बिहार: फर्ज़ी आईएएस जो अपनी महंगी टेस्ला कार की फ़्रंट सीट पर बैठ पहुंचा थाने

    • Author, सीटू तिवारी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 7 मिनट

बीती 8 अगस्त को जब बिहार की खगड़िया पुलिस ने मनीष कुमार उर्फ़ मनीष कुमार गुप्ता को गिरफ़्तार किया तो पुलिस उसे अपनी गाड़ी से थाने नहीं ले जा पाई.

पुलिस मनीष को उसकी महंगी टेस्ला गाड़ी में फ्रंट सीट पर बैठाकर ही थाने ले जा सकी. वजह थी कि ये टेस्ला एफ़एसडी (फुल सेल्फ़ ड्राइविंग) थी.

मौके पर मौजूद स्थानीय पत्रकार रणवीर कुमार ने बताया, "मनीष ने पुलिस को बताया कि जब तब वो कार में आगे नहीं बैठेंगे, कार नहीं चलेगी. जिसके बाद मनीष कुमार गुप्ता और उनका ड्राइवर गाड़ी में आगे और दरोगा पीछे बैठे. अब जब ये गाड़ी थाने में है तो लोग गाड़ी को देखने आ रहे हैं."

सालाना बाढ़ से प्रभावित रहने वाले खगड़िया ज़िले में मनीष गुप्ता आईएएस होने का दावा करने के आरोप में पुलिस ने बीती 8 अगस्त की देर शाम गिरफ़्तार किया था.

बीते 10 साल से खगड़िया के गोगरी थाने से महज़ एक किलोमीटर की दूरी पर रहने वाला मनीष गुप्ता इलाक़े में खुद के आईएएस होने का रौब दिखाते थे.

वो ख़ुद को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल का अंडरकवर एजेंट और केन्द्रीय सतर्कता आयोग के अधिकारी की तरह पेश करते थे.

खगड़िया एसपी भानु प्रताप सिंह ने मनीष गुप्ता के इन दावों को 'प्रथम दृष्टया फर्ज़ी' पाया है.

कौन हैं मनीष गुप्ता?

बिहार के खगड़िया ज़िले के गोगरी बाज़ार में एक 5 मंजिला आलीशन बंग्ला है जिसके बारे में स्थानीय लोगों का कहना है, "गोगरी के मेन बाज़ार में किसी का घर इतना आलीशान नहीं है."

इस घर में ही 49 साल के मनीष कुमार अकेले रहते थे. 8 अगस्त की दोपहर लगभग 2 बजे गोगरी थाने की पुलिस गुप्त सूचना पर मनीष कुमार के घर पहुंची थी.

गोगरी थानाध्यक्ष अरविंद कुमार की ओर से दर्ज़ कराई गई एफ़आईआर के मुताबिक़, "घर के सामने एक व्यक्ति चश्मा लगाए और हॉफ़पैंट पहने टहल रहा था. पूछने पर उसने अपना नाम मनीष कुमार गुप्ता बताया और कहा कि वो आईएएस है."

"उन्होंने अपने मोबाइल में परिचय पत्र दिखाया जिसमें सेंट्रल सतर्कता आयोग लिखा था और पहचान पत्र संख्या 0577102 चीफ़ सिक्युरिटी ऑफ़िसर अंकित पाया गया."

"आगे पूछताछ के क्रम में उसने खुद को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का अंडर कवर एजेंट बताया, जिसका सत्यापन किया गया जो प्रथम दृष्टया फर्ज़ी पाया गया."

एफ़आईआर में दर्ज है कि मनीष कुमार के घर के सामने काले रंग की टेस्ला कार और सफ़ेद रंग की सफ़ारी कार खड़ी थी, जिस पर 'गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया' का बोर्ड लगा पाया गया.

एफ़आईआर के मुताबिक़, इन दो गाड़ियों के बारे में पूछने पर मनीष कुमार ने यह स्वीकारा कि ये दोनों गाड़ियां उसकी हैं.

मामला संदिग्ध लगने पर पुलिस ने मनीष गुप्ता को गिरफ़्तार कर लिया और उनके घर की तलाशी ली गई.

29 ब्रॉडों की विदेशी शराब और बारहसिंघा के सींग तक बरामद

गोगरी के एसडीपीओ चंदन कुमार बीबीसी से बताते हैं, "मनीष गुप्ता चार भाई हैं. इनके माता-पिता की मृत्यु हो चुकी है और मनीष गुप्ता को छोड़कर बाकी सभी खगड़िया से बाहर रहते हैं."

"इनके एक भाई विदेश में शायद इंग्लैंड में रहते हैं जबकि बाकी दो भाइयों में से एक भाई दिल्ली में काम करते हैं. इस घर में मनीष गुप्ता एक केयरटेकर के साथ रहते थे."

पुलिस को मनीष कुमार के घर की तलाशी लेने में कई घंटे लगे.

पुलिस ने मनीष के घर की रसोई और बरामदे में रखी अलमारी से 31 लीटर विदेशी शराब बरामद की है.

खगड़िया पुलिस ने बाक़ायदा कुल 29 ब्रांड की शराब के नाम को प्रेस रिलीज़ के जरिए सार्वजनिक किया है. विदेशी शराब के अलावा करीब 10 लीटर बीयर और 30 लीटर सोडा वॉटर भी बरामद हुआ है.

