राहुल गांधी के अमित शाह पर हमले के बाद बीजेपी क्यों बोली, 'राहुल भागना नहीं...'

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लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की गृह मंत्री अमित शाह पर की गई टिप्पणियों के जवाब में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने उन पर हमला बोला है.
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि दिल्ली में जंतर-मंतर पर हुए स्टूडेंट प्रोटेस्ट के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाईं और इसके लिए गृह मंत्री अमित शाह ज़िम्मेदार हैं.
इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि राहुल गांधी झारखंड में प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों की आवाज़ को क्यों नज़रअंदाज़ कर रहे हैं. हालांकि, राहुल गांधी ने झारखंड की घटना पर सोमवार को कहा था कि "हम शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हिंसा के ख़िलाफ़ हैं."
इससे पहले, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी कहा था कि सरकार और गृह मंत्री संसद में स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर चर्चा के लिए तैयार हैं, लेकिन विपक्ष भरोसा दे कि वह सदन से भागे नहीं और पूरी चर्चा सुने.
राहुल के आरोप, बीजेपी का जवाब

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सोमवार को कांग्रेस पार्टी ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस करके दिल्ली में स्टूडेंट्स के ख़िलाफ़ हिंसा के मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह से सवाल किए.
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा, "हमारा कभी भी यह सवाल नहीं रहा कि अमित शाह संसद में आएं और कुछ आम मुद्दों पर बयान दें. सवाल शुरू से यही है कि अमित शाह को यह स्पष्ट करना है कि दिल्ली में हमारे युवाओं पर गोली चलाने की अनुमति किसने दी."
इसके बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "मैं राहुल गांधी को चुनौती देता हूं कि वे सदन में आएं. हम चर्चा के लिए तैयार हैं और आपको इसका मुंहतोड़ जवाब मिलेगा."
उन्होंने जंतर-मंतर पर गोली चलाने के आरोपों पर कहा, "मैं यह भी स्पष्ट करना चाहता हूं कि राहुल गांधी गलत सूचना न फैलाएं. जंतर-मंतर पर कोई गोली नहीं चलाई गई थी और न ही वहां गोली चलाने का कोई आदेश दिया गया था."
वहीं, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी एक्स पर लिखा, "गृह मंत्री अमित शाह जी छात्रों के मुद्दे पर विस्तार से जवाब देने के लिए तैयार हैं. कांग्रेस और विपक्ष को गृह मंत्री जी के जवाब के समय डरना और भागना नहीं है, बल्कि पूरा जवाब सुनना पड़ेगा. राहुल, भागना नहीं."
झारखंड प्रोटेस्ट को लेकर आरोप प्रत्यारोप

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जेपी नड्डा ने झारखंड में विरोध प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों का ज़िक्र करते हुए कहा, "क्या आज राहुल गांधी को झारखंड में छात्रों की आवाज़ सुनाई नहीं दे रही है? मेरी जानकारी के मुताबिक, वहां उनके कहने पर कंटीले तारों की बाड़ लगाई गई थी. आखिर उस सरकार को चलाने वाली पार्टी उनके गठबंधन का अभिन्न हिस्सा है. क्या वहां उन्हें छात्रों की आवाज़ सुनाई नहीं दे रही है?"
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार में कांग्रेस पार्टी भी शामिल है. राज्य की 81 सदस्यीय विधानसभा में झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के 34, जबकि कांग्रेस के 16 विधायक हैं.
बीजेपी ने रांची में प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के ख़िलाफ़ मंगलवार को झारखंड बंद का ऐलान किया है.
झारखंड की राजधानी रांची में सोमवार को विधानसभा मार्च के लिए निकले प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक टकराव हुआ. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर वाटर कैनन, आंसू गैस और लाठियों का भी इस्तेमाल किया.
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्र-छात्राओं के मार्च के बाद एक ओपन लेटर लिखा, जिसे उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर पोस्ट किया. झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर विद्यार्थियों का आंदोलन जारी है.
राहुल गांधी ने अमित शाह के बारे में क्या कहा था?

