज में आता है.
चिराग अमीन ने बीबीसी को बताया, "एक दिन पहले इन शेरों ने गराजिया के पास सोनपारी गांव में एक आदमी को मार डाला था. आदमी को मारने के बाद, तीनों शेर अपनी मांद की ओर जा रहे थे. जैसे-जैसे समय बीता, सुबह हुई और लोगों की आवाजाही बढ़ गई. शेरों के इस झुंड में एक जवान नर शेर भी था और लोगों के शोर मचाने पर वह साफ़तौर पर डर गया था. ऐसे में उसने एक मवेशी मालिक पर हमला कर दिया. हालांकि, शेर ने मवेशी मालिक को मारने की कोशिश नहीं की. इस घटना के वीडियो में दिख रहा है कि उसने मवेशी मालिक को घायल कर दिया और चला गया."
फ़ॉरेस्ट डिपार्टमेंट के प्रेस नोट में यह भी कहा गया है कि शेर ने कालूभाई पर तब हमला किया जब वह अपने जानवरों की रक्षा करने गए थे.
इस इलाक़े में शेर कब से देखे जा रहे हैं?
1990 के दशक की शुरुआत तक, शेर सिर्फ़ गिर नेशनल पार्क और वाइल्डलाइफ़ सैंक्चुअरी में देखे जाते थे, जिसे गिर फ़ॉरेस्ट भी कहा जाता है. यह जंगल आज के जूनागढ़, गिर सोमनाथ और अमरेली ज़िलों में फैला हुआ है.
जैसे-जैसे शेरों की आबादी बढ़ी, 1990 के दशक के बीच में, शेर गिर फ़ॉरेस्ट के बाहर फैलने लगे और अमरेली के पनिया में देखे गए.
उसके बाद, शेत्रुंजी नदी के किनारे अपना इलाक़ा बढ़ाते हुए, शेर अमरेली के लिलिया में घुस गए और वहाँ से भावनगर के महुवा तालुका में आ गए और पिछले करीब एक दशक से वहीं बसे हुए हैं. महुवा से आगे बढ़ते हुए, शेर पालिताना तालुका में शेत्रुंजय पर्वत और उसके आस-पास भी बस गए हैं.
पिछले महीने, शेत्रुंजय पर्वत की सीढ़ियाँ चढ़ते हुए एक तीर्थयात्री का बैग लेकर भागते हुए एक शेर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था.
गिर जंगल से दूर घनी आबादी वाले रेवेन्यू इलाकों में शेरों को बचाने और उनकी सुरक्षा करने और शेरों और इंसानों के बीच टकराव की घटनाओं को रोकने के मकसद से, राज्य सरकार ने 2019 में शेत्रुंजी वाइल्डलाइफ डिपार्टमेंट बनाया था और फॉरेस्ट डिपार्टमेंट से स्टाफ अलॉट किया था. इस डिपार्टमेंट के डिप्टी कंज़र्वेटर ऑफ फॉरेस्ट का ऑफिस पालिताना शहर में है.
करमशीभाई ने कहा, "पिछले तीन सालों से हमारे गांव के आसपास शेरों के आने के मामले बढ़े हैं और वे मवेशियों को परेशान करते रहते हैं. लेकिन शेर के किसी इंसान पर हमला करने की यह पहली घटना है."
डिप्टी कंज़र्वेटर ऑफ फॉरेस्ट चिराग अमीन ने कहा कि फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के स्टाफ़ को गराजिया में देखे गए तीन शेरों की लोकेशन मिल गई है और आगे की कार्रवाई की जा रही है.
"हमारा स्टाफ उस हॉस्पिटल में मौजूद है जहां घायल शख़्स को भर्ती कराया गया है और हॉस्पिटल के साथ कोऑर्डिनेशन भी कर रहा है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.