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अभिषेक बनर्जी अस्पताल में भर्ती, टीएमसी सांसद के साथ मारपीट पर क्या बोली बीजेपी
पश्चिम बंगाल के सोनारपुर में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी के साथ मारपीट और उन पर अंडे फेंके जाने का मामला सामने आया है.
पुलिस के मुताबिक़, अभिषेक बनर्जी शनिवार को सोनारपुर इलाक़े में चुनाव बाद हुई हिंसा से प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे थे, तभी उन पर हमला हुआ.
अभिषेक बनर्जी ने इस घटना के लिए बीजेपी को ज़िम्मेदार ठहराया है जबकि राज्य में बीजेपी के नेता और केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि 'पश्चिम बंगाल की जनता में टीएमसी को लेकर आक्रोश है.'
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने टीएमसी की ओर से पोस्ट किए गए हमले का एक वीडियो साझा करते हुए एक्स पर लिखा, "शासक ही हत्यारे बन गए हैं. बीजेपी पर शर्म आती है."
कोलकाता से निकलने वाले अख़बार द टेलीग्राफ़ के अनुसार, "अभिषेक बनर्जी पर कुछ अज्ञात लोगों ने पत्थर, जूते और अंडे फेंके. कुछ लोगों ने उन्हें मारने-पीटने की भी कोशिश की. इस दौरान भीड़ 'चोर-चोर' चिल्ला रही थी."
घटना के बाद अभिषेक बनर्जी को पुलिस की कड़ी सुरक्षा में सुरक्षित निकाला गया. अभिषेक बनर्जी ने ख़ुद पर जानलेवा हमले को लेकर कोर्ट में जाने की बात कही है.
वहीं टीएमसी समेत विपक्षी दलों ने इस घटना की निंदा की है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इसे 'लोकतंत्र पर हमला' करार दिया है.
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अभिषेक बनर्जी को कोलकाता के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां पर उनसे मिलने टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी पहुंचीं.
इसके बाद अभिषेक बनर्जी को अपोलो अस्पताल से शिफ़्ट करके बेले व्यू अस्पताल में भर्ती कराया गया.
टीएमसी सांसद डेरेक ओब्रायन ने आरोप लगाया कि अस्पतालों को भर्ती न करने के निर्देश दिए जा रहे हैं.
उन्होंने कहा, "पुलिस के जरिए अस्पतालों पर दबाव डाला गया है कि इस मरीज को भर्ती न किया जाए. मेडिकल कर्मियों को निर्देश दिए जा रहे थे, इसलिए हमें उस पहले अस्पताल से हटना पड़ा जहां उन्हें भर्ती कराया गया था. अभी उनकी जांच चल रही है. वह आईटीयू में हैं. अब हम सुन रहे हैं कि इस अस्पताल पर भी अभिषेक बनर्जी को भर्ती न करने का दबाव बनाया जा रहा है. फिलहाल पश्चिम बंगाल में यही स्थिति है."
'केंद्रीय बलों ने बचाया, ये उनकी ज़िम्मेदारी थी'
सामाचार एजेंसी एएनआई के वीडियो में साफ़ दिखाई दे रहा है कि अभिषेक भीड़ से घिरे हुए हैं और सुरक्षाकर्मी उन्हें बचाने की कोशिश कर रहे हैं.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के 25 दिन बाद यह तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव का पहला सार्वजनिक कार्यक्रम था.
वह दक्षिण 24 परगना ज़िले के सोनारपुर नगर पालिका के विवेकानंदनगर इलाक़े के वार्ड नंबर 9 में चुनाव के बाद हुई हिंसा के शिकार संजू कर्मकार के परिवार से मिलने गए थे.
शनिवार को ही राज्य की सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी को 'फ़र्जी हस्ताक्षर' मामले में पूछताछ के लिए समन दिया.
इस घटना पर बीजेपी नेता सुकांत मजूमदार ने एएनआई से कहा, "मैं इस घटना की निंदा करता हूं. मैं लोगों अपील करता हूं कि वो क़ानून को अपने हाथों में न लें. बंगाल की जनता में टीएमसी और अभिषेक बनर्जी के ख़िलाफ़ आक्रोश है. हमें बंगाल में सुधार लाने की ज़रूरत है."
