लाइव, ईरान युद्ध के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पारित होने पर ख़फ़ा हुए ट्रंप, बोले 'इन सीनेटरों ने मेरा काम और मुश्किल कर दिया'

अमेरिकी सीनेट ने मंगलवार को जंग से जुड़े एक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी. जिसके तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई जारी रखने से पहले कांग्रेस की स्वीकृति लेने का निर्देश दिया गया है.

सारांश

लाइव कवरेज

अरशद मिसाल

  1. ईरान युद्ध के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पारित होने पर ख़फ़ा हुए ट्रंप, बोले 'इन सीनेटरों ने मेरा काम और मुश्किल कर दिया'

    डोनाल्ड ट्रंप

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    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर अमेरिकी सीनेट के 'वॉर पावर्स एक्ट' पास करने पर प्रतिक्रिया दी है.

    राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "मैंने ईरान को लगभग हरा ही दिया था, वह हार मानने को तैयार था और हमें लगभग सब कुछ देने को राज़ी था. दशकों में पहली बार, वो अमेरिका और उसके राष्ट्रपति यानी मेरा बहुत सम्मान कर रहे थे. लेकिन तभी अमेरिकी सीनेट ने 'वॉर पावर्स एक्ट' पर एक बेवकूफी भरे समय पर और बेकार वोटिंग करवा दी."

    "इससे दुनिया में आतंकवाद को सबसे ज़्यादा बढ़ावा देने वाले देश को यह संदेश गया कि अमेरिका को मेरी कार्रवाई पसंद नहीं है और मुझे इसे रोकना चाहिए. ऐसा करके उन्होंने दुश्मन की मदद की है."

    उन्होंने कहा, "चार रिपब्लिकन 'लूज़र्स' ने डेमोक्रेट्स का साथ दिया, और ईरान ने मेरे लोगों से पूछा, इस सबका क्या मतलब है?"

    "इन सीनेटरों ने मेरा काम और मुश्किल कर दिया है, लेकिन मैं इसे किसी न किसी तरह पूरा करके ही रहूंगा, क्योंकि मैं हमेशा अपना काम पूरा करता हूं."

    दरअसल अमेरिकी सीनेट ने मंगलवार को जंग से जुड़े एक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी. जिसके तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई जारी रखने से पहले कांग्रेस की स्वीकृति लेने का निर्देश दिया गया है.

    ट्रंप के लिए इसे बड़े झटके के तौर पर इसलिए देखा जा रहा है क्योंकि अमेरिकी सीनेट पर उनकी रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण है. मंगलवार को हुए मतदान में कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने डेमोक्रेट्स का साथ दिया.

  2. मध्य प्रदेश सीएम मोहन यादव से जुड़े ज़मीन विवाद पर अखिलेश यादव ने क्या कहा

    अखिलेश यादव

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    इमेज कैप्शन, अखिलेश यादव ने बीजेपी पर सीएम बदलने का आरोप लगाया है(फ़ाइल फ़ोटो)

    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव पर लगे ज़मीन से जुड़े विवाद पर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया दी है.

    अखिलेश यादव ने लखनऊ में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि मोहन यादव को बदनाम करने के लिए बीजेपी ने यह साज़िश की है.

    अखिलेश यादव ने कहा, “मोहन यादव को बदनाम करने के लिए बीजेपी ने यह साज़िश की है. और अगर मोहन यादव पर ये आरोप है, तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने तो 300 से 600 एकड़ ज़मीन ली है.”

    उन्होंने कहा, "यह कोई नई बात नहीं है कि उन्होंने ज़मीन ली है. वे पहले रियल एस्टेट का काम करते थे. आप यह क्यों भूल जाते हैं? बीजेपी मुख्यमंत्री बदलना चाहती है, इसलिए ये आरोप लगवा रही है."

    उन्होंने आगे कहा, "वे मध्य प्रदेश और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों को हटाना चाहते हैं. वे इन दोनों को इसलिए हटाना चाहते हैं क्योंकि वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को हटाना चाहते हैं. यह उन्हें हटाने की एक साज़िश है."

  3. होर्मुज़ स्ट्रेट में फंसे 11 हज़ार नाविकों को बाहर निकालेगा संयुक्त राष्ट्र, ओलिविया आयरलैंड

    स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़

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    इमेज कैप्शन, सांकेतिक तस्वीर

    संयुक्त राष्ट्र का अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) खाड़ी क्षेत्र में फंसे 11 हज़ार से अधिक नाविकों को निकालने की तैयारी कर रहा है. ये नाविक अमेरिका-इसराइल और ईरान के बीच हुए युद्ध की वजह से वहां फंस गए थे.

    आईएमओ के महासचिव आर्सेनियो डोमिंगुएज़ ने कहा, "यह बड़े पैमाने का अभियान, ईरान, ओमान, अमेरिका और क्षेत्र के अन्य तटीय देशों के सहयोग से किया जाएगा."

