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'मैं सुबह 9 से शाम 5 बजे तक नौकरी ही खोजता रहता हूं'
भारत में 15 से 29 वर्ष की उम्र के 36.7 करोड़ युवा हैं. यह दुनिया में युवाओं की सबसे बड़ी आबादी है और देश की कामकाजी उम्र की आबादी का करीब एक तिहाई हिस्सा है. इनमें से 26.3 करोड़ युवा शिक्षा में नहीं हैं और संभावित वर्कफोर्स का हिस्सा हैं.
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के ताज़ा पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे के मुताबिक, अप्रैल से जून 2026 की तिमाही में इस समूह की बेरोज़गारी दर 15.9 प्रतिशत रही. यह जनवरी से मार्च 2026 की पिछली तिमाही के 15 प्रतिशत से मामूली अधिक है.
वहीं, अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की 'स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया 2026' रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रेजुएट युवाओं में बेरोज़गारी की स्थिति और भी खराब है. 15 से 25 वर्ष की उम्र के ग्रेजुएट युवाओं में बेरोज़गारी दर करीब 40 प्रतिशत, जबकि 25 से 29 वर्ष की उम्र के युवाओं में करीब 20 प्रतिशत है.
यह समझने के लिए कि इन आंकड़ों का युवाओं पर क्या असर पड़ता है, हम उत्तर प्रदेश के एक ग्रेजुएट युवा अभि की कहानी देखते हैं.
अभि नोएडा में नौकरी की तलाश के दौरान इंटरव्यू, रिजेक्शन और रोज़मर्रा की चुनौतियों से गुज़र रहे हैं. उनकी कहानी यह समझने में मदद करती है कि ये आंकड़े ज़मीन पर क्या मायने रखते हैं और आज भारत में एक युवा ग्रेजुएट के लिए नौकरी हासिल करना कितना मुश्किल है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.