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क्यूबा में अमेरिकी नाकाबंदी का असर, एक और ब्लैकआउट से लाखों लोग अंधेरे में
- Author, मैया डेविस
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 3 मिनट
शुक्रवार को क्यूबा में लाखों लोग बिना बिजली के अंधेरे में रहे.
क्यूबा के ऊर्जा मंत्रालय ने कहा कि देश के पूरे बिजली ग्रिड में "पूरी तरह बिजली कटने" की स्थिति पैदा हुई, जिससे पूरे देश में बिजली गुल हो गई.
ग्रिड ऑपरेटर यूएनई ने कहा कि शाम तक कुछ प्राथमिकता वाले इलाकों में बिजली बहाल कर दी गई थी, जिसमें राजधानी हवाना में अस्पतालों और पानी पंपिंग स्टेशनों के आसपास के इलाके भी शामिल हैं.
इस साल क्यूबा में यह कम से कम छठी आंशिक या पूरी बिजली कटौती है. देश के पुराने बिजली ढांचे और ईंधन की लगातार कमी पर अब कम्युनिस्ट शासन वाले देश को तेल की आपूर्ति पर अमेरिकी नाकाबंदी के कारण और दबाव बढ़ गया है.
यूएनई ने कहा कि शुक्रवार को स्थानीय समयानुसार 14:00 बजे से ठीक पहले बिजली कटौती शुरू हुई. मध्य क्यूबा में ट्रांसमिशन में खराबी और खराब मौसम की स्थिति इसका कारण बनी.
ऑपरेटर के राष्ट्रीय लोड डिस्पैच निदेशक फेलिक्स एस्ट्राडा ने कहा कि बिजली की "धीरे-धीरे बहाली" शुरू करने के लिए प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए गए थे और शनिवार को भी यह प्रक्रिया जारी थी.
क्यूबा ईंधन के आयात पर काफी निर्भर है. इसका मतलब है कि कड़े अमेरिकी प्रतिबंधों और साल की शुरुआत से जारी तेल नाकाबंदी ने पहले से मौजूद कमी को और बढ़ा दिया है.
खाने और दवाओं की कमी भी बढ़ गई है. अस्पतालों को सामान्य रूप से काम करने में मुश्किल हो रही है और स्कूलों तथा सरकारी कार्यालयों को बंद करना पड़ रहा है.
हवाना के निवासी फ्रैंक लोरेंजो ने शुक्रवार को समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा, "अब तो यह एक आदत सी बनती जा रही है."
उन्होंने कहा, "पहले ऐसा कम होता था, महीने में एक बार... कल ही हम 24 घंटे तक बिना बिजली के थे, बिजली सिर्फ़ एक घंटे के लिए आई और फिर चली गई."
36 वर्षीय स्कूल शिक्षक लीडिया फर्नांडीज ने समाचार एजेंसी एएफपी से कहा, "एक के बाद एक समस्या है: पानी नहीं है, खाना पकाने के लिए गैस नहीं है, बिजली नहीं है. सच कहूं तो मुझे नहीं पता कि हम पागल क्यों नहीं हो गए."
78 वर्षीय फ्रांसिस्को रोड्रिगेज ने कहा कि शुक्रवार से पहले ही उनके घर में 28 घंटों से बिजली नहीं थी और उन्हें डर है कि "कई दिनों" तक बिजली नहीं आएगी.
बार-बार होने वाली बिजली कटौती के कारण क्यूबा में विरोध प्रदर्शन हुए हैं, ऐसा वहाँ पहले कम ही देखने सुनने को मिला है. यहां बिना अनुमति के प्रदर्शन करना ग़ैरक़ानूनी है और प्रतिबंध की अवहेलना करने वालों को जेल भेजे जाने का ख़तरा रहता है.
हवाना ने अपने ईंधन संकट के लिए ट्रंप प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है और उसके सभी प्रतिबंधों की निंदा की है, जिसमें अगस्त में घोषित प्रतिबंधों का नया दौर भी शामिल है. ये प्रतिबंध कैरेबियाई द्वीप देश के नेतृत्व पर व्यापक दबाव बनाने के अभियान का हिस्सा हैं.
माना जाता है कि क्यूबा के क्षेत्रीय सहयोगी वेनेजुएला ने उसे प्रतिदिन करीब 35,000 बैरल तेल भेजा था, जो उसकी तेल ज़रूरतों का लगभग आधा था. जनवरी में अमेरिका की ओर से वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिए जाने के बाद वेनेजुएला की अपनी तेल आपूर्ति बंद हो गई.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हवाना को तेल भेजने वाले देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी है और अमेरिका ने ऐसी कई तेल खेंप जब्त भी की हैं.
वहीं, क्यूबा के ऊर्जा संकट के लिए अमेरिका वहाँ के खराब आंतरिक प्रबंधन को जिम्मेदार बताता है और उस पर "राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा" पैदा करने का आरोप लगाया है. ट्रंप ने खुले तौर पर क्यूबा के नेतृत्व को सत्ता से हटाने की बात की है. इसमें इस साल मार्च में शांतिपूर्ण "अधिग्रहण" की धमकी भी शामिल है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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हमने इस लेख का अनुवाद करने में एआई की मदद ली है, जिसे मूल रूप से अंग्रेज़ी में लिखा गया था. बीबीसी के एक पत्रकार ने प्रकाशन से पहले इस अनुवाद की जांच की. हम एआई का उपयोग कैसे कर रहे हैं, इसके बारे में और जानें.