नेपाल के तिमुरे और बेत्रावती शहर भयावह बाढ़ में बह गए, जानिए कितनी थी आबादी और क्यों थे ख़ास

नेपाल

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, 27 अगस्त, 2026 को नेपाल के नुवाकोट ज़िले में त्रिशूली और तादी नदियों के संगम पर स्थित विदुर नगरपालिका के देवीघाट में अचानक आई बाढ़ के बाद कीचड़ में डूबे घरों का हवाई दृश्य
    • Author, रजनीश कुमार
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 5 मिनट

नेपाल में बुधवार को अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने तिब्बत से लगे सीमाई इलाक़ों में भारी तबाही मचाई है.

इसमें अब तक कम से कम 162 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और बड़ी संख्या में लोग लापता हैं.

बाढ़ में नुक़सान का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि बेत्रावती बाज़ार और तिमुरे कस्बा पूरी तरह से बह गए. तिमुरे से बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी लापता हैं क्योंकि मानसरोवर की यात्रा के लिए परमिट लेने के लिए लोग तिमुरे में ही रहते थे.

बेत्रावती से 15 किलोमीटर की दूरी पर जिबजिबे गाँव के रहने वाले दीपक देवकोटा कहते हैं कि बेत्रावती बाज़ार तो पूरी तरह से बह गया.

देवकोटा ने बीबीसी हिन्दी से कहा, ''यहाँ की आबादी क़रीब 1000 थी. अगर इसमें से लोग समय रहते भाग गए होंगे तो, जान बची होगी. जब पूरा बाज़ार ही बह गया तो जो भागने में कामयाब नहीं हुए होंगे, उनके लिए जान बचाना बहुत मुश्किल रहा होगा.''

दीपक देवकोटा कहते हैं, ''तिब्बत बॉर्डर से इसकी दूरी क़रीब 45 किलोमीटर है और तिमुरे से 40 किलोमीटर. इस बाढ़ ने इन इलाक़ों को अपने भीतर समेट लिया है. तिमुरे में विदेशी पर्यटक स्टे करते थे. यहीं से मानसरोवर के लिए रवाना होते थे. इसलिए मेरा अंदाज़ा है कि यहां स्थानीय से ज़्यादा विदेशी पर्यटक लापता होंगे.''

नेपाल

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, 26 अगस्त, 2026 को नेपाल के नुवाकोट में त्रिशूली नदी के किनारे अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन के बाद का दृश्य. बताया गया है कि भूकंप के कारण नेपाल-चीन सीमा पर ल्हेंदे नदी में अचानक बर्फ और चट्टानों का हिमस्खलन हुआ, जिससे बड़ी मात्रा में पानी, कीचड़ और मलबा नीचे की ओर बहते हुए भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में पहुंच गया और नेपाल के उत्तरी सीमा क्षेत्र में अचानक भीषण बाढ़ आ गई

देखते ही देखते बह गए दो शहर

डेनमार्क में नेपाल के राजदूत रहे विजयकांत कर्ण कहते हैं कि बेत्रावती एक ऐतिहासिक जगह है क्योंकि तिब्बत नेपाल युद्ध के बाद यहीं 1792 में संधि हुई थी, जिसे बेत्रावती संधि के नाम से जाना जाता है.

विजयकांत कर्ण कहते हैं, ''कुछ भी नहीं बचा है. जो बीमार और बुज़ुर्ग थे, वे कहाँ भागते. यहाँ एक भी घर नहीं बचा नहीं है. कुछ दिन बाद ही पता चलेगा, कितने लोग जान बचाने में कामयाब रहे.''

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
Dinbhar: आवाज़ वही, अंदाज़ नया

देश - दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां.

एपिसोड

समाप्त

काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ सबसे पहले चीन की सीमा के पास रसुवागढ़ी के नज़दीक तिमुरे में पहुँची. सैकड़ों लोगों की आबादी वाले इस इलाक़े का बड़ा हिस्सा बह गया और इसके बाद बाढ़ का पानी तेज़ी से नीचे की ओर बढ़ा.

इलाके में बारिश की कोई सूचना नहीं थी, इसलिए लोगों को इस आपदा की कोई चेतावनी नहीं मिली. बाढ़ आने के समय लोग अपने रोज़मर्रा के काम में व्यस्त थे.

रसुवा के मुख्य सीमा शुल्क अधिकारी राजेंद्र ढुंगाना ने काठमांडू पोस्ट से बताया कि बुधवार सुबह जब उन्हें ज़मीन हिलती हुई महसूस हुई तो उन्हें पहले लगा कि भूकंप आया है.

ढुंगाना ने काठमांडू पोस्ट से कहा, ''जब मैं भागा तो ऊपर से तेज़ी से आती पानी की एक विशाल दीवार दिखी. इसके साथ धुएं के गुबार जैसी चीज़ भी दिखाई दे रही थी और पानी तिमुरे बाज़ार की ओर तेज़ी से बढ़ रहा था. यह बाढ़ थी, जो क़रीब 100 मीटर ऊंची लहर की तरह उठी और बाज़ार को अपने साथ बहा ले गई. कुछ ही पलों में पूरा बाज़ार ख़त्म हो गया."

