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चीन के साथ ईरान का ये दांव, क्या अमेरिका के शिकंजे से उसे आज़ाद करा देगा?
- Author, बीबीसी मॉनिटरिंग
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 7 मिनट
ईरान पर अमेरिका के प्रतिबंधों ने उसकी मुश्किलों को काफ़ी बढ़ा दिया है.
लेकिन अब वो इसकी काट तलाशने में लगा है.
अमेरिका के साथ युद्ध में फंसा ईरान अब अपनी उत्तरी सीमाओं से होकर जाने वाले वैकल्पिक ट्रेड रूट्स का इस्तेमाल बढ़ा रहा है.
समुद्री रास्तों से माल ढुलाई में आ रही दिक्कतों ने ईरान के पारंपरिक व्यापार मार्गों पर दबाव बढ़ा दिया है.
ईरान के ट्रेड प्रमोशन ऑर्गेनाइजेशन के एक सीनियर अफ़सर ने कहा है कि चीन तक जाने वाले एक कॉरिडोर से माल पहुंचने में लगने वाला समय काफी कम हो गया है.
लेकिन अमेरिका की कड़ी नौसैनिक नाकाबंदी के बीच इस रेल मार्ग की क्षमता शिपिंग रूट की तुलना में बहुत कम है.
इसके अलावा सीमाई अड़चनों और अलग-अलग रेल गेज की वजह से भी दिक्कतें आती हैं.
इस बीच, ईरान ने खाद्य सामग्री, दवाइयों, मेडिकल उपकरणों और उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले जरूरी सामान को प्राथमिकता दी है.
इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या जमीन के रास्ते बनाए जा रहे ये वैकल्पिक मार्ग समुद्री व्यापार पर ईरान की निर्भरता घटा सकते हैं.
ये रेल रूट कैसे काम करता है?
ईरान के ट्रेड प्रमोशन ऑर्गेनाइजेशन में इंटरनेशनल ट्रेड डेवलपमेंट के डिप्टी हेड रोशनबख्श क़ानबरी ने कहा कि ईरान-चीन रेल कॉरिडोर दिक्कतों और बाधाओं के बावजूद कई महीनों से चल रहा है. इस रास्ते से दोनों दिशाओं के व्यापारी माल भेज रहे हैं.
25 सितंबर को तस्नीम न्यूज़ एजेंसी को दिए एक इंटरव्यू में क़ानबरी ने बताया कि ईरान और चीन के बीच समुद्र के रास्ते माल पहुंचने में 45 से 50 दिन लग सकते हैं, जबकि रेल मार्ग से यह समय घटकर करीब 15 दिन रह जाता है.
उनके मुताबिक़ करीब 35 दिन की यह बचत व्यापार के लिए बड़ा फ़ायदा है और इससे सामान तेजी से पहुंचाया जा सकता है.
यह रेल रूट मध्य ईरान के यज़्द प्रांत में स्थित पीशगामान ड्राई पोर्ट से शुरू होता है.
इसके बाद यह इस्फहान के ड्राई पोर्ट से होकर तुर्कमेनिस्तान और कज़ाखस्तान से गुजरता है और चीन के यीवू इनलैंड पोर्ट तक पहुंचता है.
क़ानबरी के मुताबिक इस मार्ग को चुनने की एक वजह यह भी थी कि ईरान की क़ारोबारी प्रक्रियाएं पहले से ही शंघाई से जुड़ी हुई थीं. इसलिए कारोबारियों को मौजूदा व्यवस्था में बड़े बदलाव करने की जरूरत नहीं पड़ी.
हालांकि उन्होंने माना कि रेल रूट की क्षमता समुद्री ट्रांसपोर्ट जितनी नहीं हो सकती.
उनके मुताबिक़, एक ट्रेन करीब 1,000 टन माल ले जाती है, जबकि जहाज इससे कहीं ज्यादा माल ले जा सकते हैं.
उन्होंने कहा कि रेल मार्ग की सीमित क्षमता के कारण माल भेजने के लिए इंतजार भी करना पड़ रहा है.
फ़ायदे और दिक्कतें क्या हैं
इस रेल मार्ग के सामने एक और बड़ी समस्या अलग-अलग जगहों पर रेल की पटरियों के गेज का अलग होना है.
क़ानबरी ने बताया कि तुर्कमेनिस्तान और कज़ाखस्तान से गुजरते समय कुछ जगहों पर कंटेनरों को एक ट्रेन से दूसरी ट्रेन में ट्रांसफ़र करना पड़ता है.