"हमें बंगाल की राजनीति को हिंसा मुक्त करने की ज़रूरत है. मैं जनता से शांति और क़ानून व्यवस्था बनाए रखने की अपील करता हूं."
बीजेपी नेता शहज़ाद पूनावाला ने कहा, "किसी को भी क़ानून को हाथ में लेने की इजाज़त नहीं दी जा सकती. सुरक्षा में जो लोग थे उन्होंने हेलमेट भी दिया और पुलिस ने बचाव किया. लेकिन ये आत्मचिंतन की बात है कि 15 साल में ऐसा क्या हमने किया कि लोग आक्रोषित हों?"
जबकि टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा, "हमने केंद्रीय बलों पर सवाल उठाया था क्योंकि चुनाव के दौरान उन्होंने पूरी तरह बीजेपी के पक्ष में काम किया था. यह अच्छी बात है कि उन्होंने आज अभिषेक को बचाया. यह उनकी ज़िम्मेदारी है. मुझे उम्मीद है कि जब भी ऐसी कोई घटना होगी, वे कार्रवाई करेंगे."
उन्होंने कहा, "मेरे पास इसकी निंदा करने के लिए शब्द नहीं हैं. बीजेपी कहती है कि वह शांति चाहती है, लेकिन ज़मीन पर उनके गुंडे इस तरह की हरकतें करते हैं और पुलिस समय पर नहीं पहुंचती. मैं अभिषेक को इसका सामना करने के लिए बधाई देना चाहता हूं. उन्हें चोट लगी है. इसलिए यह लड़ाई जारी रहेगी."
अभिषेक बनर्जी ने क्या कहा?
अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया है कि कुछ लोग उन्हें 'मारना चाहते' हैं और हमलावर भीड़ 'बीजेपी प्रायोजित' थी.
घटना के बारे में उन्होंने कहा, "वे मुझे मारना चाहते हैं. उन्होंने ईंट फेंकी, अंडा फेंका और पत्थरबाज़ी की. कृपया बताइए कि यह क्या है. और आसपास खड़े सभी लोग, इलाके के लोग, वे अब भी हमसे मिल रहे हैं और प्यार व सम्मान दे रहे हैं. यहां हंगामा करने वालों से जाकर पूछिए."
"हमारे पास सभी वीडियो सबूत हैं. पास में एक कम्युनिटी हॉल है. सुबह 11 बजे से उस कम्युनिटी हॉल में गुंडों को पत्थरबाज़ी करने के लिए रखा गया था. मेरे चश्मे की हालत देखिए. उन्होंने ईंट मारकर मेरी आंख पर चोट पहुंचाई है और मैं अपनी आंख नहीं खोल पा रहा हूं."
"उन्होंने मेरी पीठ, सीने, बांह और पैर पर मुक्के मारे हैं. मैंने हेलमेट पहन रखा था, नहीं तो मेरा सिर फट जाता. आप मेरे शरीर को गिरा सकते हैं, लेकिन मेरा संकल्प मज़बूत है. मेरा जोश और उत्साह अब भी कायम है और यह सिर कभी नहीं झुकेगा."
अभिषेक बनर्जी ने पर्याप्त सुरक्षा के इंतज़ाम न किए जाने का राज्य सरकार पर आरोप लगाया है.
उन्होंने कहा, "मेरे साथ तैनात दो सुरक्षा अधिकारी इस घटना की जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दे रहे हैं, फिर भी कोई बल यहां नहीं पहुंच रहा है, तो साफ़ है कि ऊपरी अधिकारी चाहते हैं कि यह पूरी घटना जारी रहे और राज्य सरकार की तरफ़ से इसे रोकने की कोई कोशिश नहीं हो रही है."
उन्होंने कहा, "इससे साफ़ दिखता है कि जिस तरह यहां एक मौत हुई है, उसी तरह 2-4 और मौतें हों, तभी उन्हें शांति मिलेगी. उन्हें जो करना है करने दीजिए. हमारे पास सब कुछ रिकॉर्ड है. हम अदालत जाएंगे. मैं इस मामले में लड़ाई लड़ने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक जाऊंगा."
उन्होंने कहा, "वे मुझे मारना चाहते हैं. उन्हें मारने दो. हो सकता है कि यहां से मेरा शव जाए लेकिन मैं यहां से नहीं जाऊंगा."