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सोमवार शाम को राहुल गांधी ने अमित शाह के बारे में कहा, "वह गृह मंत्री हैं, पैलेट गन चलाई गईं. स्टूडेंट्स को कांटेदार डंडों से पीटा गया. सवाल यही था कि अमित शाह स्पष्ट करें कि उन्होंने इसका आदेश दिया था या नहीं."
उन्होंने कहा, "अगर उन्होंने यह आदेश दिया था तो वे हमारे बच्चों पर गोली चलवाने के कसूरवार हैं और अगर वे नहीं जानते थे कि क्या हो रहा है तो वे गृह मंत्री रहने के लायक नहीं हैं. उन्हें इस्तीफ़ा देना चाहिए."
राहुल गांधी ने कहा, "अब अमित शाह अचानक कह रहे हैं कि वे बोलने के लिए तैयार हैं. हमें उनकी मनगढ़ंत बातों में कोई दिलचस्पी नहीं है. हम यह जानना चाहते हैं कि क्या उन्होंने बच्चों पर गोली चलाने की अनुमति दी थी या नहीं. उन्हें पहले यह स्पष्ट रूप से बताना होगा. उसके बाद कोई चर्चा होगी."
इसी प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान राहुल गांधी से झारखंड के मुद्दे पर भी सवाल किया गया.
राहुल गांधी ने कहा, "झारखंड के स्टूडेंट्स के लिए मेरा संदेश स्पष्ट है कि हम शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे स्टूडेंट्स के ऊपर किसी भी तरह की हिंसा की निंदा करते हैं."
उन्होंने कहा, "ऐसा कहीं भी हो रहा हो, हम उसकी निंदा करते हैं. हम इस तरह की कार्रवाई के ख़िलाफ़ हैं. हम इसका समर्थन नहीं करते हैं."
इससे पहले संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा था कि सरकार दिल्ली में स्टूडेंट्स के प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं पर चर्चा के लिए तैयार है.
किरेन रिजिजू ने सदन में इस मुद्दे पर विपक्षी दलों से कहा, "गृह मंत्री जी के जवाब के समय डरना नहीं है, भागना नहीं है."
इससे पहले उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "मेरा कांग्रेस पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के साथियों से अनुरोध है कि अगर सरकार चर्चा के लिए तैयार है तो आप बिल्कुल चर्चा के दौरान हंगामा नहीं करेंगे और गृह मंत्री का पूरा जवाब सुनेंगे. इसका भी आपको भरोसा दिलाना पड़ेगा."
जंतर-मंतर पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर उठे थे सवाल

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राहुल गांधी पहले भी पुलिस पर आरोप लगा चुके हैं कि जंतर-मंतर पर विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन और गोलियां चलाई गईं. हालांकि दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार की ओर से लगातार कहा जा रहा है कि इस विरोध प्रदर्शन के दौरान गोली नहीं चलाई गई है.
लेकिन बीबीसी हिन्दी की एक ख़ास रिपोर्ट में झारखंड के गुमला ज़िले के पुग्गू करमदीपा गांव की रहने वालीं नूतन टोप्पो ने दावा किया था कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एक गोली उनके कान को छूकर निकली थी.
नूतन टोप्पो के इस दावे को राम मनोहर लोहिया अस्पताल की डिस्चार्ज समरी सही ठहराती है. इसी अस्पताल में उन्हें घायल अवस्था में भर्ती कराया गया था. 20 जुलाई की डिस्चार्ज समरी में लिखा हुआ है कि नूतन के "कान में गनशॉट लगा है."
इसे लेकर विवाद भी हो रहा है, लेकिन इस प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन से घायल होने वाले कुछ दूसरे मामले भी सामने आए हैं.
वहीं बीबीसी की एक और रिपोर्ट में कई स्वतंत्र बैलिस्टिक विशेषज्ञों ने कहा था कि जुलाई में दिल्ली में हुए प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के कुछ समर्थकों को लगी चोटें पैलेट गन की थीं.
20 जुलाई को सेंट्रल दिल्ली में व्यापक हिंसा देखने को मिली, जब हज़ारों प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा सुधारों और शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े की मांग को लेकर संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की.
इस दौरान पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों को भीड़ के ऊपर बेरहमी से लाठियों, डंडों और आंसू गैस से हमला करते देखा गया.
दिल्ली पुलिस ने बताया कि उसके 60 प्रदर्शनकारी और उनके 118 जवान घायल हुए हैं. जबकि सीजेपी ने कहा कि घायल प्रदर्शनकारियों की संख्या आधिकारिक आंकड़ों से कहीं ज़्यादा थी.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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