जयललिता के बाद पार्टी को मज़बूत नेतृत्व कौन देगा?

    • Author, राधिका रामाशेषन
    • पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार
  • प्रकाशित

जयललिता के निधन के साथ ही तमिलनाडु की राजनीति में एक खालीपन आ गया है क्योंकि जयललिता करुणानिधि से बहुत आगे निकल गई थीं.

वो तमिलनाडु की राजनीति में एक करिश्माई व्यक्तित्व थीं. वो लोकप्रियता के मामले में राज्य में शिखर पर थीं.

बाकि सभी नेता उनके साए में रह रहे थे. एआईडीएमके में असमंजस की स्थिति अब आ गई है. ओ पनीरसेल्वम मुख्यमंत्री बन गए हैं.

ये ऊपर से दिखाया गया कि सब कुछ बहुत आराम से हो गया है लेकिन जयललिता के अंतिम संस्कार में हर जगह देखिए कि शशिकला छाई हुई हैं.

वो एक तरह से पूरी एआईएडीएमके की राजनीति की केंद्र बिंदु बन गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनसे बात की.

ओ पनीरसेल्वम का कोई व्यक्तिगत आधार नहीं है. वो मदुरैई से हैं और थेवर समुदाय से आते हैं. शशिकला भी थेवर समुदाय से आती हैं.

शशिकला आज तक एआईएडीएमके की सदस्य नहीं बनी हैं लेकिन यह एक महज़ औपचारिकता भर है. वाकई में तो दोनों का ही जनाधार नहीं है.

पनीरसेल्वम जयललिता के नाम पर जीतते आ रहे हैं. अभी चुनाव में काफी वक़्त है. इसलिए अभी इन्हें निकट भविष्य में किसी चुनाव का सामना नहीं करना है.

नेतृत्व का मसला चुनाव के समय ज्यादा पैदा होता है.

देखना है कि अगले चुनाव तक कोई नेतृत्व उभर कर सामने आता है या नहीं जो कि जयललिता की तरह ही बड़े पैमाने पर वोट खींचने वाला हो. मुझे तो फिलहाल कोई नज़र नहीं आ रहा है.

पार्टी को संभालने को लेकर शशिकला की क्षमता की अभी परख नहीं हुई है.

उनकी अभी यही पहचान है कि वो जयललिता की करीबी दोस्त हैं. हालांकि पिछले चुनाव में जयललिता ने शशिकला को टिकट चयन के मामले में उतनी छूट नहीं दी थी.

(बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय से बातचीत पर आधारित)

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