असम को बाढ़ मुक्त बनाने के वादे के बावजूद शिवसागर ज़िला कैसे हुआ तबाह?- ग्राउंड रिपोर्ट

ऊपरी असम के शिवसागर, चराईदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिले में आई बाढ़ के लिए कई लोग हिमंत बिस्वा सरमा की सरकार पर सवाल उठा रहे हैं

इमेज स्रोत, Dilip Kumar Sharma

इमेज कैप्शन, ऊपरी असम के शिवसागर, चराईदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिले में आई बाढ़ के लिए कई लोग हिमंत बिस्वा सरमा की सरकार पर सवाल उठा रहे हैं
    • Author, दिलीप कुमार शर्मा
    • पदनाम, बीबीसी हिन्दी के लिए
    • ........से, शिवसागर के नेपाली खुटी गांव से
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 10 मिनट

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 3 अगस्त, सोमवार की सुबह 11 बजे तक अपने सोशल मीडिया पर करीब छह पोस्ट साझा किए. सीएम ने करीब सभी पोस्ट में असम में आई भीषण बाढ़ के बारे में बात की.

उन्होंने अपने पहले पोस्ट में वाल्मीकि रामायण के बालकांड के एक श्लोक का उल्लेख किया, जिसमें नदियों का ज़िक्र है.

एक अन्य पोस्ट में सावन माह के पहले सोमवार को भोलेनाथ का आशीर्वाद लेते हुए मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच जाने और हर पीड़ित परिवार को जल्द इस मुश्किल से उबारने के लिए प्रार्थना की.

लेकिन ऊपरी असम के शिवसागर, चराईदेव, जोरहाट और गोलाघाट ज़िले में आई बाढ़ के लिए कई लोग हिमंत बिस्वा सरमा की सरकार पर सवाल उठा रहे हैं.

इसके अलावा स्थानीय लोग केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 2021 के एक वीडियो क्लिप को सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि पांच साल में असम को बाढ़ मुक्त कर देंगे.

बाढ़ को लेकर बीजेपी ने क्या वादे किए और हालात क्या हैं?

बाढ़ के बाद लोग राहत सामग्री के सहारे गुजर बसर कर रहे हैं

इमेज स्रोत, Dilip Kumar Sharma

इमेज कैप्शन, बाढ़ के बाद लोग राहत सामग्री के सहारे गुजर बसर कर रहे हैं

2016 के विधानसभा चुनाव के समय बीजेपी के चुनावी घोषणा पत्र असम विज़न डॉक्यूमेंट में राज्य की बाढ़ और नदी के कटाव की पुरानी समस्याओं का वैज्ञानिक आधार पर स्थायी समाधान निकालने का वादा किया गया था.

इसका मक़सद असम को बाढ़-मुक्त क्षेत्र बनाना था. फिर 2021 के विधानसभा चुनाव में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बाढ़ की समस्या खत्म करने के लिए और पांच साल मांगे थे.

अमित शाह ने 14 मार्च 2021 में तिनसुकिया ज़िले के मार्घेरिटा में एक जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री हिमंत की उपस्थिति में बाढ़ को लेकर बयान दिया था.

उन्होंने कहा था, "असम की सबसे बड़ी समस्या बाढ़ है. मैं आज इस सभा के माध्यम से असम की जनता को आश्वस्त करने आया हूं कि पांच साल हमें और दे दीजिए, असम को बाढ़ मुक्त बनाने का काम भारतीय जनता पार्टी की सरकार करेगी."

लेकिन 19 जुलाई को असम में आई बाढ़ ने मौजूदा सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है.

ऊपरी असम में बाढ़ की भयावहता देखने के बाद राज्य सरकार के प्रतिनिधियों ने माना कि बीते 50 साल में किसी ने ऐसी प्रलयकारी बाढ़ नहीं देखी.

नगालैंड और असम में बहने वाली ब्रह्मपुत्र की सहायक दिखौ नदी से सटे शिवसागर और चराईदेव ज़िलों में बाढ़ से सबसे ज़्यादा नुक़सान हुआ है. माना जा रहा है कि जो क्षति हुई है उससे उबरने के लिए सैकड़ों परिवारों को कई महीनों का वक्त लग जाएगा.

इलाके में अचानक आई इस विनाशकारी बाढ़ को विपक्षी विधायक, जातीय संगठन और कई स्थानीय लोग मानव जनित आपदा बता रहे हैं.

