चार राज्यों की 28 एमएलसी सीटों पर कौन रहा अव्वल, उत्तर प्रदेश में बीजेपी या सपा- किसने मारी बाज़ी?

बिहार
इमेज कैप्शन, 23 अक्तूबर, 2026 को पटना के बांकीपुर गर्ल्स हाई स्कूल स्थित मतदान केंद्र पर स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की आठ विधान परिषद सीटों के लिए हुए चुनाव के दौरान मतदान करते मतदाता
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चार राज्यों की 28 विधान परिषद सीटों पर हुए चुनाव में अब तक कई नतीजे आ चुके हैं.

उत्तर प्रदेश मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से जारी प्रेस रिलीज़ के मुताबिक़ 3 स्नातक और 6 शिक्षक क्षेत्रों के उम्मीदवार विजयी घोषित किए गए हैं.

वहीं लखनऊ और वाराणसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मतगणना जारी है.

घोषित नतीजे इस तरह हैं-

  • मेरठ स्नातक क्षेत्र- दिनेश कुमार गोयल (भारतीय जनता पार्टी) ने कुल 24,929 वोट पाकर जीत दर्ज की
  • आगरा स्नातक क्षेत्र- डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह, गुरु जी (भारतीय जनता पार्टी) ने कुल 42,743 वोट पाकर जीत दर्ज की.
  • इलाहाबाद-झांसी स्नातक क्षेत्र- डॉ. मान सिंह यादव (समाजवादी पार्टी) ने कुल 60,358 वोट पाकर जीत दर्ज की.
  • लखनऊ शिक्षक क्षेत्र- उमेश द्विवेदी (भारतीय जनता पार्टी) ने कुल 13,179 वोट पाकर जीत दर्ज की.
  • वाराणसी शिक्षक क्षेत्र- लाल बिहारी यादव (समाजवादी पार्टी) ने कुल 11,612 वोट पाकर जीत दर्ज की.
  • आगरा शिक्षक क्षेत्र- डॉ. आकाश अग्रवाल (समाजवादी पार्टी) ने कुल 14,046 वोट पाकर जीत दर्ज की.
  • मेरठ शिक्षक क्षेत्र- श्रीचन्द शर्मा (भारतीय जनता पार्टी) ने कुल 18,099 वोट पाकर जीत दर्ज की.
  • बरेली-मुरादाबाद शिक्षक क्षेत्र- डॉ. हरी सिंह ढिल्लो (भारतीय जनता पार्टी) ने कुल 21,672 वोट पाकर जीत दर्ज की.
  • गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक क्षेत्र- ध्रुव कुमार त्रिपाठी (भारतीय जनता पार्टी) ने कुल 16,790 वोट पाकर जीत दर्ज की.

बिहार

विधान परिषद
इमेज कैप्शन, 23 अक्तूबर, 2026 को पटना के मिलर स्कूल स्थित मतदान केंद्र पर स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की आठ विधान परिषद सीटों के लिए हुए चुनाव में वोट डालने के बाद अपनी उंगलियों पर लगी स्याही के निशान दिखाते जन सुराज पार्टी की उम्मीदवार दिव्या ज्योति

बिहार में शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की घोषित चार सीटों पर अलग-अलग दलों को जीत मिली है. पटना सीट आरजेडी, तिरहुत सीट बीजेपी और दरभंगा सीट जन सुराज पार्टी ने जीती है.

सारण सीट पर बीजेपी के बाग़ी निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की है. बाक़ी चार स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजे आने बाक़ी हैं.

बिहार में विधान परिषद की आठ में से पाँच सीटों के नतीजे घोषित कर दिए गए हैं. ताज़ा जानकारी के मुताबिक, बीजेपी, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी), जेडीयू, जन सुराज पार्टी (जेएसपी) और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने एक-एक सीट जीती है.

आरजेडी ने पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में पांच बार के बीजेपी एमएलसी नवल किशोर यादव को हराया.

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वहीं, दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार सुरेश राय ने कांग्रेस नेता और बिहार कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष मदन मोहन झा को शिकस्त दी.

पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के नीरज कुमार ने आरजेडी के दिलीप राय को हरा दिया.

यहाँ जन सुराज पार्टी के अनुज सिंह तीसरे स्थान पर थे.बाहुबली विधायक अनंत सिंह ने अनुज सिंह को ही समर्थन दिया था. जेडीयू ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए अनंत सिंह को पार्टी से बाहर निकाल दिया था.

अनुज सिंह की हार पर प्रतिक्रिया देते हुए अनंत सिंह ने बुधवार को कहा, "अनुज सिंह हार गए हैं. अब तीसरे या चौथे स्थान पर रहें इसके कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता है. मतगणना पूरी हो चुकी है. यह साफ़ है कि वह हार गए हैं. जनता ही मालिक है, वह भगवान के समान है. जनता जिसे चुनती है, वही जीतता है और जिसे नहीं चुनती, वह हार जाता है."

हाल ही में पार्टी से अपने निष्कासन और पार्टी नेतृत्व के साथ अपने संबंधों पर उन्होंने कहा, "पार्टी ही सर्वोच्च है. जो भी होता है, वह पार्टी का फ़ैसला होता है. मैंने पार्टी के लिए ऐसा कोई योगदान नहीं दिया है, जिसके आधार पर मैं उस पर अपना दावा जता सकूं..."

