'मुझे अपना सीवी बोटॉक्स करना पड़ा': एआई के दौर में क्या महिलाओं को नौकरी मिलना हो रहा है मुश्किल?

- Author, मेघन ओवेन
- पदनाम, लंदन वर्क एंड मनी संवाददाता
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 11 मिनट
एआई की वजह से नौकरियां कम हो जाने का डर दुनिया भर में लाखों कर्मचारियों के बीच है. लेकिन क्या एआई भर्ती टूल उन महिलाओं के लिए एक ख़ास चुनौती बन रहे हैं, जो दोबारा नौकरी की दुनिया में लौटना चाहती हैं?
52 वर्षीय स्टेसी डुगुइड ने फ़ैशन इंडस्ट्री में कई दशकों तक काम किया है. वह बड़े कॉरपोरेट पदों पर भी रहीं और कुछ समय तक फ़्रीलांसिंग भी करती रहीं.
इसके बाद उन्होंने फ़ैसला किया कि अब वह "एक आख़िरी नौकरी" तलाशेंगीं. फिर उन्होंने 16 महीनों तक अनगिनत सीवी भेजे. इसके बदले उन्हें मुश्किल से कुछ ऑटोमेटेड जवाब मिले.
हैरानी की बात यह थी कि इससे पहले उन्हें कभी नौकरी ढूंढने में ऐसी परेशानी नहीं हुई थी.
स्टेसी को अकेलापन और शर्मिंदगी महसूस होने लगी. उन्हें लगने लगा कि शायद समस्या उन्हीं में है.
उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखी. उन्होंने पूछा कि क्या उनकी उम्र की दूसरी महिलाएं भी इसी तरह के अनुभव से गुज़र रही हैं.
इस पोस्ट पर ज़बरदस्त प्रतिक्रिया मिली. हज़ारों महिलाओं ने बताया कि वे भी ऐसी ही मुश्किलों का सामना कर रही हैं.
उत्तरी लंदन में रहने वाली स्टेसी का मानना है कि एआई आधारित रिक्रूटमेंट टूल्स इस समसस्या को और बढ़ा सकते हैं.
उन्होंने अपने सीवी से उम्र और लंबे अनुभव से जुड़े संदर्भ हटा दिए. वह इसे अपने सीवी को "बोटॉक्स" देना कहती हैं.
स्टेसी कहती हैं, "एआई समाज का आईना है. यह हमारे भीतर मौजूद पूर्वाग्रहों को दिखाता है."
वह कहती हैं, "मैं यह नहीं कह रही कि यह सिर्फ़ महिलाओं की समस्या है. मुझे पुरुषों के भी कई संदेश मिले हैं."
"मेरा मुद्दा उम्र के आधार पर होने वाले जेंडर भेदभाव से जुड़ा है."
अनुभव के बावजूद रिजेक्शन से झटका लगा

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बीबीसी ने इसके बाद अलग-अलग उद्योगों में काम कर रहीं 40 से 65 वर्ष की उम्र की 60 से ज़्यादा महिलाओं से बात की. ये महिलाएं लंबे समय से नौकरी पाने के लिए संघर्ष कर रही हैं.
इनमें से ज़्यादातर महिलाएं वरिष्ठ पदों पर दशकों तक काम कर चुकी हैं. उनका कहना है कि उन्होंने अनगिनत सीवी भेजे हैं, लेकिन बदले में या तो ऑटोमेटेड रिजेक्शन संदेश मिले या फिर कोई जवाब ही नहीं मिला.
स्टेसी की तरह कई महिलाओं का मानना है कि एआई बेस्ड रिक्रूटमेंट टूल्स इसमें भूमिका निभा रहे हैं.
49 वर्षीय कोयली जलुका मैन्युफ़ैक्चरिंग, कॉरपोरेट और हेल्थकेयर सेक्टरों में सीनियर पदों पर काम कर चुकी हैं.
वह कहती हैं, "मैं पहले कभी ऐसी स्थिति में नहीं रही."
"पिछले 10 से 12 वर्षों में कंपनियां ख़ुद मुझसे संपर्क करती थीं और नौकरी के प्रस्ताव देती थीं. अब मैं ख़ुद नौकरियां ढूंढ रही हूं और लगातार रिजेक्शन का सामना कर रही हूं."