"मैं संजू के बुज़ुर्ग माता पिता को तब तक इस हालत में नहीं छोड़ूंगा जब तक अतिरिक्त बल नहीं आता. मैं एक बार फिर अपने प्रतिनिधियों से कहूंगा कि वो पुलिस से संपर्क करें."
सीआईडी ने भेजा समन
दूसरी ओर पश्चिम बंगाल सीआईडी ने शनिवार को अभिषेक बनर्जी को नोटिस भेजकर पूछताछ के लिए पेश होने को कहा.
यह नोटिस विधानसभा सचिवालय को भेजे गए उस पत्र की जांच के सिलसिले में जारी किया गया है, जिसमें विपक्ष के नेता के तौर पर शोभनदेब चट्टोपाध्याय के समर्थन में कथित तौर पर पार्टी विधायकों के जाली हस्ताक्षरों के इस्तेमाल का आरोप है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, यह नोटिस दरअसल एक समन है, जिसके तहत अभिषेक को सोमवार दोपहर एजेंसी के भवानी भवन मुख्यालय में पूछताछ के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है.
यह समन उनके कालीघाट रोड स्थित घर पर जाकर दिया गया.
विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया
टीएमसी और अन्य विपक्षी दलों ने इस घटना पर प्रतिक्रिया दी है.
टीएमसी ने एक्स पर एक बयान जारी कर कहा, "आज हमारे राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर हुआ हमला इस बात की एक और याद दिलाता है कि इस बेशर्म शासन में कानून-व्यवस्था कितनी तेज़ी से बिगड़ी है."
"अगर एक मौजूदा विपक्षी सांसद को दिनदहाड़े निशाना बनाया जा सकता है, तो आम नागरिकों के लिए क्या उम्मीद बचती है? क्या यही भाजपा का लोकतंत्र है? क्या यही वह 'सुशासन' है, जिसकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार तारीफ करते हैं?"
बयान में कहा गया है, "हिंसा, डराने-धमकाने की राजनीति और राजनीतिक गुंडागर्दी भाजपा शासन की पहचान बन चुके हैं. जो लोग इसके लिए ज़िम्मेदार हैं, उन्हें आज भले ही राजनीतिक संरक्षण मिल रहा हो, लेकिन वे हमेशा जवाबदेही से नहीं बच सकते. बंगाल देख रहा है. भारत देख रहा है. दुनिया देख रही है."
कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताते हुए एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "सांसद अभिषेक बनर्जी पर सोनारपुर में हुआ हमला बेहद निंदनीय है. एक सांसद पर हमला सिर्फ़ एक व्यक्ति पर हमला नहीं - यह उस जनता पर है जिसने उन्हें चुना, और उस लोकतंत्र पर है जो हम सबकी साझी विरासत है."
"यह बीजेपी की बदले की राजनीति का घिनौना रूप है. राजनीतिक मतभेद कभी हिंसा का कारण नहीं बन सकते."
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने घटना की निंदा करते हुए कहा, "मैं सोनारपुर में सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए चौंकाने वाले हमले की कड़ी निंदा करता हूं."
उन्होंने एक्स पर लिखा, "वह राज्य में चुनाव बाद हुई हिंसा से प्रभावित परिवारों से मिलने गए थे. एक प्रमुख विपक्षी नेता को पर्याप्त पुलिस सुरक्षा न दिया जाना साफ़ दिखाता है कि भाजपा बदले और उत्पीड़न की राजनीति कर रही है."
खड़गे ने पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्र सरकार से सभी विपक्षी नेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग करते हुए कहा, "राजनीतिक मतभेद किसी भी तरह की हिंसा का कभी भी आधार नहीं बन सकते."
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस घटना की निंदा की है.
उन्होंने एक्स पर लिखा, "अभिषेक बनर्जी जी के ऊपर जानलेवा हमला करवाकर बंगाल की अराजक भाजपा सरकार ने साबित कर दिया है कि भाजपा नफ़रत भरी नकारात्मक हिंसक राजनीति के सिवा और कुछ नहीं कर सकती है. इतने संवेदनशील वातावरण में भी पुलिस की व्यवस्था न होना एक बड़ी साज़िश की ओर इशारा करती है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.