क्या आपकी कार जासूसी कर रही है, जानिए यह कैसे आपके लिए महंगा पड़ सकता है

    • Author, थॉमस जरमैन
    • पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 10 मिनट

कार से सफर के दौरान आपके हावभाव क्या हैं, आप कहां जा रहे हैं और आपका वजन क्या है; आपसे जुड़ी ऐसी ही कई हैरान करने वाली जानकारियों का डेटा आपकी कार कलेक्ट कर रही होती है.

विशेषज्ञ यहां तक कहते हैं कि आपसे जुड़ी ऐसी कुछ निजी जानकारी आपके कार बीमा (इंश्योरेंस) की किश्त भी बढ़ा सकती है. हालांकि सतर्क रहकर आप अपने निजी डेटा तक इसकी पहुंच को सीमित कर सकते हैं.

एक समय था जब कार का मतलब आज़ादी हुआ करता था. कार मिलने का मतलब होता था कि अभिभावकों की निगरानी से बाहर निकलकर ऐसी दुनिया में जाना, जहां फैसले खुद के हों लेकिन अब चीज़ें बदल गई हैं.

विशेषज्ञ कहते हैं, "आधुनिक कारें पहियों पर चलने वाले कंप्यूटर हैं और बड़ी कंपनियां उनका इस्तेमाल हमारे निजी जीवन की जानकारी इकट्ठा करने और उससे कमाई के लिए कर रही हैं. अगर आपको लगता है कि कार चलाना एकांत और आज़ादी है तो आपको इस पर दोबारा सोचना होगा. बल्कि ऐसा लगता है कि यह हालात और बिगड़ने वाले हैं."

अगर कार निर्माता कंपनियों की प्राइवेसी पॉलिसी पढ़ें तो उसमें ये कंपनियाँ खुद बताती हैं कि वे जो जानकारी इकट्ठा करती हैं, उसमें हर लोकेशन की सटीक जानकारी शामिल होती है. साथ ही, यह भी जानकारी लेती हैं कि कार में आपके साथ कौन-कौन बैठे हैं.

इतना ही नहीं, आपने रेडियो पर क्या बजाया है और सीट बेल्ट लगाई है या नहीं, ये जानकारी भी कार रिकॉर्ड कर रही होती है. और यह भी कि क्या गाड़ी बहुत तेज़ चल रही है या फिर आपने अचानक ब्रेक लगाया.

कुछ कारें ऐसी जानकारी भी जुटाती हैं जिसकी आप उम्मीद नहीं करते. जैसे आपका वजन, उम्र, नस्ल और चेहरे के भाव. वह ये डेटा तक रख रही होती हैं कि आप कहीं नाक में उंगली तो नहीं डाल रहे हैं?

कुछ कारों में ड्राइवर सीट की ओर कैमरे लगे होते हैं. चूंकि अधिकांश कारों में इंटरनेट कनेक्शन होता है, इसलिए कारें उस वक़्त भी यह डेटा भेज सकती हैं जब आप अपनी धुन में गाड़ी चला रहे होते हैं.

विशेषज्ञ कहते हैं, "यह निजता से जुड़ी एक ऐसी समस्या है जो आपको आर्थिक नुक़सान पहुंचा सकती है. दरअसल कार डेटा के सबसे बड़े ख़रीदारों में बीमा कंपनियाँ शुमार हैं. वे इस डेटा का इस्तेमाल कुछ बीमा धारकों से ज़्यादा प्रीमियम लेने के लिए करती हैं. पर यह कहना मुश्किल है कि आपका निजी डेटा कहां जा रहा है."

"कुछ कार कंपनियां निजी डेटा बेचने की बात स्वीकारती हैं. भले आपको यह चिंताजनक लगे लेकिन ये कंपनियां यह बताने के लिए बाध्य नहीं हैं कि इस डेटा के ख़रीदार कौन हैं. ज़्यादातर कार उपभोक्ताओं को तो यह पता ही नहीं होता कि उनके डेटा के साथ यह सब हो रहा है."

अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी के ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूट में टेक्नोलॉजी इनोवेशन सेंटर के सीनियर फेलो डैरेल वेस्ट ने इस मुद्दे पर चिंता जताई है.

उन्होंने कहा, "लोग यह जानकर चौंक जाएंगे कि उनकी कार कितने तरह का डेटा इकट्ठा करके दूसरों को बेचती है. ये कार निर्माता से लेकर थर्ड पार्टी ऐप भी हो सकती हैं."

इतने विविध और विस्तृत डेटा को लेकर वे कहते हैं, "इस डेटा के आधार पर किसी व्यक्ति के जीवन को पल-पल के हिसाब से दोबारा बनाया जा सकता है."

अमेरिकी क़ानून और सख्त

आपको यह जानकर क्या असहज महसूस हो रहा है? फिर तो आपके लिए यह जानना और भी निराशाजनक होगा कि अमेरिका का एक संघीय कानून कार के इस डेटा कलेक्शन को और बढ़ा सकता है.

इस कानून के मुताबिक, "जल्द ही अमेरिकी कार कंपनियों को कारों में इंफ्रारेड बायोमेट्रिक कैमरे और अन्य सिस्टम लगाने होंगे. इसके ज़रिए कार में बैठे व्यक्ति के हावभाव को स्कैन किया जा सकेगा. चालक की आँखों या व्यवहार के अन्य पहलुओं को ट्रैक किया जाएगा ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह नशे में या थका हुआ तो नहीं हैं."

विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं, "इससे कार चलाने वालों की सेहत और आदतों से जुड़ा ऐसा ख़जाना खुल जाएगा, जो कंपनियां मनचाहे ढंग से इस्तेमाल करने के लिए आज़ाद होंगी क्योंकि इसके इस्तेमाल को सीमित करने के लिए कोई नियम नहीं हैं."

जैसे-जैसे कार निर्माता अपने डेटा साम्राज्य का विस्तार करने जा रहे हैं, यह समझना बहुत ज़रूरी हो गया है कि कार के अंदर क्या हो रहा है और इसका आप पर क्या असर पड़ता है.

बेशक इंटरनेट से जुड़ी कारें ज़्यादा सुविधाजनक हो सकती हैं. उनमें लगे सेंसर ड्राइविंग को सुरक्षित और आरामदायक बना सकते हैं. और तो और बीमा कंपनियाँ यह जानकर कि आप अच्छे ड्राइवर हैं इसलिए आपसे कम प्रीमियम ले सकती हैं.

फिर भी कार कंपनियों के डेटा साम्राज्य के इस दौर में यह समझना जरूरी है कि पर्दे के पीछे क्या हो रहा है और यह आपको कैसे प्रभावित करता है.

कार में इंटरनेट है तो सतर्क हो जाएं

अगर आपकी कार थोड़ी भी नई है तो यह कार कंपनियों के डेटा साम्राज्य का हिस्सा हो सकती है.

कंसल्टिंग फर्म मैकेंजी ने पाया, "साल 2021 में सड़कों पर चलने वाली 50% कारों में इंटरनेट कनेक्शन था और अनुमान लगाया कि 2030 तक यह संख्या 95% हो जाएगी. यानी अगर आपकी कार इंटरनेट से कनेक्ट है तो आपको प्राइवेसी को लेकर चिंता करनी चाहिए."

साथ ही, कार कंपनियाँ तब भी जानकारी ले सकती हैं जब आप अपना फोन इंफोटेनमेंट सिस्टम से जोड़ते हैं, या जब आप ड्राइविंग से जुड़े कुछ ऐप इस्तेमाल करते हैं.

