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द लेंस: राम मंदिर चंदा विवाद में जवाबदेही किसकी?
उत्तर प्रदेश के अयोध्या का राम मंदिर भारत के सबसे बड़े धार्मिक स्थलों में शामिल है. यहां हर साल करोड़ों लोग दर्शन करने आते हैं.
उनके साथ आता है श्रद्धा का वो चढ़ावा जिसे लोग अपने भगवान को अर्पित करते हैं. जैसे- नकदी, सोना, चांदी, लेकिन बीते महीने राम मंदिर चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोपों की वजह से चर्चा में रहा.
विवाद की शुरुआत जून के पहले हफ़्ते में हुई. कुछ ही दिनों में इसने राजनीतिक रंग भी ले लिया.
7 जून को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सार्वजनिक तौर पर मामले की जांच की मांग की. इसके बाद आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हुआ. फिर उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी का गठन किया.
एसआईटी ने 23 जून को प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपी. 25 जून की शाम पुलिस ने आठ लोगों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की और उन्हें गिरफ़्तार किया.
इस मामले की जांच अभी जारी है. मगर सवाल कई हैं. क्या इस पूरे विवाद का असर सिर्फ़ राम मंदिर ट्रस्ट तक सीमित रहेगा या फिर इसका राजनीतिक और वैचारिक असर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों पर भी पड़ेगा, जिनका राम मंदिर आंदोलन से दशकों पुराना जुड़ाव रहा है?
द लेंस के आज के एपिसोड में ऐसे सभी सवालों पर चर्चा की गई.
इस चर्चा में कलेक्टिव न्यूज़रूम के डायरेक्टर ऑफ़ जर्नलिज़म मुकेश शर्मा के साथ शामिल हुए विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार, बीबीसी की उत्तर प्रदेश संवाददाता प्रेरणा और वरिष्ठ पत्रकार विजय त्रिवेदी.
प्रोड्यूसरः शिल्पा ठाकुर, सईदुज़्ज़मान
गेस्ट कोऑर्डिनेटरः संगीता यादव
वीडियो एडिटिंगः आशीष जैन
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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