    पिछले हफ़्ते एक अंतरिम समझौता(एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए थे ताकि संघर्ष समाप्त हो सके, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच अभी भी कुछ चीज़ों को लेकर विवाद है.

    अमेरिका ने कहा है कि इस एमओयू में यह गारंटी शामिल है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम की निगरानी अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) द्वारा की जाएगी.

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर लिखा: "ईरान ने पूरी तरह और अंतिम रूप से भविष्य में उच्च स्तरीय परमाणु निरीक्षणों को स्वीकार कर लिया है. इससे ‘परमाणु ईमानदारी’ सुनिश्चित होगी."

    ट्रंप की पोस्ट से थोड़ी देर पहले ईरान ने कहा था कि संयुक्त राष्ट्र की यह निगरानी संस्था उन परमाणु स्थलों का निरीक्षण नहीं कर पाएगी, जिन्हें पिछले साल अमेरिका और इसराइल ने बमबारी करके नष्ट कर दिया था.

    इसके जवाब में एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा, "ईरानियों ने अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम के अवशेषों पर आईएईए निरीक्षणों पर सहमति दी है. ईरानी शासन अपने नागरिकों के लिए जो कहना है वो कहे."

    ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने मंगलवार को पाकिस्तान दौरे के दौरान कहा, "ईरान किसी भी परिस्थिति में, किसी के साथ भी, अपनी रक्षा क्षमताओं पर कभी बातचीत नहीं करेगा."

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पेजेश्कियान के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बैलिस्टिक मिसाइलों पर कोई चर्चा नहीं हुई और यह बिल्कुल भी चर्चा का विषय नहीं था.

    उन्होंने यह भी कहा कि एमओयू में बैलिस्टिक मिसाइलों का कोई ज़िक्र नहीं है और वह इस बात को “बिना किसी भ्रम के स्पष्ट” करना चाहते हैं.

  4. मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव पर कांग्रेस ने लगाए भ्रष्टाचार के आरोप, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष ने क्या जवाब दिया

    मोहन यादव

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    कांग्रेस ने मंगलवार को अपने एक्स अकाउंट से पोस्ट कर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार के ख़िलाफ़ उज्जैन में ज़मीन से जुड़े करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था.

    कांग्रेस ने इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट शेयर करते हुए लिखा, "मोहन यादव के करीबी रिश्तेदारों ने सरकारी प्रोजेक्ट्स के आसपास करोड़ों की ज़मीनें खरीदी हैं और खूब पैसा बनाया है."

    कांग्रेस के इन आरोपों के बाद मध्य प्रदेश बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की प्रतिक्रिया आई है.

    मध्य प्रदेश बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा, "आज कांग्रेस पार्टी द्वारा हमारे लोकप्रिय मुख्यमंत्री मोहन यादव के खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह ग़लत हैं. कांग्रेस और उसके नेता भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं. मेरा मानना है कि इन आरोपों में बिल्कुल भी सच्चाई नहीं है."

    "मैं यह बताना चाहता हूं कि जब हमारे मुख्यमंत्री ने 2023 में अपना नामांकन दाखिल किया था, तब उनके पास 17 एकड़ ज़मीन थी. इस 17 एकड़ ज़मीन में कोई बदलाव नहीं हुआ है. उनकी पत्नी सीमा यादव के नाम जो 12.29 एकड़ ज़मीन थी, वह भी 2026 तक उतनी ही रही. एक सिद्धि विनायक कंपनी का आरोपों में उल्लेख किया गया है. उसके पास 2023 में 68 एकड़ ज़मीन थी, जो जून में घटकर 65 एकड़ रह गई, और मुख्यमंत्री ने 2017 में ही उसके निदेशक पद से इस्तीफ़ा दे दिया था."

    उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव खुद भी इस मामले पर अपना पक्ष रखेंगे और जो भी उन्हें सही लगेगा, वह कार्रवाई करेंगे.

    उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर भी आरोप लगाया.

    हेमंत खंडेलवाल ने कहा, "मैं कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाना चाहता हूं कि जब-जब इस राज्य में पिछड़े वर्ग से कोई मुख्यमंत्री चुना गया है, चाहे वह उमा भारती हों, शिवराज सिंह चौहान हों या हमारे मोहन यादव, तब-तब कुछ लोगों ने उनके ख़िलाफ़ साजिश रची है और उन्हें कमज़ोर करने का प्रयास किया है."

    "मैं कांग्रेस के आरोपों का विनम्रता और दृढ़ता के साथ खंडन करता हूं. मैं उन्हें चुनौती देता हूं कि जब वे हमारे लोकप्रिय मुख्यमंत्री द्वारा किए गए विकास कार्यों की बराबरी नहीं कर पाए हैं, तो वे हमारी सरकार और मुख्यमंत्री को कमज़ोर करने के लिए ऐसी साजिशों का सहारा ले रहे हैं."

