विधानसभा उपचुनाव: बिहार के बांकीपुर में मतगणना में प्रशांत किशोर आगे

प्रशांत किशोर ने बांकीपुर का उपचुनाव बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के ख़िलाफ़ लड़ाई में बना दी (फ़ाइल फ़ोटो)

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बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव की मतगणना में जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर आगे चल रहे हैं. इस सीट पर बीजेपी के नीरज कुमार दूसरे नंबर पर हैं.

चुनाव आयोग के मुताबिक़ बांकीपुर सीट पर कुल 31 राउंड की काउंटिंग होनी है और यहां अभी नौ राउंड की गिनती पूरी हुई है, जिसमें प्रशांत किशोर अपनी बढ़त बनाए हुए हैं.

प्रशांत किशोर को 17856 वोट मिले हैं और वो फ़िलहाल 5272 वोटों से आगे हैं. जबकि आरजेडी की रेखा कुमारी तीसरे नंबर पर हैं.

बांकीपुर सीट पटना के शहरी इलाक़े में मौजूद है और इसे बीजेपी का मज़बूत गढ़ माना जाता है. इस सीट से बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन विधायक थे.

वहीं मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर हुए उपचुनाव में बीजेपी के आशुतोष तिवारी पीछे चल रहे हैं, जबकि गुजरात की मांजलपुर विधानसभा सीट पर बीजेपी के ही सतेंद्रभाई पटेल आगे चल रहे हैं.

इन सीटों पर 30 जुलाई को वोटिंग हुई थी.

दतिया सीट पर कुल 15 राउंड की गिनती होनी है. यहां चार राउंड के बाद बीजेपी के आशुतोष तिवारी 833 वोटों पीछे हैं. इस सीट पर कांग्रेस के घनश्याम सिंह आगे चल रहे हैं.

गुजरात की मांजलपुर विधानसभा सीट पर बीजेपी के ही सतेंद्रभाई पटेल उर्फ़ सतीष पटेल आगे चल रहे हैं. यहां कुल 19 राउंड की गिनती होनी है. 9 राउंड की गिनती के बाद उन्हें कांग्रेस के भीखाभाई रबारी से क़रीब 13600 वोट ज़्यादा मिले हैं.

आमतौर पर विधानसभा उपचुनाव को लेकर बहुत ज़्यादा उत्साह नहीं देखा जाता है, लेकिन इस बार बांकीपुर में जन सुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर ख़ुद चुनाव मैदान में उतरे और इस वजह से इसके नतीजे पर कई लोगों की नज़र है.

वहीं मध्य प्रदेश की दतिया सीट से नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिए जाने की भी खूब चर्चा रही. पार्टी के इस फ़ैसले के बाद उनके समर्थकों में नाराज़गी भी देखी गई थी.

दिल्ली के साथ ही देश के कई इलाक़ों में युवाओं और स्टूडेंट्स के आंदोलन के ठीक बाद इन सीटों पर उपचुनाव के लिए वोट डाले गए थे. इन उपचुनावों को प्रदर्शनों के असर के नजरिए से भी देखा जा रहा है.

प्रशांत किशोर पहली बार ख़ुद चुनाव मैदान में उतरे

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बांकीपुर विधानसभा सीट (बिहार)

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इस शहरी सीट पर हुए उपचुनाव में क़रीब 35 फ़ीसदी वोटिंग हुई थी. साल 2025 के विधानसभा चुनाव में यहाँ 41.35% मतदान हुआ था. तब बीजेपी के नितिन नबीन ने आरजेडी की रेखा गुप्ता को क़रीब 52 हज़ार मतों से हराया था.

इस सीट से बीजेपी ने नीरज कुमार, जन सुराज पार्टी ने प्रशांत किशोर और आरजेडी ने रेखा गुप्ता को मैदान में उतारा था. प्रशांत किशोर के चुनाव में उतरने से यह सीट हाई प्रोफ़ाइल हो गई.

भाजपा के गढ़ में प्रशांत किशोर ने दी चुनौती

बांकीपुर सीट से बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन विधायक थे. उन्हें पार्टी ने अपना राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया. राज्यसभा के लिए सांसद चुने जाने के बाद उन्होंने इस सीट से इस्तीफ़ा दे दिया था.

पांच जुलाई को एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में जन सुराज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने प्रशांत किशोर की उम्मीदवारी की घोषणा की थी. जिसके बाद यह यह हाई प्रोफ़ाइल मुक़ाबले में बदल गई.

इससे पहले नवंबर 2025 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज पार्टी ने अधिकांश सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे लेकिन प्रशांत किशोर ने अंतिम समय में चुनाव में उतरने से मना कर दिया था.

उन्होंने कहा था कि 'यह उनकी पार्टी का फ़ैसला था कि बाकी सीटों पर ध्यान देना ज़रूरी है.'

