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बांकीपुर उप चुनाव: प्रशांत किशोर और बीजेपी-आरजेडी के उम्मीदवारों पर क्या कह रहे हैं लोग और क्या हैं ज़मीनी मुद्दे
- Author, सीटू तिवारी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, पटना के बांकीपुर से
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 9 मिनट
बिहार के बांकीपुर विधानसभा उप चुनाव के लिए आगामी 30 जुलाई को वोटिंग होनी है.
बीजेपी का गढ़ रही इस सीट पर हो रहे उप चुनाव में प्रशांत किशोर की एंट्री ने चुनाव को दिलचस्प बना दिया है. जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर इस सीट से अपनी चुनावी राजनीति की शुरुआत कर रहे हैं.
बीते विधानसभा चुनाव में जनसुराज पार्टी ने 238 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें पार्टी को 3.4 फ़ीसदी वोट मिले थे.
राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने इस सीट पर रेखा गुप्ता को, वहीं भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने नीरज कुमार सिन्हा को टिकट दिया है.
पहले बीजेपी ने बांकीपुर पर नितिन नबीन के क़रीबी अभिषेक कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया था. उन्होंने नामांकन भी कर दिया था लेकिन बीती 10 जुलाई को अभिषेक कुमार ने पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए अपना नाम वापस ले लिया.
ये सीट नितिन नबीन के बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद ख़ाली हुई थी.
बांकीपुर: हॉट सीट, तीन दशक से बीजेपी का गढ़
पटना ज़िले की 14 विधानसभा सीटों में से एक, बांकीपुर महत्वपूर्ण विधानसभा सीट है.
पटना के कदमकुआं, राजेन्द्र नगर, गर्दनीबाग़, सचिवालय, बोरिंग रोड, मीठापुर, गांधी मैदान सहित कई महत्वपूर्ण मोहल्ले इस विधानसभा क्षेत्र में आते हैं. कायस्थ बहुल मानी जाने वाली इस सीट में कुल मतदाता 3,79,402 हैं.
साल 1995 से इस सीट पर बीजेपी जीतती रही है. उस वक़्त ये सीट पटना पश्चिम कहलाती थी. साल 2008 में परिसीमन के बाद ये सीट बांकीपुर कही जाने लगी.
1995 में यहां से नितिन नबीन के पिता नवीन किशोर सिन्हा ने जीत हासिल की थी.
वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी बीबीसी को बताते हैं, "नवीन किशोर पीरमुहानी इलाक़े में ही किराए के घर पर रहते थे. बहुत सौम्य, सहज और सामाजिक रिश्तों को महत्व देने वाले थे. विधायक बनने के बाद भी वो अपनी प्रिया स्कूटर से घूमते थे. उनकी सहजता का गुण नितिन नबीन में भी दिखता है जो राजनीति में अपने सहयोगियों और विरोधियों के साथ मधुर रिश्ता रखते हैं."
साल 2005 के विधानसभा चुनाव जीतने के बाद नवीन किशोर सिन्हा का निधन हो गया था. जिसके बाद नितिन नबीन ने अपनी राजनीतिक पारी बांकीपुर से शुरू की.
अप्रैल 2006 में हुए चुनाव में नितिन नबीन को बांकीपुर में हुई कुल वोटिंग का 80 फ़ीसदी से ज़्यादा वोट मिला था.
साल 2006 से 2025 तक नितिन नबीन ही इस सीट से जीतते रहे. साल 2025 में उनको 63 फ़ीसदी वोट मिले थे और उन्होंने आरजेडी की रेखा गुप्ता को 51 हज़ार से ज़्यादा वोट से शिकस्त दी थी.
दो मुख्यमंत्री बने, लेकिन बांकीपुर की स्थिति बदहाल
पटना पश्चिम (अब बांकीपुर) से 1962 में कृष्ण वल्लभ सहाय और 1967 में महामाया प्रसाद सिन्हा जीते थे. ये दोनों ही पटना पश्चिम से विधायक बनने के बाद बिहार के मुख्यमंत्री बने.
बांकीपुर शहरी सीट है. इस सीट से पांच बार विधायक रहे नितिन नबीन, बिहार सरकार में पथ निर्माण और नगर विकास मंत्री रहे. लेकिन बांकीपुर की सड़क, साफ-सफाई से लेकर ड्रेनेज व्यवस्था बदहाल है.
पटना में बारिश के मौसम में जल-जमाव की जो तस्वीरें ख़बरों में आती हैं उसमें बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र का बड़ा हिस्सा है. इस विधानसभा क्षेत्र में शत्रुघ्न सिन्हा, शेखर सुमन, सुशील कुमार मोदी, शारदा सिन्हा, रविशंकर प्रसाद, राजीव प्रताप रूड़ी, सत्येन्द्र नारायण सिन्हा के निजी आवास हैं.