  5. 12 भारतीयों की मौत पर क़तर के अमीर ने जताई संवेदना, पीएम मोदी ने कहा शुक्रिया

    नरेंद्र मोदी और क़तर के अमीर

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    इमेज कैप्शन, मंगलवार को क़तर के अमीर ने प्रधानमंत्री मोदी को फ़ोन कर रास लाफ़ान में हुए हादसे में भारतीय नागरिकों की मौत पर दुख जताया

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को क़तर के अमीर, शेख़ तमीम बिन हमद अल-थानी, को शुक्रिया कहा.

    अमीर ने प्रधानमंत्री मोदी को फ़ोन कर क़तर के रास लाफ़ान में हुए हादसे में भारतीय नागरिकों की मौत पर दुख जताया और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की.

    इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा, "मैं क़तर के अमीर का फ़ोन करने और भारतीय नागरिकों की दुखद मौत पर संवेदना व्यक्त करने के लिए धन्यवाद करता हूं. यह हादसा क़तर के रास लफ़ान इंडस्ट्रियल सिटी में हुआ था."

    "हम दोनों उन परिवारों के दुख में शामिल हैं जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया है, और घायल लोगों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना करते हैं."

    "भारत और क़तर अपने नागरिकों की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और इस कठिन समय में एक-दूसरे के साथ खड़े हैं."

    रविवार को क़तर के रास लाफ़ान इंडस्ट्रियल सिटी में एक फैक्ट्री में हुए धमाके में 13 लोगों की मौत हो गई थी. उनमें से 12 भारतीय थे.

  6. ट्रंप को झटका, रिपब्लिकन के नियंत्रण वाली सीनेट से ईरान युद्ध के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पारित, सरीन हबेशियन

    डोनाल्ड ट्रंप

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    इमेज कैप्शन, मंगलवार को हुए मतदान में कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने डेमोक्रेट्स का साथ दिया (डोनाल्ड ट्रंप, फ़ाइल फ़ोटो)

    अमेरिकी सीनेट ने जंग से जुड़े एक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इस प्रस्ताव के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के ख़िलाफ़ जंग रोकने या सैन्य कार्रवाई जारी रखने से पहले कांग्रेस की स्वीकृति लेने का निर्देश दिया गया है.

    ट्रंप के लिए इसे बड़े झटके के तौर पर इसलिए देखा जा रहा है क्योंकि अमेरिकी सीनेट पर उनकी रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण है.

    मंगलवार को हुए मतदान में कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने डेमोक्रेट्स का साथ दिया. माना जा रहा है कि ईरान युद्ध के प्रति डेमोक्रेट्स के साथ-साथ रिपब्लिकन सदस्यों में भी नाराज़गी है इसी वजह से ऐसा हुआ. ये प्रस्ताव 50-48 मतों से पास हुआ.

    यही प्रस्ताव जून में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भी पारित किया गया था, जहां चार रिपब्लिकन सांसदों ने सभी डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर इसे 215-208 मतों से मंजूरी दी थी.

    हालांकि, यह प्रस्ताव मुख्य रूप से प्रतीकात्मक है क्योंकि कांग्रेस के दोनों सदनों से पारित होने के बावजूद इसे राष्ट्रपति ट्रंप के सामने विचार के लिए नहीं भेजा जाएगा और इसका कानूनी रूप से कोई बाध्यकारी प्रभाव नहीं होगा.

    यह मतदान महत्वपूर्ण है क्योंकि 1973 का वॉर पावर्स रिज़ोल्यूशन लागू होने के बाद पहली बार कांग्रेस के दोनों सदनों ने किसी राष्ट्रपति को सैन्य कार्रवाई समाप्त करने का निर्देश देने वाला प्रस्ताव पारित किया है.

    इसका पारित होना इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे व्हाइट हाउस पर ईरान युद्ध समाप्त करने का दबाव बढ़ा है. युद्ध के कारण पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि हुई है और जनता के बीच युद्ध के विरोध में भी बढ़ोतरी देखी गई है.

    हालांकि, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि 7 अप्रैल को हुए युद्धविराम (सीज़फायर) के बाद अब ऐसी कोई सक्रिय सैन्य कार्रवाई नहीं है जिससे अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने की आवश्यकता हो.

    अधिकारी ने यह भी कहा कि यह प्रस्ताव केवल इसलिए पारित हो पाया क्योंकि दो रिपब्लिकन सीनेटर, मिच मैककॉनेल और डेव मैककॉर्मिक मतदान के समय अनुपस्थित थे.

    चार रिपब्लिकन सीनेटर रैंड पॉल, लिसा मर्कोव्स्की, सुसान कॉलिन्स और बिल कैसिडी ने डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया.

    डेमोक्रेटिक सीनेटर जॉन फेटरमैन अपनी पार्टी के एकमात्र सदस्य थे जिन्होंने इस प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया.

    यह मतदान नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों (मिडटर्म इलेक्शंस) से पहले रिपब्लिकन पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों का एक और संकेत माना जा रहा है.

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