बाढ़ के बाद क्षतिग्रस्त कार

इमेज स्रोत, Dilip Kumar Sharma

इमेज कैप्शन, बाढ़ के बाद क्षतिग्रस्त कार

शिवसागर के इस गांव में बीबीसी ने क्या देखा

शिवसागर में बाढ़ ग्रस्त इलाके का दृश्य

इमेज स्रोत, Dilip Kumar Sharma

इमेज कैप्शन, शिवसागर में बाढ़ ग्रस्त इलाके का दृश्य

इस बाढ़ के चलते नेपाली खुटी गांव एकाएक देशभर में चर्चा का केंद्र बन गया. यह गांव शिवसागर जिले के बिहुबोर थाना क्षेत्र में आता है.

इस गांव में बाढ़ की तबाही के जो दृश्य मीडिया में सामने आए हैं, उससे कहीं ज़्यादा बर्बादी यहां पहुंचने पर दिखाई देती है.

पानी में डूबे खेत, जमीन में धंसे वाहन, मलबे से भरे घर, बिखरा पड़ा सामान इस तबाही की गवाही दे रहे हैं.

राहत सामग्री पाने के लिए गाड़ियों की पीछे बाढ़ से पीड़ित लोग कतारें लगाए खड़े हैं. विनाश के ये सभी दृश्य इस गांव में प्रवेश करते ही दिखने लगते हैं.

तबाही के ऐसे ही भयावह नज़ारे आस-पास के इलाकों में भी देखने को मिल रहे हैं.

बाढ़ का पानी घरों से निकलने के बाद वहां कीचड़ जमा हो गई है

इमेज स्रोत, Dilip Kumar Sharma

इमेज कैप्शन, बाढ़ का पानी घरों से निकलने के बाद वहां कीचड़ जमा हो गया है
बाढ़ प्रभावित लोग किसी तरह अपने रहने का इंतज़ाम कर रहे हैं

इमेज स्रोत, Dilip Kumar Sharma

इमेज कैप्शन, बाढ़ प्रभावित लोग किसी तरह अपने रहने-खाने का इंतज़ाम कर रहे हैं

बिहुबोर इलाके में ऐसे लोग भी मिले जो कुछ दिन पहले तक आलीशान घरों में रहते थे, उनके पास महंगी गाड़ियां और सभी सुख-सुविधाएँ थीं. लेकिन अब वे राहत सामग्री पर गुज़ारा करने को मजबूर हैं.

नेपाली खुटी गांव के पास बहने वाली नदी 20 जुलाई को बीस फीट तक ऊंचे उफान पर आ गई थी. यहां दर्जनों मकान, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, आंगनबाड़ी केंद्र पूरी तरह मिट चुके हैं. गांव में मृत पड़े सैकड़ों जानवरों के शव सड़ जाने से दुर्गंध फैली हुई है.

इतना ही नहीं, कीचड़ में दबे कुछ लोगों के शव भी बरामद किए जा रहे है.

अब तक 82 लोगों की मौत

इस बाढ़ में अब तक 82 लोगों की मौत हो चुकी है. मरने वालों में कम से कम 45 लोग शिवसागर जिले से हैं. जबकि लापता लोगों की सटीक संख्या अब भी प्रशासन नहीं बता पा रहा है.

मुख्यमंत्री हिमंत ने 22 जुलाई को मीडिया के समक्ष बाढ़ में लगभग सौ लोगों के लापता होने की बात कही थी.

असम आपदा विभाग की तरफ से दो अगस्त की देर शाम जारी रिपोर्ट में 335 गांव अब भी बाढ़ के पानी में डूबे हुए बताए गए हैं.

शिवसागर, जोरहाट और चराईदेव में 50 लोग अब भी विस्थापित हैं.

अपनों को खोने वालों ने क्या बताया

बिष्णु माया भुजल ने कहा कि हमारे गाय-बकरी सब बह गए, नाव वाले ने हमें बचा लिया

इमेज स्रोत, Dilip Kumar Sharma

इमेज कैप्शन, बिष्णु माया भुजल ने कहा कि हमारी गाय-बकरी सब बह गए, नाव वाले ने हमें बचा लिया

बाढ़ वाले दिन को याद कर नेपाली खुटी गांव की रहने वाली बिष्णु माया भुजल आज भी डर जाती हैं.