बांकीपुर से चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद उन्होंने कहा था, "मैं बांकीपुर उपचुनाव लड़ने की ज़िम्मेदारी को उसी लक्ष्य की तरफ एक कदम मानता हूं. नवंबर 2025 में हज़ारों और लाखों लोग जन सुराज के विचारों और प्रयासों से जुड़े थे. अगर हम जीते तो इससे न सिर्फ़ यह आंदोलन मजबूत होगा, बल्कि बिहार में बदलाव की सोच को भी नई ताक़त मिलेगी."

जन सुराज पार्टी साल 2025 के चुनाव में अपना खाता तक नहीं खोल पाई थी. पार्टी का प्रदर्शन इतना ख़राब रहा कि उसके 238 में से 236 उम्मीदवार अपनी ज़मानत तक नहीं बचा पाए.

बीजेपी ने अंतिम समय में बदला था उम्मीदवार

इस सीट पर बीजेपी की ओर से घोषित उम्मीदवार अभिषेक कुमार सिन्हा ने अंतिम समय में पारिवारिक कारण बताते हुए 10 जुलाई को अपना नामांकन वापस ले लिया था.

जबकि कुछ घंटे पहले तक बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बांकीपुर में अभिषेक कुमार के लिए लोगों से वोट मांग रहे थे. इसके बाद पार्टी ने नीरज कुमार सिन्हा को अपना उम्मीदवार घोषित किया. नीरज साल 2006 से बीजेपी के सदस्य हैं और दो बार मंडल अध्यक्ष रहे हैं.

इस पूरे घटनाक्रम पर प्रशांत किशोर का कहना था कि जनता के पास अब विकल्प आ गया है तो बीजेपी को अब उम्मीदवार नहीं मिल रहा है.

मांजलपुर विधानसभा सीट (गुजरात)

मांजलपुर में मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ भाजपा के उम्मीदवार सतीश गोविंदभाई पटेल (बाएं) और कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री भीखाभाई रबारी (दाएं) के बीच रहा

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गुजरात की मांजलपुर विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को हुए उपचुनाव में 37.5% मतदान हुआ. साल 2022 के विधानसभा चुनाव में यहां 63.61% मतदान दर्ज किया गया था.

बीजेपी के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री योगेश पटेल के 2 जून को लंबी बीमारी के बाद निधन के कारण इस सीट पर उपचुनाव कराया गया.

मांजलपुर में मुख्य मुक़ाबला बीजेपी के उम्मीदवार सतेंद्रभाई पटेल और कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री भीखाभाई रबारी के बीच है.

योगेश पटेल गुजरात की राजनीति के प्रमुख नेताओं में गिने जाते थे. वे आठ बार विधायक चुने गए.

उन्होंने 1990 से 2007 तक पांच बार वडोदरा की रावपुरा सीट का प्रतिनिधित्व किया. परिसीमन के बाद वे मांजलपुर सीट से चुनाव मैदान में उतरे और 2012, 2017, 2022 में लगातार जीत दर्ज की.

इस तरह उन्होंने 36 वर्षों के राजनीतिक सफर में विधानसभा चुनावों में लगातार आठ जीत हासिल कीं.

कांग्रेस ने इस उपचुनाव को इस सीट पर लंबे समय से चली आ रही बीजेपी की पकड़ को तोड़ने के मौक़े के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश की है.

दतिया विधानसभा सीट (मध्य प्रदेश)

कांग्रेस की ओर से घनश्याम सिंह(बाएं) और भाजपा की ओर से आशुतोष तिवारी (दाएं) को उम्मीदवार बनाया गया

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मध्य प्रदेश की बीजेपी ने इस बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से आने वाले आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है. साल 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने नरोत्तम मिश्रा को 7,500 से अधिक मतों से हराया था.

हालांकि, दिल्ली की एक अदालत ने अप्रैल में धोखाधड़ी के एक मामले में भारती को तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी, जिसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई और दतिया सीट पर उपचुनाव कराए गए.

प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व और पार्टी के चुनावी प्रबंधन की भी इस चुनाव के जरिए परीक्षा मानी जा रही है.

कांग्रेस के लिए भी यह उपचुनाव काफ़ी अहम है. पार्टी पिछले लगभग एक वर्ष से संगठन को मजबूत करने और नए नेतृत्व को आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है.

कांग्रेस की ओर से घनश्याम सिंह को चुनाव लड़ाया गया. आजाद समाज पार्टी ने दामोदर सिंह यादव को मैदान में उतारकर मुक़ाबले को त्रिकोणीय बनाने का प्रयास किया. मगर मुख्य लड़ाई बीजेपी और कांग्रेस के बीच है.

इस उपचुनाव के नतीजे से प्रदेश सरकार की स्थिरता या विधानसभा में बहुमत पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन अगले साल प्रस्तावित नगर निकाय और पंचायत चुनावों की रणनीति तय करने में इसका असर हो सकता है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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