नौ महीने पहले उनकी नौकरी चली गई थी.
तब से वह 442 नौकरियों के लिए आवेदन कर चुकी हैं. इनमें से बहुत कम जगहों से उन्हें जवाब मिला.
कभी-कभी उन्हें यह भी बताया गया कि वे "बहुत सीनियर" हैं. उनका मानना है कि यह कहने का एक तरीक़ा है कि उनकी उम्र ज़्यादा है.
दो दशकों के अनुभव और दो डिग्रियां होने के बावजूद वह कहती हैं कि उनके आत्मविश्वास को 'काफ़ी झटका' लगा है.
उनका मानना है कि सीमित बजट, एआई बेस्ड स्क्रीनिंग और भर्ती के लिए लगातार संकीर्ण हो रहे मानदंड मिलकर इस समस्या को और बढ़ा रहे हैं.
वह कहती हैं, "हममें से कई लोगों को करियर कोच ने सलाह दी है कि हम अपने सीवी से शुरुआती 10 साल के अनुभव को हटा दें."
"ऐसा इसलिए ताकि यह न लगे कि हम बहुत लंबे समय से काम कर रहे हैं."
'मैं नौकरी तलाशने वालों को मिलने वाले भत्ते पर निर्भर हूं'

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52 वर्षीय एना काउई ने विज्ञापन जगत में 30 साल तक काम किया है. लेकिन वह पिछले लगभग चार वर्षों से बेरोज़गार हैं.
उन्होंने इतने सीवी भेजे हैं कि अब उनकी गिनती भी याद नहीं है. इससे पहले उनके साथ कभी ऐसी स्थिति नहीं आई थी कि उनके पास नौकरी न हो.
उन्होंने कई बड़ी कंपनियों के लिए काम किया है. हाल के वर्षों में उन्होंने नए बैटरसी पावर स्टेशन परियोजना को शुरू करने में भी मदद की थी.
अब वह नौकरी तलाशने वालों को मिलने वाले सरकारी भत्ते पर निर्भर हैं.
एना ने अपना समय सामुदायिक उत्सवों में स्वयंसेवा करने में लगाना शुरू कर दिया है.
उनका कहना है कि लोगों से सीधे मिलकर संपर्क बनाना ज़्यादा असरदार साबित हो रहा है.
वह कहती हैं, "इस तरह लोग आपको एक इंसान के रूप में देखते हैं. सिर्फ़ काग़ज़ पर लिखी कुछ पंक्तियों के रूप में नहीं."
'इसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं'
कई मामलों में यह पता लगाना मुश्किल होता है कि किसी उम्मीदवार को छांटने या अस्वीकार करने में एआई टूल की भूमिका थी या नहीं.
इसकी वजह यह है कि कंपनियां आमतौर पर अपनी भर्ती प्रक्रिया का पूरा ब्योरा सार्वजनिक नहीं करतीं. फिर भी यह आशंका काफ़ी व्यापक है कि एआई आधारित भर्ती टूल मध्यम आयु की महिलाओं को नुक़सान पहुंचा सकते हैं.
वित्तीय और पेशेवर सेवा क्षेत्र में महिलाओं के मुद्दों पर काम करने वाले सिटी ऑफ़ लंदन विमेन पिवोटिंग टू डिजिटल टास्कफ़ोर्स ने भी इस पर चिंता जताई है.
टास्कफ़ोर्स की अध्यक्ष कैरोलिन हेन्स ने कहा कि उनके शोध में यह बात सामने आई कि नौकरी के आवेदन और सीवी छांटने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले एआई सिस्टम कई अनुभवी महिलाओं के कौशल को सही ढंग से नहीं पहचान पाते.
उन्होंने कहा, "काफ़ी लोगों को यह चिंता है कि भर्ती के शुरुआती चरण में इस्तेमाल होने वाला एआई उन बड़ी संख्या में महिलाओं के कौशल को ध्यान में नहीं रखता, जो बेहद प्रभावी साबित हो सकती हैं और आर्थिक विकास में योगदान दे सकती हैं."