वो रोते हुए कहती हैं, "घर में पूरा पानी घुस गया. गाय-बकरी सब बह गए. घर डूबने लगा था लेकिन नाव लेकर आए लोगों ने हमें बचा लिया. अगर नाव नहीं आती तो हम सब मर जाते."

दिखौ नदी के पास रहने वाले राजन पानिका की लापता पत्नी का शव 11 दिन बाद उनके घर से सौ मीटर दूर कीचड़ में दबा मिला है. शव की हालत काफ़ी ख़राब हो चुकी थी.

बाढ़ वाले दिन को याद करते हुए राजन ने कहा, "मैं बाज़ार से घर आया ही था और देखा कि नदी का पानी ऊपर सड़क पर आ गया है. नदी में जिस तेजी से पानी आया हम घर में फंस गए."

"जान बचाने के लिए हमारा परिवार और आस-पास के कुछ लोग घर की छत पर चढ़ गए. लेकिन पानी ऊपर तक आ गया और मेरी पत्नी, छोटे भाई की पत्नी, 4 साल की भतीजी और एक महिला रिश्तेदार पानी में बह गए. मैंने अपने डूबते बेटे को पकड़ लिया था और हम काफी देर तक झाड़ी में अटके रहे."

राजन पानिका

इमेज स्रोत, Dilip Kumar Sharma

बाढ़ वाले इस इलाके में हर परिवार के पास अब एक दर्दनाक कहानी है.

टेंगापुखुरी थाना क्षेत्र में आने वाले अभयापुरी गांव के रोहिणी दुवारा की पत्नी, 30 साल की बेटी और दो जवान बेटे बाढ़ के पानी में डूब गए.

अपने पूरे परिवार को खो चुके रोहिणी दुवारा कहते हैं, "बाढ़ का पानी जब घर में घुसने लगा तो हम सब लोग बाहर रास्ते की तरफ निकलकर जाने लगे. लेकिन तेज बहाव के चलते पत्नी और बेटी पानी में गिर गए. मैं किसी तरह एक पेड़ की झाड़ में अटक गया. मेरे दोनों बेटे घर पर थे. जब वो अपनी मां को तलाशने गए तो वो भी वापस नहीं आए. मेरा पूरा परिवार ख़त्म हो गया."

रोहिणी दुवारा

इमेज स्रोत, Dilip Kumar Sharma

बाढ़ को लेकर कांग्रेस क्या आरोप लगा रही

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
Dinbhar: आवाज़ वही, अंदाज़ नया

देश - दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां.

एपिसोड

समाप्त

कांग्रेस ने इस आपदा के लिए असम-नगालैंड सीमा पर गैर-कानूनी रूप से पहाड़ियों को काटने, रेत निकालने और कोयले की माइनिंग को ज़िम्मेदार ठहराया है. स्थानीय लोग भी ऐसा मानते हैं.

शिवसागर से रायजोर दल के विधायक अखिल गोगोई भी बाढ़ से बर्बाद हुए शिवसागर जिले के लिए मौजूदा सरकार पर कई आरोप लगाते हैं.

बाढ़ की तबाही पर वो कहते हैं, "इस बाढ़ में शिवसागर, चराईदेव और जोरहाट, ये तीन जिले पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं. यह एक प्रलय जैसा है. एक पंचायत क्षेत्र में एक दिन में 28 शव बरामद किए गए. शिवसागर जैसे ऐतिहासिक शहर में लोगों के घरों में गले तक पानी है."

उन्होंने कहा, "कोयले का अवैध खनन होने से खाली पड़ी कोयला खदानों में पानी जमा हुआ और वो झील बन गई. लगातार हुई बारिश के बाद उन खदानों का पानी असम में घुस आया जिससे ये बाढ़ आई."

इस आरोप को बीजेपी विधायक विजय कुमार गुप्ता ने ख़ारिज किया है.

असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के चेयरमैन बेदाब्रता बोरा ने सोमवार को गुवाहाटी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा, "असम की सीमाओं पर चल रहे अवैध क्रशर और काले कोयले के सिंडिकेट ऊपरी असम में हुई तबाही की मुख्य वजह हैं."

"ओपन-कास्ट माइनिंग से बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जिनमें बारिश का पानी जमा हो जाता है और अचानक ओवर फ्लो होकर निचले इलाकों में फ्लैश फ्लड का कारण बनता है."

असम कांग्रेस ने मांग की है कि इस कथित कोयला सिंडिकेट की सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज की अध्यक्षता में न्यायिक जांच कराई जाए.