बिहार के तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी के उम्मीदवार नरेंद्र प्रसाद सिंह ने मौजूदा सीपीआई एमएलसी संजय सिंह को हरा दिया. निर्दलीय उम्मीदवार भूषण कुमार झा दूसरे स्थान पर रहे.

जन सुराज पार्टी के सुरेश राय ने दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस नेता और बिहार कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष मदन मोहन झा को भी हराया. इसे कांग्रेस के लिए एक और झटके के तौर पर देखा जा रहा है.

कर्नाटक

विधान परिषद
इमेज कैप्शन, 23 अक्तूबर, 2026 को भारत के नोएडा में सेक्टर 39 स्थित नोएडा डिग्री कॉलेज में मेरठ मंडल स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए उत्तर प्रदेश विधान परिषद (एमएलसी) के द्विवार्षिक चुनावों के दौरान मतदान करते पात्र मतदाता

सत्तारूढ़ कांग्रेस और मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को बड़ा झटका देते हुए बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए ने कर्नाटक विधान परिषद की उन सभी चार सीटों पर जीत हासिल की, जिनके लिए 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था.

मंगलवार देर रात तक मतगणना जारी रहने के दौरान एनडीए के उम्मीदवारों ने दोनों शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में जीत दर्ज की, जबकि दो स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में भी उसके उम्मीदवार आगे चल रहे थे.

एनडीए ने चुनाव में बीजेपी के तीन और जनता दल (सेक्युलर) यानी जेडी(एस) के एक उम्मीदवार को मैदान में उतारा था.

कांग्रेस को झटका देते हुए बीजेपी-जनता दल (सेक्युलर) गठबंधन के उम्मीदवार एपी रंगनाथ ने बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मौजूदा एमएलसी पुट्टन्ना को हरा दिया.

इस सीट पर 81.98 फ़ीसदी मतदान दर्ज किया गया. वहीं, कर्नाटक विधान परिषद के उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार शशिल जी नामोशी ने कांग्रेस के शरणप्पा मत्तूर को हराया.

महाराष्ट्र

विधान परिषद
इमेज कैप्शन, 23 अक्तूबर, 2026 को भारत के नोएडा में सेक्टर 39 स्थित नोएडा डिग्री कॉलेज में मेरठ मंडल के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए उत्तर प्रदेश विधान परिषद के द्विवार्षिक चुनावों के दौरान मतदान करते पात्र मतदाता

महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति और विपक्षी महा विकास अघाड़ी (एमवीए) ने विधान परिषद की सभी पाँच सीटों पर चुनाव लड़ा. इन सीटों के लिए कुल 182 उम्मीदवार मैदान में थे.

78 सदस्यीय विधान परिषद में बीजेपी के 35 एमएलसी हैं. इसके बाद शिव सेना के 12 और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के 10 सदस्य हैं. कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) के पांच-पांच सदस्य हैं, जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) यानी एनसीपी (एसपी) के दो सदस्य हैं.

पाँच सीटों में तीन स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और दो शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं. पाँचों सीटों के अंतिम नतीजे अभी तक नहीं आए हैं. अब तक के रुझानों में दो सीटों पर बीजेपी, एक पर एकनाथ शिंदे की शिव सेना और दो सीटों पर शरद पवार की एनसीपी आगे चल रही है.

जिन राज्यों में हैं विधान परिषद

विधानपरिषद

एमएलसी क्या है?

एमएलसी (विधान परिषद सदस्य) राज्य के उच्च सदन, यानी विधान परिषद, का सदस्य होता है. उम्मीदवार की उम्र कम से कम 30 वर्ष होनी चाहिए और वह भारत का नागरिक होना चाहिए.

कार्यकाल छह वर्ष का होता है. हर दो वर्ष में एक-तिहाई सदस्य रिटायर होते हैं और सदन कभी भंग नहीं होता. परिषद में अधिकतम उतने सदस्य हो सकते हैं, जितने विधानसभा के एक-तिहाई हों और कभी भी 40 से कम नहीं.

अलग-अलग कैटिगरी के एमएलसी और मतदाता

विधान परिषद

एमएलसी कितने अहम

विधान परिषद बिलों पर बहस करती है और बदलाव सुझाती है. क़ानून को केवल टाल सकती है, रोक नहीं सकती. सामान्य बिल अधिकतम चार महीने तक टाल सकती है. वित्त बिल 14 दिन लेकिन उसमें संशोधन का अधिकार नहीं. विधान परिषद राज्य सरकार को नहीं हटा सकती.

सरकार केवल विधानसभा के प्रति जवाबदेह होती है. विधान परिषद के ज़रिए स्नातकों, शिक्षकों और स्थानीय निकायों के सदस्यों को अपने प्रतिनिधि मिलते हैं.

जो नेता विधायक नहीं हैं, वे परिषद के ज़रिए सदन में सीट पा सकते हैं. नीतीश कुमार, योगी आदित्यनाथ और उद्धव ठाकरे इसी रास्ते से आए थे. कई विशेषज्ञ इसे महंगा और ग़ैर-ज़रूरी मानते हैं. इसी कारण केवल छह राज्यों में ही विधान परिषद है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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