उदाहरण के लिए, जो महिलाएं बच्चों की देखभाल के लिए कुछ समय नौकरी से दूर रही हैं, उनके सीवी में कामकाजी अंतराल दिखाई दे सकते हैं. कुछ एआई सिस्टम ऐसे अंतराल को नकारात्मक रूप से देख सकते हैं.
व्यापक स्तर पर देखें तो टास्कफ़ोर्स का अनुमान है कि 2035 तक एआई और ऑटोमेशन की वजह से महिलाओं की लाखों नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं.
टास्कफ़ोर्स का कहना है कि अगर दोबारा प्रशिक्षण देने में पर्याप्त निवेश नहीं किया गया, तो कंपनियों को कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने से जुड़े ख़र्चों पर 75 करोड़ पाउंड से ज़्यादा खर्च करना पड़ सकता है.
डिजिटल टास्कफ़ोर्स के हालिया सर्वे में 1,000 से ज़्यादा महिलाओं ने हिस्सा लिया. इनमें से 68 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि उनके नियोक्ताओं ने उन्हें दोबारा प्रशिक्षण लेने या डिजिटल भूमिकाओं में जाने का अवसर नहीं दिया.

कैरोलिन हेन्स ने कहा, "जब देश को आर्थिक विकास की सख़्त ज़रूरत है, तब हमें उपलब्ध हर संसाधन का इस्तेमाल करना चाहिए."
"मध्यम स्तर के अनुभव वाली महिलाएं भी एक महत्वपूर्ण संसाधन हैं. अगर वे नौकरी के बाज़ार से बाहर हो जाती हैं, तो इसके बहुत बड़े परिणाम हो सकते हैं."
बीबीसी को यह भी जानकारी मिली है कि लंदन की कुछ कंपनियों ने भर्ती में पूर्वाग्रह की आशंका के कारण एआई टूल का इस्तेमाल बंद कर दिया है.
एआई क़ानून विशेषज्ञ और बोन्साई एआई एंड लीगल कंसल्टेंसी की संस्थापक लॉरा होल्डन का कहना है कि कई कंपनियां यह ठीक से नहीं समझतीं कि ये टूल कैसे काम करते हैं.
उनके मुताबिक इससे "गंभीर नुक़सान" होने की आशंका पैदा हो सकती है.
होल्डन का कहना है कि यह तय करना मुश्किल है कि एआई में पूर्वाग्रह है या नहीं. इसकी एक वजह यह है कि दुनिया भर में ऐसे नियमों की कमी है, जो एआई बनाने वाली कंपनियों को अपने टूल की कार्यप्रणाली बताने के लिए बाध्य करें.

उन्होंने सीवी की जांच करने वाले टूल और एआई से मूल्यांकन किए जाने वाले इंटरव्यू का उदाहरण दिया. उनके अनुसार, ऐसे चरणों में पूर्वाग्रह पैदा हो सकता है.
उन्होंने बताया कि एक टूल सीवी को ए से डी तक ग्रेड देता है. इससे भर्ती करने वालों को ऊंची रैंक वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने के लिए प्रोत्साहन मिलता है.
कुछ अन्य टूल सात साल के करियर अंतराल जैसी बातों को "ध्यान देने योग्य" मानकर चिह्नित करते हैं. इससे भर्ती के फ़ैसले अनुचित रूप से प्रभावित हो सकते हैं.
होल्डन का कहना है कि एआई टूल बनाने वाली कंपनियां बहुत जल्दी यह दावा कर देती हैं कि उनके उत्पाद सुरक्षित हैं और पूर्वाग्रह कम करते हैं.
लेकिन कई बार इन्हें इस तरह तैयार और प्रचारित किया जाता है कि नियोक्ता एआई के दिए गए स्कोर के आधार पर बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को अस्वीकार करने लगते हैं.
कंपनियां इन्हें फ़ैसला लेने में मदद करने वाले टूल बताती हैं. हालांकि होल्डन का कहना है कि व्यवहार में ये अक्सर "स्वचालित निर्णय लेने वाले सिस्टम" की तरह काम करते हैं.
उन्होंने मांग की कि भर्ती में एआई टूल इस्तेमाल करने से पहले उनका अनिवार्य परीक्षण किया जाए और कड़े नियम बनाए जाएं.
उनका तर्क है कि मौजूदा क़ानून एआई को ध्यान में रखकर नहीं बनाए गए थे.
करियर गैप वाली महिलाओं के लिए बाधा बन रहे ये एआई टूल
कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में वरिष्ठ शोधकर्ता डॉ. एलेनोर ड्रेज का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में महिलाओं को नुक़सान पहुंचाने को लेकर एआई के बारे में जताई जा रही चिंताएं "पूरी तरह जायज़" हैं.
उनका तर्क है कि मानव भर्तीकर्ता (ह्यूमन रिक्रूटर) उन उम्मीदवारों की क़ाबिलियत को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं, जो करियर में ब्रेक के बाद वापस नौकरी की दुनिया में लौट रहे होते हैं.
उदाहरण के लिए, मातृत्व अवकाश के बाद लौटने वाली महिलाओं के पास ऐसे कई कौशल होते हैं, जिन्हें दूसरी भूमिकाओं में भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
ड्रेज का कहना है कि एआई इन क्षमताओं को नज़रअंदाज़ कर सकता है.
उन्होंने कहा कि यह साबित करना "बहुत मुश्किल" है कि एआई आधारित भर्ती टूल अपने आप में पक्षपाती हैं या नहीं.
लेकिन उनके मुताबिक़ जिन तर्कों और तरीक़ों पर ये सिस्टम काम करते हैं, वे "पूरी तरह ख़राब" हैं.
उनका कहना है कि एआई किसी व्यक्ति के वास्तविक मूल्य या व्यक्तित्व का आकलन उस तरह नहीं कर सकता, जिस तरह एक मानव भर्तीकर्ता कर सकता है.
उन्होंने यह भी कहा कि कई भर्तीकर्ता पूरी तरह नहीं समझते कि ये टूल कैसे काम करते हैं.
उनका मानना है कि कंपनियों को एआई का इस्तेमाल अपनी भर्ती प्रक्रिया का मूल्यांकन करने के लिए करना चाहिए.
उन्होंने कहा कि एआई का इस्तेमाल "कमज़ोर स्थिति में मौजूद समूहों" का आकलन करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए. इनमें दोबारा नौकरी की दुनिया में लौट रही अधिक उम्र की महिलाएं और करियर में लंबा अंतराल लेने वाले लोग शामिल हैं.
डॉ. ड्रेज मानती हैं कि इन टूल्स के कुछ फ़ायदे भी हैं.
उदाहरण के लिए, ये भर्ती प्रबंधकों को ऐसे उम्मीदवारों की पहचान करने में मदद कर सकते हैं, जिनकी विशेषताएं पहले नियुक्त किए गए कर्मचारियों से मिलती-जुलती हों.
लेकिन उनका कहना है कि अक्सर ये टूल नौकरी तलाशने वालों के हित में काम नहीं करते.
वह कहती हैं, "कई मामलों में ये नौकरी खोज रहे लोगों की तरफ़ नहीं होते."
'कड़े परीक्षण से गुज़ारे गए'
इस लेख में जिन लोगों के अनुभवों का ज़िक्र किया गया है, उनकी चिंताएं व्यापक रूप से एआई आधारित भर्ती टूल्स के इस्तेमाल से जुड़ी हैं. ये आरोप किसी एक कंपनी या सेवा प्रदाता पर केंद्रित नहीं हैं.
एचआर या मानव संसाधन प्रबंधन के लिए एआई आधारित सॉफ़्टवेयर बनाने वाली कंपनी वर्कडे पर एक मुक़दमा चल रहा है.
कंपनी पर आरोप है कि उसने कैलिफ़ोर्निया के क़ानून का हज़ारों बार उल्लंघन किया. आरोपों के अनुसार, उसके टूल्स ने कई बड़ी कंपनियों में भेदभावपूर्ण कारणों से नौकरी के आवेदकों को छांटा.
यह मामला अभी अदालत में विचाराधीन है. इस पर फ़ैसले की उम्मीद इस साल के अंत तक की जा रही है.
बीबीसी ने वर्कडे से संपर्क किया. कंपनी ने कहा कि मुक़दमे में लगाए गए आरोप ग़लत हैं.