कदमकुआं इलाक़े में रहने वाले सुधाकर कुमार बीबीसी से कहते हैं, "ज़रा-सी बारिश हो तो पूरे इलाक़े में जल-जमाव हो जाता है. ये हर साल की रीत है. कोई नेता आ जाए, पटना के ये इलाक़े नहीं बदलने वाले. ऊपर से जैसे ही बारिश नज़दीक होती है सड़कें खुदने लगती हैं."
बारिश के इस मौसम में भी पूरे विधानसभा क्षेत्र में गलियां जगह-जगह खुदी पड़ी हैं.
विधानसभा क्षेत्र के मीठापुर मोहल्ले की पत्थर गली में लोग नाराज़ हैं. उनकी नाराज़गी की वजह है उनकी पतली-सी गली को बीती 11 जून को खोद कर छोड़ दिया गया है.
इस गली में जगह-जगह पानी जमा है जो बीमारियों को दावत दे रहा है. गली खोद दिए जाने की वजह से लोग अपने घरों से मुश्किल से निकल पाते हैं.
गली की शुरुआत में ही शिलापट्ट लगा है जिसमें लिखा है कि 44.37 लाख रुपये की लागत से नाली और पीसीसी निर्माण किया जा रहा है.
यहां रहने वाले संजय कुमार कहते हैं, "नाली निर्माण के लिए जो छड़ डाले जा रहे हैं, वो बहुत पतले हैं. हम लोगों को घर में कैद कर रखा है. आते-जाते डर लगता है कि कहीं कोई बच्चा खुदे हुए गड्ढे में गिर न जाए."
'प्रशांत किशोर का मार्केट अभी नहीं है'
यही हाल विधानसभा क्षेत्र के कई इलाक़ों, सड़कों और गलियों का है.
मंदिरी इलाक़े में रहने वालीं मीना कहती हैं, "हम लोग सरकार से सड़क, पानी और साफ-सफाई चाहते हैं. लेकिन ये लोग जीतकर चले जाते हैं. अगर सरकार पैसा लगाकर कोई काम भी करवाती है तो कोई देखने नहीं आता कि काम सही हो रहा है कि गड़बड़ है."
वहीं बोरिंग रोड से सटे एसके पुरी में रहने वाले निशांत कुमार सवाल करते हैं, "ये इलाक़ा देखकर आपको लगता है कि हम किसी पॉश कॉलोनी में रह रहे हैं? जगह-जगह कूड़ा है, सड़क तक नहीं है. बसावन पार्क तक बदहाल पड़ा है."
प्रशांत किशोर के बांकीपुर से चुनाव लड़ने की वजह से ये चुनाव आम शहरियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है. बीजेपी ने जिन नीरज कुमार सिन्हा को चुनावी मैदान में उतारा है, वो एक सामान्य कार्यकर्ता हैं.
मंदिरी में रहने वाले रिक्शा चालक हरी महतो कहते हैं, "प्रशांत किशोर अच्छे आदमी हैं, लेकिन उनका मार्केट अभी नहीं है. मार्केट अभी तेजस्वी का है. मोदी जी की सरकार में हम लोग ज़मीन में धंसते जा रहे हैं (हालात ख़राब हो रहे हैं) और पैसे वाले ज़्यादा अमीर होते जा रहे हैं. हमें ग़रीब की बात सुनने वाला नेता चाहिए."
वहीं इसी इलाक़े के श्याम सुंदर यादव, प्रशांत किशोर को शाहाबाद जाने की सलाह देते हैं.
वो कहते हैं, "प्रशांत किशोर राष्ट्रीय नेता हो सकते हैं लेकिन हमें तो लोकल नेता चाहिए. हमारे लिए बीजेपी ही ठीक है. प्रशांत किशोर जाएं शाहाबाद और वहीं से चुनाव लड़ें. बांकीपुर तो बीजेपी का है."
बीजेपी ने अपना उम्मीदवार क्यों बदला?
बीजेपी ने पहले अपना उम्मीदवार अभिषेक कुमार सिन्हा को बनाया था. 26 साल से पार्टी कार्यकर्ता के तौर पर काम कर रहे अभिषेक बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय थे.
नितिन नबीन के क़रीबी अभिषेक भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) में सक्रिय रहे हैं और मंडल अध्यक्ष सहित कई पदों पर रहे हैं.
उन्होंने अपना नामांकन वापस ले लिया है. जिसके बाद बीजेपी ने बूथ स्तर के कार्यकर्ता नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया है. .
नीरज कुमार सिन्हा को जब बांकीपुर से प्रत्याशी बनाए जाने की सूचना मिली तब वो बूथ के लिए पर्ची बना रहे थे.