निजी डेटा एकत्र करने के काम में ड्राइवर भी भूमिका निभा रहे हैं. दरअसल बीमा कंपनियों के टेलीमैटिक्स सिस्टम का कुछ ड्राइवर भी उपयोग करते हैं. ये सिस्टम कार में बैठे लोगों की निगरानी करता है और बदले में सिस्टम इस्तेमाल करने वाले को छूट देने का वादा करता है.

'कार की प्राइवेसी पॉलिसी सबसे ख़राब' - स्टडी

साल 2023 में मोज़िला ने 25 कार ब्रांडों की प्राइवेसी पॉलिसी का विश्लेषण किया. इस अध्ययन में पाया गया कि कोई भी कंपनी प्राइवेसी और सुरक्षा के तय मानकों पर खरी नहीं उतरी. मोज़िला ने कारों को "अब तक की सबसे ख़राब प्राइवेसी वाली प्रोडक्ट कैटेगरी" बताया.

रिपोर्ट के अनुसार, "कार कंपनियाँ लोगों के नाम, उम्र, नस्ल, वजन, वित्तीय जानकारी, चेहरे के भाव के अलावा मनोवैज्ञानिक प्रवृत्तियों और बहुत कुछ स्टोर करने का अधिकार रखती हैं."

उदाहरण के लिए, दक्षिण कोरियाई ऑटोमोबाइल कंपनी 'किया' की प्राइवेसी पॉलिसी यह तक कहती है कि कंपनी कार में मौजूद व्यक्ति के "यौन जीवन" और सेहत से जुड़ी जानकारी भी इकट्ठा कर सकती है.

इस मामले में किया के प्रवक्ता जेम्स बेल का कहना है, "कंपनी ने कभी भी ड्राइवरों के यौन जीवन या हेल्थ का डेटा इकट्ठा नहीं किया. कंपनी कैलिफोर्निया में संवेदनशील डेटा की परिभाषा को सूचीबद्ध कर रही है इसलिए पॉलिसी में ये बातें हैं."

बेल कहते हैं, "किया की पॉलिसी पारदर्शी है और कंपनी सिर्फ तभी इंश्योरेंस कंपनियों के साथ यह डेटा शेयर करती हैं जब ड्राइवर इसकी अनुमति देते हैं."

हालांकि कंपनी ने यह नहीं बताया कि वे कौन-सा 'संवेदनशील डेटा' इकट्ठा करते हैं.

कारों में सीट, डैशबोर्ड, इंजन, स्टीयरिंग व्हील तक हर जगह सेंसर लगे होते हैं. कई कारों में तो अंदर और बाहर कैमरे होते हैं. ऐसे में अगर आज की कारों के अंदर आप कुछ कर रहे हैं तो संभव है कि कंपनियों को उसके बारे में पता हो.

इश्योरेंस कंपनी को डेटा बेचा- प्रीमियम बढ़ गया

कार कंपनियों द्वारा निजी डेटा बेचे जाने से जुड़ा एक उदाहरण जनरल मोटर्स का सामने आया. इस कंपनी ने एक डेटा ब्रोकर कंपनी लेक्सिस-नेक्सिस को डेटा बेचा. यह कंपनी डेटा बेचने और ख़रीदने का काम करती है.

न्यूयॉर्क टाइम्स को एक ड्राइवर ने बताया कि उनको जब अपने निजी डेटा से जुड़ी एक फाइल मिली तो उसमें 130 पेज थे. इस रिकॉर्ड में छह महीने के दौरान ड्राइवर की अपनी पत्नी के साथ की गई यात्राओं का ब्यौरा था.

ड्राइवर ने बताया कि उनका बीमा प्रीमियम 21 फीसदी बढ़ गया था. ड्राइवर ने एक एजेंट के हवाले से कहा कि इसका कारण उनका डेटा था. हालांकि कंपनी ने इस बाबत पूछे गए सवालों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

हालांकि, अमेरिकी फेडरल ट्रेड कमीशन ने इस मामले में कार्रवाई की और जनरल मोटर्स को पांच साल के लिए डेटा बेचने से बैन कर दिया. इसके बावजूद, भविष्य में वह उपभोक्ताओं की सहमति लेकर और अन्य शर्तों का पालन करते हुए डेटा इकट्ठा कर सकती है.