कांग्रेस नेता बोरा ने आरोप लगाया कि नगालैंड से रोज़ाना कोयले से लदे 40 से 60 ट्रक असम में आते हैं और हर गाड़ी से डेढ़ से दो लाख रुपये की अवैध वसूली की जाती है.

सत्ता पक्ष ने 'बादल फटने' को बताया तबाही का कारण

सीएम ने आज शिवसागर जिले के बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात की

इमेज स्रोत, Dilip Kumar Sharma

इमेज कैप्शन, सीएम ने शिवसागर जिले के बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात की

असम सरकार का कहना है कि वह राहत और पुनर्वास के काम पूरे होने के बाद ही कारणों की जांच करेगी.

हालांकि इससे पहले मुख्यमंत्री हिमंत कई बार मीडिया के समक्ष कह चुके हैं कि "नगालैंड के मोन जिले में बादल फटने से राज्य के तीन जिलों में अभूतपूर्व बाढ़ आ गई."

इस बीच सीएम हिमंत ने सोमवार को नेपाली खुटी और आस-पास के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया. उन्होंने मीडिया के समक्ष कहा, "यह एक ऐसी भारी तबाही है जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती. हमने टेलीविज़न पर जितना देखा, यह उससे कहीं अधिक है. हम लोगों की पूरी तरह मदद करने की कोशिश कर रहे हैं. हम इन गांवों का फिर से निर्माण करेंगे."

उधर, कांग्रेस के आरोपों को लेकर बीजेपी विधायक विजय कुमार गुप्ता कहते हैं, "जिस कदर तबाही हुई है, इसे केवल बाढ़ नहीं कह सकते. नगालैंड में बादल फटने से यह आपदा आई है. अखिल गोगोई और कांग्रेस हमेशा नकारात्मक बात करते हैं. लोग इतनी भयंकर बाढ़ का सामना कर रहे हैं और वो लोग अपनी राजनीति चमकाने में लगे हैं."

विजय

इमेज स्रोत, Dilip Kumar Sharma

पत्थर और कोयले की माइनिंग से जुड़े सवाल का जवाब देते हुए बीजेपी विधायक ने कहा, "अभी हमारी पहली प्राथामिकता प्रभावित लोगों का पुनर्वास है. लिहाज़ा इस समय सबको राजनीति से दूर रहकर पीड़ितों की मदद करनी चाहिए. जो बाढ़ आई उसका किसी को पूर्वानुमान नहीं था. किन कारणों से इतना पानी आया, उसकी जांच की जाएगी ताकि भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति न हो. हमारी सरकार वैज्ञानिक तरीकों से समाधान तलाशेगी."

बीजेपी विधायक ने कहा कि केंद्र सरकार की मदद से असम को बाढ़ मुक्त करने के लिए बीते कुछ सालों में सैकड़ों नदी तटबंधों का निर्माण किया गया है.

वे कहते हैं, "सरकार ने बाढ़ वाले उन तमाम क्षेत्रों का अध्ययन किया है और तटबंधों का निर्माण करवाया है. यही वजह है कि राज्य के कई इलाकों में बाढ़ नहीं आई. प्रदेश को बाढ़ मुक्त करने का कार्यक्रम लगातार चल रहा है."

आसू ने केंद्र सरकार पर उठाया सवाल

असम के प्रभावशाली छात्र संगठन ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) ने बाढ़ और इसके समाधान को लेकर सरकार के रवैये पर नाराज़गी जताई है.

आसू के अध्यक्ष उत्पल शर्मा ने कहा, "शिवसागर, जोरहाट और चराइदेव में जो हुआ है, वह सिर्फ़ बाढ़ नहीं थी. बल्कि एक तबाही थी. हम बहुत दर्द और तकलीफ़ में हैं. हमें चिंता है और यह बताना चाहते हैं कि नरेंद्र मोदी सरकार असम को बचाने में नाक़ाम रही है."

छात्र नेता ने आगे बताया, "चुनाव के समय गृह मंत्री, प्रधानमंत्री असम आते हैं. बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन जब ऐसी कोई आपदा आती है तो वे असम का दौरा तक नहीं करते. 2017 में जब गुजरात में ऐसी ही राष्ट्रीय आपदा आई थी तो प्रधानमंत्री अगले ही दिन वहां गए थे. उन्होंने 500 करोड़ के पैकेज की घोषणा भी की थी. तो असम में क्यों नहीं?"

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें

BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह

कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.