कंपनी का यह भी कहना है कि उसके टूल भर्ती संबंधी अंतिम फ़ैसले नहीं लेते.
वर्कडे का कहना है कि उसके भर्ती टूल्स भर्तीकर्ताओं की मदद करते हैं. ये उम्मीदवारों के कौशल और अनुभव के आधार पर उन लोगों की पहचान करते हैं, जो नौकरी की ज़रूरतों से सबसे अधिक मेल खाते हैं.
कंपनी के अनुसार, ये टूल मानव निर्णय की जगह नहीं लेते बल्कि उसका समर्थन करते हैं.
वर्कडे ने कहा कि उसके एआई सिस्टम का उसकी "रेस्पॉन्सिबल एआई" प्रक्रिया के तहत कड़ा परीक्षण किया जाता है.
कंपनी का दावा है कि उसका एआई उम्र या लिंग जैसी विशेषताओं को ध्यान में नहीं रखता.
वर्कडे ने यह भी कहा कि अगर एआई का ज़िम्मेदारी से इस्तेमाल किया जाए, तो यह योग्य उम्मीदवारों को बड़ी संख्या में आवेदनों के बीच नज़रअंदाज़ होने से बचाने में मदद कर सकता है.

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मैनचेस्टर के मेयर एंडी बर्नहम ने हाल ही में भर्ती प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले एआई को लेकर चिंता जताई थी.
उन्होंने कहा था कि एआई ने "भर्ती प्रक्रिया को अधिक निष्पक्ष नहीं बनाया है."
सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा, "एआई नियोक्ताओं को बड़ी संख्या में आने वाले आवेदनों को संभालने और प्रशासनिक बोझ कम करने में मदद कर सकता है."
उन्होंने कहा, "लेकिन यह बेहद ज़रूरी है कि भर्ती प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और सभी के लिए सुलभ बनी रहे."
प्रवक्ता ने कहा, "समानता और डेटा सुरक्षा से जुड़े मौजूदा क़ानून पहले से ही एआई सिस्टम पर लागू होते हैं."
"जहां अतिरिक्त सुरक्षा की ज़रूरत होगी, वहां हम आवश्यक कदम उठाएंगे."
लंदन के मेयर सर सादिक़ ख़ान के एक प्रवक्ता ने कहा कि एआई अपने साथ अवसर और चुनौतियां, दोनों लेकर आता है.
उन्होंने कहा कि यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि महिलाओं के एआई से प्रभावित होने वाली नौकरियों में काम करने की संभावना ज़्यादा होती है.
प्रवक्ता ने कहा कि मेयर ने लंदन एआई एंड जॉब्स टास्कफ़ोर्स की सिफ़ारिशों का समर्थन किया है.
इन सिफ़ारिशों का उद्देश्य नियोक्ताओं को एआई का ज़िम्मेदारी से इस्तेमाल करने में मदद करना और कर्मचारियों को बदलाव के दौर में सहयोग देना है.
जहां तक स्टेसी की बात है, उन्होंने महिलाओं की मदद के लिए एक सामुदायिक चैट समूह और एक मंच शुरू किया है.
इसका मक़सद महिलाओं को यह महसूस कराना है कि वे अकेली नहीं हैं. साथ ही कंपनियों को इन समस्याओं को समझने और उनका समाधान करने में मदद करना भी इसका उद्देश्य है.
स्टेसी कहती हैं, "मैं चाहती हूं कि एक समूह के रूप में हमारी बात सुनी जाए और हमें देखा जाए."
"मैं चाहती हूं कि उम्र और लिंग के आधार पर होने वाला भेदभाव अतीत की बात बन जाए."
"क्योंकि अगर हम ख़ुशक़िस्मत हैं, तो हम सभी एक दिन उम्रदराज़ होंगे."
हमने इस लेख का अनुवाद करने में एआई की मदद ली है, जिसे मूल रूप से अंग्रेज़ी में लिखा गया था. बीबीसी के एक पत्रकार ने प्रकाशन से पहले इस अनुवाद की जांच की. हम एआई का उपयोग कैसे कर रहे हैं, इसके बारे में और जानें.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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