ऐसे में सवाल ये है कि बीजेपी ने अपना उम्मीदवार क्यों बदला और इससे क्या चुनावी नतीजों पर यानी बीजेपी के गढ़ में सेंध लग सकती है?
इस सवाल पर वरिष्ठ पत्रकार शैलेन्द्र कुमार कहते हैं, "ये बीजेपी के लिए और ख़ास तौर पर नितिन नबीन के लिए बड़ा धक्का है. नितिन नबीन जिन्हें नरेंद्र मोदी अपना बॉस कहते हैं, उनके होमवर्क पर भी सवाल है कि क्या अभिषेक को प्रत्याशी घोषित करने से पहले जांच-परख नहीं की गई थी. ये नहीं देखा गया कि अभिषेक के माता-पिता को चारा घोटाले में सज़ा मिली है और ख़ुद अभिषेक की शैक्षणिक योग्यता शक के घेरे में है."
वो आगे कहते हैं, "लेकिन प्रत्याशी बदलने से बीजेपी को बहुत नुक़सान होगा, ऐसा नहीं लगता. बीजेपी के अपने कमिटेड वोटर हैं और तीन से चार फ़ीसदी वोटिंग का अंतर पड़ सकता है."
दरअसल, मीडिया में चल रही ख़बरों के मुताबिक़ अभिषेक के माता-पिता, चंचला सिन्हा और रविंद्र प्रसाद, चारा घोटाले के अलग-अलग मामलों में दोषी पाए गए हैं. सीबीआई की ओर से जारी प्रेस रिलीज़ में भी इसका ज़िक्र मिलता है.
सीबीआई की प्रेस रिलीज़ में रविंद्र प्रसाद और चंचला सिन्हा का ज़िक्र है.
प्रशांत और रेखा की राह
बीते चुनाव में आरजेडी ने रेखा गुप्ता को ही उम्मीदवार बनाया था. उन्हें 46,363 वोट मिले थे, जबकि तीसरे नंबर पर रहीं जनसुराज की प्रत्याशी वंदना कुमारी को 7,717 वोट मिले थे.
इस चुनाव में नितिन नबीन को 98,299 वोट मिले थे.
वैश्य समुदाय से आने वालीं रेखा गुप्ता का दावा है कि बांकीपुर एक वैश्य बहुल सीट है और यहां से वैश्य उम्मीदवार को ही जीतना चाहिए.
सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर इलाक़े में सक्रिय रेखा गुप्ता बीबीसी से कहती हैं, "बांकीपुर कायस्थ बहुल नहीं बल्कि वैश्य बहुल सीट है. पिछली बार मुझे अच्छे वोट मिले थे. इस बार ये अति-पिछड़ा की बेटी बांकीपुर में नंबर एक पर रहेगी. प्रशांत किशोर या किसी और के चुनाव लड़ने से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता."
साल 2025 में कांग्रेस में एक महीने रहने के बाद रेखा गुप्ता ने आरजेडी जॉइन की थी. आरजेडी में आने के साथ ही उन्हें बांकीपुर से टिकट मिल गई थी.
वहीं, जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर कह रहे हैं, "बांकीपुर का चुनाव किसी एक विधानसभा क्षेत्र का चुनाव नहीं है, बल्कि ये सीएम सम्राट चौधरी के तीन महीने के कार्यकाल पर जनमत है."
बांकीपुर विधानसभा में डोर-टू-डोर संपर्क अभियान चला रहे प्रशांत किशोर क्या बीजेपी का ये किला भेद पाएंगे?
इस सवाल पर पत्रकार प्रवीण बागी कहते हैं, "ये कायस्थ बहुल सीट है जिसके वोटर जनसंघ के जमाने से बहुत कमिटेड वोटर हैं. प्रशांत राष्ट्रीय नेता हो सकते हैं लेकिन बीजेपी ने उनके ख़िलाफ़ एक बूथ लेवल के कार्यकर्ता को उतारा है."
"दूसरा ये कि प्रशांत किशोर के लिए ये क्षेत्र नया है. यहां के वोटर उनके नाम से परिचित हैं लेकिन बीजेपी के लोग गली-गली से परिचित हैं, जो उनके लिए जीत की कुंजी साबित होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है."
बांकीपुर सीट से तेज प्रताप यादव की पार्टी जनशक्ति जनता दल ने वीणा मानवी को उम्मीदवार बनाया है. वीणा मानवी सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता हैं.
हालांकि, बांकीपुर में लड़ाई फ़िलहाल त्रिकोणीय है. बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र, उन क्षेत्रों में से एक है जहां सबसे कम मतदान होता है. साल 2020 में यहां 37 फ़ीसदी और साल 2025 में यहां मात्र 41 फ़ीसदी वोटिंग हुई थी.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित