एनसीपीआई को लेकर फिर हंगामा, ऑल पार्टी मीटिंग से विपक्ष ने किया वॉकआउट

इमेज स्रोत, ANI
संसद का मानसून सत्र सोमवार 20 जुलाई से शुरू हो रहा है. इससे पहले रविवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई गई, लेकिन विपक्षी सांसदों ने इस दौरान वॉकआउट कर दिया.
यह बैठक सुबह 11 बजे पार्लियामेंट एनेक्सी में शुरू हुई. इसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और डीएमके सहित कई विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए. लेकिन कुछ देर बाद विपक्षी सांसदों ने वॉकआउट कर दिया.
विपक्षी सांसदों का तर्क है कि सरकार ने टीएमसी के बाग़ी 20 सांसदों के गुट को बैठक में बुलाया, जबकि स्पीकर ओम बिरला ने अभी इनके गुट को मान्यता नहीं दी है.
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने बताया कि इस मामले में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, एनसीपी, शिव सेना (यूबीटी), सीपीआई, सीपीएम, केरला कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा और आम आदमी पार्टी समेत सभी विपक्षी दल उनके साथ बैठक से बाहर आ गए.
दरअसल पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद टीएमसी (तृणमूल कांग्रेस) के विधायकों और सांसदों में बग़ावत देखी गई.
इसी सिलसिले में टीएमसी के 20 लोकसभा सांसद एनसीपीआई नाम की एक पार्टी में शामिल हो गए हैं. यह पश्चिम बंगाल की एक रजिस्टर्ड पार्टी है. हालांकि इसके पास पहले से राजनीतिक तौर पर न तो कोई सांसद है और न कोई विधायक.
इन 20 सांसदों की बग़ावत के बाद टीएमसी ने लोकसभा अध्यक्ष से मांग की है कि दलबदल क़ानूनों के अधीन इन सांसदों की सदस्यता रद्द की जाए.
वहीं एनसीपीआई में शामिल इन सांसदों ने सदन में अपने लिए अलग से बैठने और अपनी पार्टी के लिए मान्यता देने की मांग की है.
मानसून सत्र से पहले सरकार की अपील

इमेज स्रोत, ANI
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी दलों के बायकॉट पर पत्रकारों से बातचीत में प्रतिक्रिया दी है.
उन्होंने कहा, "उन्होंने थोड़े समय के लिए बायकॉट किया. यह औपचारिक था. उन्हें अपना मत रखने का अधिकार है. लेकिन एनसीपीआई के 20 लोकसभा सांसदों ने हस्ताक्षर करके लोकसभा स्पीकर के पास नई पार्टी को मान्यता देने और संसद में अलग से बैठने की मांग की है."
"यह मामला अभी लोकसभा अध्यक्ष के पास विचाराधीन है. लेकिन 20 सांसदों को दरकिनार कर के हम उन्हें बैठक में न बुलाएं, यह कैसे हो सकता है. मान्यता देना या नहीं देना यह एक प्रक्रिया है. सरकार की ड्यूटी है कि सब एक साथ आ जाएं, सर्वसम्मति हो, तो इसके लिए सभी को बुलाना ही पड़ेगा."
किरेन रिजिजू ने बैठक के बाद पत्रकारों से कहा, "हमने शुरू से अपील की. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुरू में ही अपील की कि मानसून सत्र ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया में भी लड़ाई चल रही है और बाक़ी चीज़ों का प्रभाव भी पड़ता है. ऐसे समय में सभी राजनीतिक दलों को एक होकर देश के लिए काम करना चाहिए."
उन्होंने बताया, "बहुत से दलों ने अपनी बात रखी है. हमने उसे नोट किया है. ऑल पार्टी मीटिंग में अलग-अलग मत तो होता ही है. हम सभी राजनीतिक दलों से आग्रह करते हैं कि इस मानसून सत्र में सरकार जो विधेयक रखने वाली है, उस पर सभी सार्थक चर्चा करें और पारित करें."
उन्होंने आगे कहा, "छोटे दलों ने मांग की है कि उन्हें बोलने का ज़्यादा समय दिया जाए. हमारा यही कहना है कि अगर संसद सत्र अच्छे से चला तो सबको बोलने का मौक़ा मिलेगा. अगर हंगामा हुआ तो फिर ऐसा नहीं हो सकता है और फिर यह आरोप लगाना ठीक नहीं है कि बिल को बिना चर्चा या कम चर्चा के पारित कर दिया गया."
किरेन रिजिजू के इस बयान में दिखता है कि अगर संसद को मानसून सत्र ज़्यादा हंगामेदार रहा तो भी सरकार अपने विधेयकों को पारित कराने की कोशिश ज़रूर करेगी.
रिजिजू ने बताया है कि "फ़िलहाल लोकसभा और राज्यसभा के बुलेटिन के ज़रिए आठ विधेयकों की जानकारी दी गई है. इसके अलावा हम अगर कोई बिल लाते हैं तो इसकी चर्चा करेंगे, हम इसके बारे में बाताएंगे. हम सभी विपक्षी दलों को भी इसकी जानकारी देंगे."
सर्वदलीय बैठक में क्यों हुआ हंगामा

इमेज स्रोत, ANI
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा के मुताबिक़ संसद के रिकॉर्ड में मौजूदा समय में टीएमसी के सांसदों की संख्या 28 है और इसमें एनसीपीआई का कोई ज़िक्र नहीं है. उन्होंने कहा कि टीएमसी के ये सांसद फ़िलहाल सदस्यता रद्द होने का इंतज़ार कर रहे हैं.
महुआ मोइत्रा ने कहा, "हमने उन 20 सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग की है. लोकसभा अध्यक्ष को इस मुद्दे पर फ़ैसला लेना चाहिए. वो हमारी याचिका पर हां या ना में फ़ैसला ले सकते हैं, क्योंकि इस मामले में नियम काफ़ी स्पष्ट हैं."
महुआ मोइत्रा का कहना है, "इन 20 सांसदों ने कहा है कि वे एनसीपीआई के सांसद हैं, यह उनकी संसद सदस्यता रद्द करने का आधार है. आप इस पर फ़ैसला लीजिए. अगर आप उनकी सदस्यता रद्द नहीं करते हैं तो हम अदालत जाएंगे."
महुआ मोइत्रा ने बताया कि इस बैठक में महिला आरक्षण विधेयक की चर्चा हुई, लेकिन विपक्षी सांसदों का स्पष्ट कहना है कि यह क़ानून पहले ही पास हो चुका है और सरकार लोकसभा में सांसदों की मौजूदा संख्या यानी 543 के आधार पर इसे लागू करे.
महुआ मोइत्रा ने कहा कि बैठक में डिलिमिटेशन को लेकर कोई बात नहीं हुई.
वहीं इस मुद्दे पर टीएमसी के सांसद कल्याण बनर्जी ने पश्चिम बंगाल के हुगली में पत्रकारों से बात की.
उन्होंने कहा, "20 सांसदों के ख़िलाफ़ हमारी याचिका में उठाए गए सवालों पर फ़ैसला लिए बिना, हमें ऐसी उम्मीद नहीं थी कि इन सांसदों को मीटिंग में बुलाया जाएगा. विधानसभा या लोकसभा के अध्यक्ष की भूमिका उच्च मानदंडों और पारदर्शिता वाली होती है. असल में वे संविधान के अभिभावक होते हैं. यह अपेक्षा थी कि स्पीकर एक न्यूट्रल पोज़िशन लेंगे."
टीएमसी के विद्रोही गुट ने क्या कहा

इमेज स्रोत, ANI
टीएमसी के विद्रोही गुट के सांसद सुदीप बंदोपाध्याय ने सर्वदलीय बैठक में बुलाए जाने पर कहा, "हमें बुलाया गया और हम आए. यह (एनसीपीआई) एक नई पार्टी है. हमारे पास 20 सांसद हैं. सरकार को सदन चलाने के लिए कदम उठाने होंगे."
सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा, "मैंने 12वीं लोकसभा से 18 वीं लोकसभा तक कभी नहीं देखा कि ऑल पार्टी मीटिंग का बायकॉट होता है. हम एनडीए से साथ हैं और 20 सांसदों के साथ एनडीए में एनसीपीआई दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है."
उन्होंने कहा कि सोमवार को संसद का सत्र शुरू होते ही सबको पता चल जाएगा कि कौन कहां बैठता है और 'अगर लोकसभा अध्यक्ष को लगता है तो वो हमारी सदस्यता रद्द कर देंगे, हम कल यह देख लेंगे.'
टीएमसी की ही एक अन्य बाग़ी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा, "ऑल पार्टी मीटिंग में हम इस पर बात करते हैं कि आगे हम क्या करेंगे. अगर उनके सांसदों की संख्या 28 से 8 हो गई तो उनको सोचना चाहिए कि ऐसा क्यों हुआ. क्यों 20 लोग उनसे नाराज़ हैं. वॉकआउट कर के उन्होंने उचित नहीं किया."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें
BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह
कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.