उधर लेक्सिस-नेक्सिस और अन्य कंपनियां अभी भी निजी डेटा बेच रही हैं जो उन्होंने अन्य कार निर्माता कंपनियों और कार ड्राइविंग से जुड़े ऐप से ख़रीदा है. लेक्सिस-नेक्सिस और जनरल मोटर्स ने हमारे पूछे सवालों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.

डेटा कलेक्शन पर कार कंपनियों के तर्क

अमेरिकी कंज्यूमर फेडरेशन नाम के एक गैर लाभकारी संगठन के लिए काम करने वाले शोधकर्ता और पैरोकार माइकल डीलॉन्ग ऑटो इंश्योरेंस क्षेत्र पर निगाह रखते हैं.

उनका कहना है, "बीमा कंपनियाँ कंज्यूमर डेटा को कलेक्ट करके उसका इस्तेमाल ज़्यादा प्रीमियम लेने या कवरेज से इनकार करने के लिए कर रही हैं."

वे कहते हैं, "कार कंपनियाँ इस ट्रैकिंग को लेकर तर्क देती हैं कि वे ऐसा कंज्यूमर की अनुमति के बाद ही करती हैं. लेकिन असल में यह अनुमति लंबे फॉर्म और प्राइवेसी पॉलिसी के ज़रिए ली जाती है, जिन्हें लोग पढ़ते तक नहीं हैं."

कार ड्राइवरों के पास डेटा सुरक्षा के क्या विकल्प हैं

मोज़िला में कार रिसर्च करने वाले प्राइवेसी एनालिस्ट जेन कैल्ट्राइडर के अनुसार, अमेरिका में व्यापक प्राइवेसी कानून की कमी है, जबकि यूरोप में कुछ बेहतर प्रावधान हैं. इसके बावजूद वहां यह समस्या पूरी तरह हल नहीं हुई है.

इस स्थिति में उपभोक्ताओं के पास कुछ सीमित विकल्प हैं. जेन कैल्ट्राइडर की सलाह है कि अगर प्राइवेसी को लेकर चिंता है तो बीमा टेलीमैटिक्स प्रोग्राम से दूर रहें.

मैरीलैंड के एक विश्लेषण में पाया गया कि सिर्फ 31% ड्राइवरों का प्रीमियम कम हुआ, केवल 31 ड्राइवरों को निजी डेटा के ज़रिए घटे हुए बीमा का लाभ मिला, जबकि 24 फीसदी का प्रीमियम बढ़ गया और 45 प्रतिशत पर कोई असर नहीं पड़ा.

इसके अलावा, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ और कुछ अमेरिकी राज्यों में उपभोक्ता अपने डेटा की कॉपी मांग सकते हैं. उसे हटाने के लिए कह सकते हैं और उसे शेयर न किए जाने का अनुरोध कर सकते हैं.

कई कार कंपनियाँ प्राइवेसी सेटिंग भी उपलब्ध कराती हैं, जिन्हें कंज्यूमर अपनी ओर से बदलकर डेटा कलेक्शन को सीमित कर सकते हैं.

हालांकि, कैल्ट्राइडर का मानना है कि यह जिम्मेदारी पूरी तरह उपभोक्ताओं पर नहीं होनी चाहिए कि वे इतनी मेहनत करें कि कंपनियां उनकी निजता का उल्लंघन न कर सकें.

वे कहती हैं कि जब तक पूरा सिस्टम नहीं बदलता और डेटा पर कंज्यूमर का हक नहीं होता और कंपनियों को हर बार अनुमति लेनी पड़े, तब तक यह समस्या और बढ़ती ही जाएगी.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित

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