मनीष के पास कुल 20 क्रेडिट कार्ड, आठ डेबिट कार्ड, चार चेकबुक के अलावा एप्पल कंपनी के दो लैपटॉप और एप्पल कंपनी के पांच मोबाइल भी बरामद हुए हैं.

जो क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और चेक बुक मनीष के घर से बरामद हुए हैं, उसमें ज़्यादातर मनीष कुमार के नाम पर हैं लेकिन कुछ अन्य व्यक्तियों के नाम पर भी हैं. जैसे आरएन कुमार, मुकेश कुमार गुप्ता, अजीत कुमार.

इसके अलावा मनीष के घर से बारहसिंघा की दो सींग भी बरामद हुई है.

फ़र्राटेदार अंग्रेजी, बॉडी लैंग्वेज और अकेले रहना

आख़िर मनीष कुमार ने इतनी आसानी से कैसे धोखा दिया?

इस सवाल पर स्थानीय पत्रकार रणवीर कुमार बताते हैं कि इनके पिता परमेश्वर प्रसाद गुप्ता स्थानीय केडीएस कॉलेज में पढ़ाते थे. उन्होंने पहले भी कुछ प्रापर्टी बनाई थी.

मनीष के घर पर जो अभी लंबा चौड़ा बगीचा है, वो कभी खेत थे. तकरीबन छह साल पहले मनीष ने खेत को गार्डन में बदलवाया और आलीशान घर बनवाना शुरू किया.

उन्होंने आगे बताया, "घर के बाहर दो चौकीदार हमेशा सिक्युरिटी गार्ड की तरह बैठे रहते थे और कोई भी व्यक्ति घर के अंदर नहीं जा पाता था. मनीष अकेला रहता था और वो किसी से भी मिलता जुलता नहीं था. उसके आस पड़ोस वाले कहते हैं कि उसने दसवीं में खगड़िया में टॉप किया था लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है."

मनीष अविवाहित हैं.

एसडीपीओ चंदन कुमार बताते हैं, "मनीष ने यूपीएससी की तैयारी कुछ साल की थी और फ़र्राटे से अंग्रेजी बोलता था इसलिए किसी को भी शक नहीं हुआ कि वो आईएएस नहीं है."

एसपी भानु प्रताप सिंह भी हैरानी जताते हैं, "मनीष बीते आठ-दस साल से आईएएस होने का दावा कर रहा था लेकिन वो कानून की गिरफ़्त से बचा रहा."

उन्होंने कहा, " उसने अपनी बॉडी लैंग्वेज इस तरह डेवलप कर ली थी कि वो किसी अधिकारी जैसा ही लगता था."

पुलिस रिमांड का इंतज़ार

नौ अगस्त को दर्ज एफ़आईआर में बीएनएस की धारा 204, 205, 212, 213, 318(2), 319(2), 336(3), 340(2) के तहत मामला दर्ज है.

साथ में, जम्मू एवं कश्मीर वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1978 की धारा 51 भी लगाई गई है.

जबकि घर से बरामद शराब को लेकर अलग से एफ़आईआर दर्ज की गई है.

बीएनएस की धाराएं जिसके तहत मामला दर्ज किया है वो मुख्यत: लोकसेवक का रूप धारण करने, किसी प्रतीक का कपटपूर्ण इरादे से इस्तेमाल करने और जालसाजी से जुड़ी हैं.

मनीश कुमार अभी मंडल कारा खगड़िया में बंद हैं.

गोगरी के एसडीपीओ चंदन कुमार ने बीबीसी हिन्दी को बताया, "इस मामले में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की टीम एक बार दौरा कर चुकी है. हम लोगों को अभी मनीष गुप्ता की रिमांड नहीं मिली है. हम लोगों को उम्मीद है कि सोमवार तक रिमांड मिल जाएगी."

बीबीसी हिन्दी ने एसपी भानु प्रताप सिंह से टेलीफ़ोन से संपर्क किया लेकिन बात नहीं हो पाई. उन्होंने व्हाट्सएप संदेशों का भी जवाब नहीं दिया.

विदेश में भी हो सकती है संपत्ति

पुलिस के मुताबिक़, "मनीष कुनार बिहार के अलग-अलग ज़िलों में ठगी करता था. पुलिस मनीष कुमार की संपत्ति का मूल्यांकन कर रही है."

हालांकि कई मीडिया संस्थानों ने रिपोर्ट किया है कि मनीष कुमार के पास 100 करोड़ रुपये की संपत्ति है लेकिन इसकी पुष्टि नहीं की जा सकी है.

खगड़िया एसपी भानु प्रताप सिंह ने मनीष कुमार की गिरफ़्तारी के बाद कहा था, "सामान्य तौर पर टेस्ला जैसी गाड़ी नहीं मिलती. हम इस मामले में कई एजेंसियों जैसे ईओयू (आर्थिक अपराध इकाई) की भी मदद ले रहे हैं."

उन्होंने आगे बताया कि मनीष गुप्ता की संपत्ति का मूल्यांकन हो रहा है और इसकी भी जांच हो रही है कि ये संपत्ति कैसे अर्जित की गई.

"इस मामले में फ़ाइनेंशियल फ़्रॉड के साथ-साथ लोगों से दबंगई हुई और दहशत फैलाई गई."

साथ ही उन्होंने बताया, "हमें जानकारी मिली है कि मनीष की बिहार के साथ-साथ विदेशों में भी संपत्ति है, जिसकी जांच की जा रही है. इसमें अभी और भी गिरफ़्तारियां हो सकती हैं. इस मामले की जांच बड़े स्तर पर की जा रही है."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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