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पंजाब के शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े की मांग, क्या है पूरा मामला
'पंजाब में पिछले 4 सालों में पेपर लीक का एक भी मामला सामने नहीं आया', राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत मान का यह बयान उस समय आया है, जब विपक्षी पार्टियां लगातार फार्मेसी परीक्षा में नकल के मामले को लेकर सरकार को घेर रही हैं.
दरअसल, पिछले दिनों फरीदकोट की बाबा फ़रीद यूनिवर्सिटी में फार्मेसी की परीक्षा के दौरान नकल का मामला सामने आया था. इस मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने कुछ लोगों को गिरफ़्तार भी किया था.
हालांकि विपक्षी पार्टियों ने इसे 'पेपर लीक' का मामला बताते हुए पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस के इस्तीफ़े की मांग की है.
इसी दौरान अभिनेत्री श्वेता तिवारी ने भी सोशल मीडिया पर इस मामले पर प्रतिक्रिया दी.
उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरीज़ पर कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके का वीडियो साझा करते हुए पंजाब के शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े को लेकर सवाल उठाए.
इस मुद्दे के गरमाने के बाद पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया.
उन्होंने कहा कि पंजाब में पेपर लीक का कोई मामला नहीं है. फार्मेसी में पेपर लीक नहीं, बल्कि नकल का मामला था, जिसे हमने ही पकड़ा था. उन्होंने कहा कि विभाग भी मेरा नहीं है. वह पहले भी कह चुके हैं कि अगर उनके इस्तीफ़े से व्यवस्था सुधरती है तो वह इसके लिए हमेशा तैयार हैं.
विपक्षी दलों की मांग
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने पंजाब में फार्मेसी ऑफिसर की भर्ती परीक्षा में नकल को लेकर आम आदमी पार्टी पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि 'आप' नेता पहले पेपर लीक के मामलों में मंत्रियों के इस्तीफ़े की मांग करते रहे हैं, लेकिन अब पंजाब में सामने आए मामले पर अपने मंत्री से इस्तीफ़ा नहीं मांग रहे.
सिरसा ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी ने छात्रों के मुद्दे पर राजनीति की है. उन्होंने कहा, "जो लोग दिल्ली में पेपर लीक के मुद्दे पर मंत्रियों के इस्तीफ़े मांग रहे थे, वे आज पंजाब में अपने मंत्री हरजोत बैंस का इस्तीफ़ा लेने से भाग रहे हैं."
बीजेपी नेता ने कहा कि इस मामले में सरकार को जवाबदेही तय करनी चाहिए. उन्होंने दावा किया कि "बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है और सरकार को इसकी ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए."
पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने कहा कि जहां 'आप' नेता दूसरे राज्यों में पेपर लीक के मुद्दे पर आवाज़ उठा रहे हैं, वहीं पंजाब में सामने आए फार्मेसी परीक्षा मामले पर चुप हैं.
राजा वड़िंग ने कहा, "फार्मेसी का पेपर लीक हुआ है, इस पर भी भगवंत मान को जवाब देना चाहिए कि यह कैसे हुआ. इसमें भी हज़ारों बच्चों और परिवारों का भविष्य जुड़ा हुआ है."
"पेपर लीक के मामले लगातार सामने आ रहे हैं और इसके लिए ज़िम्मेदारी तय होनी चाहिए."
राजा वड़िंग ने कहा कि फार्मेसी परीक्षा मामले में भी सरकार को जवाब देना चाहिए कि यह कैसे हुआ, क्योंकि इससे हज़ारों छात्रों और परिवारों का भविष्य जुड़ा हुआ है.
उन्होंने पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस के इस्तीफ़े की मांग करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान को विधानसभा में इस मामले पर माफ़ी मांगनी चाहिए.
उधर, शिरोमणि अकाली दल के प्रवक्ता अर्शदीप सिंह क्लेर ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है, "बाबा फ़रीद यूनिवर्सिटी के फार्मेसी पेपर लीक मामले के लिए दो मंत्री नैतिक रूप से ज़िम्मेदार हैं. शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस के साथ-साथ स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह को भी ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए."
"अगर केंद्र सरकार ने एक मिसाल कायम करते हुए अपने शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा लिया है, तो नैतिकता की बात करने वाले अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और मुख्यमंत्री भगवंत मान यह बताएं कि पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह के इस्तीफ़े कब लिए जाएंगे."
मुख्यमंत्री ने क्या जवाब दिया?
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि पंजाब में पिछले साढ़े चार साल के दौरान एक भी पेपर लीक नहीं हुआ और फार्मेसी परीक्षा मामला पेपर लीक नहीं, बल्कि नकल का मामला है.