नेपाल के सड़क विभाग के अनुसार, बेत्रावती से रसुवागढ़ी सीमा चौकी तक जाने वाली सड़क का क़रीब 42 किलोमीटर हिस्सा बाढ़ में पूरी तरह बह गया है. इस रोड पर कई पुल भी थे, जो बाढ़ में बह गए.

सड़क विभाग के उपमहानिदेशक और प्रवक्ता शुभराज न्यौपाने ने प्रमुख नेपाली अख़बार कांतिपुर से बताया कि नुक़सान की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए अधिकारी और जानकारी जुटा रहे हैं.

इस नुकसान का असर सिर्फ़ स्थानीय संपर्क पर नहीं पड़ेगा बल्कि बेत्रावती-स्याफ्रुबेसी-रसुवागढ़ी सड़क मार्ग मध्य नेपाल को चीन की सीमा से जोड़ने वाला रणनीतिक रूप से अहम कॉरिडोर है. इसके बड़े हिस्से के तबाह होने से आवाजाही, सामान की आपूर्ति, पर्यटन और रसुवागढ़ी/केरुंग के रास्ते नेपाल-चीन व्यापार पर भी गंभीर असर पड़ सकता है.

नेपाल

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, 26 अगस्त, 2026 को नेपाल के नुवाकोट में त्रिशूली नदी के किनारे अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन के बाद का दृश्य

जानिए कहाँ है, बेत्रावती

बेत्रावती को उत्तरगया के नाम से भी जाना जाता है. यह नेपाल के बागमती प्रांत के रसुवा ज़िले की उत्तरगया ग्रामीण नगरपालिका में स्थित है.

नुवाकोट और रसुवा ज़िलों की सीमा पर त्रिशूली और फलांखु नदियां बहती हैं.

यह काठमांडू से 58 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में है. इसे रसुवा ज़िले और रसुवागढ़ी सीमा तक पहुँचने का प्रमुख प्रवेशद्वार और एकमात्र वाहन योग्य सड़क संपर्क भी माना जाता है.''

राइजिंग नेपाल डेली ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ''बेत्रावती नेपाल के आधुनिक इतिहास में भी ऐतिहासिक महत्व का स्थान है. समय-समय पर नेपाल और तिब्बत के बीच युद्ध होते रहे हैं. प्राचीन काल से ही नेपाल और तिब्बत के बीच आर्थिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं. मल्ल काल में व्यापार से जुड़े मुद्दों को लेकर विवाद हुए, जो आधुनिक राणा शासन तक जारी रहे. विशेष रूप से 1788-1792 का चीन-नेपाल युद्ध नेपाल के इतिहास में महत्वपूर्ण है."

राइजिंग नेपाल डेली ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ''नेपाल के प्रमुख हिंदू तीर्थस्थलों में शामिल उत्तर गया अपने पवित्र त्रिशूली और फलांखु गंगा घाटों के साथ राम मंदिर, कृष्ण मंदिर, गणेश मंदिर, नीलकंठेश्वर मंदिर, सीतादेवी मंदिर, वंदेवी (सरस्वती) मंदिर और सुगत मुनि मठ जैसे पवित्र मंदिरों और धार्मिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है. यहाँ हिंदू अपने पूर्वजों को पिंड दान भी करते हैं.''

नेपाल

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, 26 अगस्त, 2026 को नेपाल के नुवाकोट में त्रिशूली नदी के किनारे अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन के बाद का दृश्य

तिमुरे किसलिए जाना जाता है?

नेपाल के रसुवा ज़िले में तिमुरे एक छोटा लेकिन अहम कस्बा है. यह रसुवागढ़ी सीमा, यानी नेपाल-चीन सीमा, से कुछ किलोमीटर पहले स्थित है. ऐतिहासिक रूप से तिब्बत जाने वाले यात्रियों के लिए इसे नेपाल में अंतिम पड़ाव और आपूर्ति केंद्र के रूप में विकसित किया गया था.

फ़िलहाल तिमुरे का इस्तेमाल केवल व्यापार के लिए ही नहीं, बल्कि नेपाल के रास्ते सड़क मार्ग से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्रियों के पड़ाव के रूप में भी होता है. आमतौर पर यात्री यहां रुककर खाना खाते हैं, बुनियादी सुविधा लेते हैं और सीमा की ओर रवाना होने से पहले ज़रूरी सामान ख़रीदते हैं.

इसके अलावा, रसुवागढ़ी इमिग्रेशन कार्यालय भी यहीं स्थित है. इस सीमा से नेपाल से बाहर जाने या नेपाल में प्रवेश करने से पहले तीर्थयात्रियों को इमिग्रेशन की प्रक्रिया से गुज़रना पड़ता है. इसलिए सड़क मार्ग से कैलाश यात्रा पर जाने वाले यात्रियों के लिए तिमुरे ख़ास तौर पर महत्वपूर्ण है.

दीपक देवकोटा कहते हैं कि तिमुरे तक पहुँचना थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि सड़क निर्माण के चलते रास्ते में कुछ हिस्से कच्चे थे.

यह मार्ग त्रिशूली बाज़ार, धुन्चे और स्याफ्रुबेसी से होकर गुजरता है और आखिर में तिमुरे पहुँचता है. त्रिशूली हाईवे से करीब 124 किलोमीटर की यह यात्रा पूरी करने में आमतौर पर 6 से 8 घंटे लगते हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें

BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह

कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.