इससे देरी होती है. ईरानी अधिकारी इस समस्या को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं.
ईरान ने परिवहन की लागत कम करने के लिए दोनों दिशाओं में माल भेजने की व्यवस्था पर भी जोर दिया है.
पहले ईरान में सामान पहुंचाने के बाद कंटेनर अक्सर खाली वापस लौटते थे, जिससे कारोबारियों की लागत बढ़ जाती थी.
क़ानबरी ने कहा कि पिछले सात-आठ महीनों की कोशिशों के बाद अब ईरानी निर्यातक वापसी यात्रा में भी कंटेनरों में माल भेज पा रहे हैं.
इससे कुछ लागत कम हुई है, हालांकि रेल परिवहन अब भी समुद्री मार्ग से महंगा है.
क़ानबरी ने जोर देकर कहा, "ईरान को किसी एक मार्ग पर निर्भर नहीं रहना चाहिए. उसे रेल, सड़क और समुद्री परिवहन का एक साथ इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि व्यापार के नए रास्ते बनाए जा सकें."
ईरान जरूरी सामान की सप्लाई कैसे बनाए हुए है
वैकल्पिक मार्गों पर जोर ऐसे समय बढ़ा है जब संघर्ष और अमेरिकी नाकेबंदी के बाद ईरान के समुद्री व्यापार में बड़ी बाधाएं पैदा हो गई हैं.
सितंबर की शुरुआत में रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान के तेल निर्यात में तेज गिरावट आई है.
इन प्रतिबंधों का असर चीन को होने वाली तेल सप्लाई पर भी पड़ा है, जबकि चीन ईरान का सबसे बड़ा तेल ख़रीदार है.
होर्मुज़ स्ट्रेट से आम तौर पर हर दिन करीब 2 करोड़ बैरल तेल और पेट्रोलियम उत्पाद गुजरते हैं.
लेकिन यहां से होने वाले वाणिज्यिक यातायात में भी भारी गिरावट आई है.
अमेरिकी एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक़, 2026 की दूसरी तिमाही में यहां से तेल का प्रवाह घटकर 49 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया, जबकि 2025 में यह करीब 2.1 करोड़ बैरल प्रतिदिन था.
इसके बाद ईरान ने मध्य एशिया और अपने अन्य उत्तरी पड़ोसी देशों के रास्ते जमीन से सामान लाने-ले जाने पर जोर बढ़ाया है.
हालांकि इन मार्गों की क्षमता समुद्री ट्रांसपोर्टेशन के मुक़ाबले बहुत कम है.
क़ानबरी ने बताया कि हाल के घटनाक्रम के बाद जरूरी आयात को प्राथमिकता देने के लिए एक आपातकालीन समिति बनाई गई है.
खाद्य सामग्री, दवाइयां, मेडिकल उपकरणों और उत्पादन के लिए जरूरी सामान को प्राथमिकता दी जा रही है.
उन्होंने कहा कि फिलहाल आयातकों को करीब 2,500 से 2,800 टैरिफ़ कोड वाले सामान के आयात की अनुमति है. इस सूची से बाहर के सामान का आयात नहीं किया जा सकता.
क्या ये रेल रूट ईरान को मजबूत करेगा?
ईरान समुद्री मार्गों पर दबाव के बीच चीन के साथ व्यापार जारी रखने और जरूरी सामान की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए इस रेल कॉरिडोर समेत कई वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल कर रहा है.
रेल रूट का सबसे बड़ा फ़ायदा इसका कम ट्रांजिट टाइम है. लेकिन इसकी सीमाएं भी कम नहीं हैं.
माल ढुलाई की कम क्षमता, सीमा पर आने वाली दिक्कतें, लगातार जारी प्रतिबंध और ईरान के साथ कारोबार में चीन के लिए होने वाले फ़यदे और लागत जैसे सवाल इस योजना के सामने बड़ी चुनौतियां हैं.
फिलहाल यह साफ़ नहीं है कि यह रेल मार्ग आख़िर कितनी मात्रा में माल ले जा सकेगा.
ईरान के लिए बड़ा सवाल यह है कि क्या ये वैकल्पिक व्यापार मार्ग देश की अर्थव्यवस्था को संकट के समय वास्तव में मजबूत और टिकाऊ बना पाएंगे, या फिर ये ऐसी महंगी अस्थायी व्यवस्थाएं बनकर रह जाएंगे जो समुद्री व्यापार पर ईरान की पारंपरिक निर्भरता की पूरी तरह भरपाई नहीं कर पाएंगी.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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