भगवंत मान ने कहा कि पेपर लीक होना छात्रों के लिए बड़ा झटका होता है, क्योंकि बच्चे सालों तक मेहनत करके परीक्षाओं की तैयारी करते हैं.
उन्होंने आगे कहा, "जो बच्चा 18-18 घंटे पढ़ता है और अपने परिवार की किस्मत बदलने का सपना लेकर मेहनत करता है, जब उसे पता चलता है कि पेपर लीक हो गया तो उसका दिल टूट जाता है."
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में अलग-अलग समय पर प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने के मामले सामने आए हैं, जो परीक्षा प्रणाली की असफलता है.
पंजाब के मामले के बारे में उन्होंने कहा, "पंजाब में कोई पेपर लीक नहीं हुआ. दो जगहों से चीटिंग की रिपोर्ट आई थी. कुछ उम्मीदवारों ने ब्लूटूथ वाले पेन और डिजिटल उपकरणों की मदद से प्रश्नपत्र बाहर भेजने की कोशिश की थी."
भगवंत मान ने कहा कि फार्मेसी परीक्षा में भी शुरुआत के कुछ मिनटों बाद नकल का मामला सामने आया, जिस पर पुलिस ने कार्रवाई की. उनके मुताबिक, नकल करवाने वाले गिरोह के सदस्यों और उम्मीदवारों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की गई है.
मुख्यमंत्री ने कहा, "पंजाब में नौकरियां न पैसे से, न सिफ़ारिश से, बल्कि सिर्फ़ मेरिट के आधार पर दी जा रही हैं."
शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस ने क्या कहा?
पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि उनके विभाग के तहत होने वाली किसी भी परीक्षा में पेपर लीक का कोई मामला सामने नहीं आया है.
हरजोत बैंस ने कहा कि फार्मेसी परीक्षा में "पेपर लीक नहीं, बल्कि चीटिंग का मामला था, जिसे सरकार ने ही पकड़ा है." उन्होंने विपक्ष से सवाल करते हुए कहा कि वह बताए कि उनके विभाग से संबंधित कौन-सा पेपर लीक हुआ है.
उन्होंने कहा कि सिर्फ़ पंजाब को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है और राज्य के शिक्षा क्षेत्र में हो रही प्रगति को भी देखना चाहिए. बैंस ने दावा किया कि सरकारी स्कूलों के छात्रों के प्रदर्शन में बड़ा सुधार हुआ है.
उन्होंने कहा, "यह 881 बच्चों की कामयाबी की कहानी है, जिसके बारे में कोई बात नहीं कर रहा. पंजाब में सरकारी स्कूलों के छात्रों का उच्च शिक्षा परीक्षाओं में प्रदर्शन पहले से बेहतर हुआ है."
पूरा मामला क्या है?
19 जुलाई को पंजाब स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में फार्मेसी ऑफिसरों की भर्ती के लिए बाबा फ़रीद यूनिवर्सिटी ऑफ़ हेल्थ साइंसेज़ की ओर से लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी.
यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. राजीव सूद के मुताबिक, फ़रीदकोट, कोटकपुरा और फ़िरोज़पुर के 18 केंद्रों पर परीक्षा हुई, जिसमें करीब 5 हजार उम्मीदवार शामिल हुए.
पुलिस के मुताबिक, फ़रीदकोट रेंज पुलिस, फ़िरोज़पुर रेंज पुलिस और पंजाब पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस विंग ने संयुक्त अभियान के दौरान एक अंतरराज्यीय नकल गिरोह का पर्दाफ़ाश किया.
पुलिस का दावा था कि गिरोह हाईटेक उपकरणों की मदद से उम्मीदवारों को नकल करवा रहा था. उम्मीदवार छिपे हुए कैमरे वाले पेन से प्रश्नपत्र की तस्वीरें बाहर भेजते थे और बाद में वायरलेस उपकरणों के ज़रिए उन्हें जवाब दिए जाते थे.
पुलिस के मुताबिक, उम्मीदवारों को परीक्षा पास करवाने के लिए 3.5 लाख से 13 लाख रुपये तक वसूले गए.
इस मामले में अब तक 7 मुख्य साजिशकर्ताओं को गिरफ़्तार करने और 28 उम्मीदवारों को हिरासत में लेने की जानकारी दी गई है. पुलिस ने बैटरी से चलने वाले नकल के 27 वायरलेस उपकरण भी बरामद किए हैं.
पुलिस ने कहा है कि शुरुआती जांच में प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले लीक होने का कोई सबूत नहीं मिला और मामला परीक्षा के दौरान की गई नकल से जुड़ा था.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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