कैंसर, कम उम्र में मेनोपॉज़ और 23 साल तक फ्रीज़ रहे एग्स से यूं हुआ स्वस्थ बच्चे का जन्म

    • Author, रेबेका थॉर्न
    • पदनाम, ग्लोबल हेल्थ
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 7 मिनट

कसांद्रा बेकन 17 साल की थीं, तब पता चला कि उन्हें हॉजकिन लिंफोमा है. यह ख़ून के कैंसर की एक दुर्लभ बीमारी है.

शुरुआत में कीमोथेरेपी के एक दौर के बाद उनका कैंसर काबू में आ गया था. लेकिन एक साल बाद कैंसर लौट आया और इस बार वह पहले से ज़्यादा गंभीर था.

डॉक्टरों ने बेकन से कहा कि उन्हें तुरंत पहले से ज़्यादा तेज़ कीमोथेरेपी शुरू करनी होगी.

उन्होंने बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के कार्यक्रम न्यूज़आवर से कहा, "उस उम्र में जब आप गाड़ी चलाना सीख रहे हों और स्कूल की आख़िरी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हों, तब आप इस तरह की स्थिति से नहीं गुज़रना चाहते. वह समय बहुत मुश्किल था."

ऊतकों के नमूने 23 साल तक फ्रीज़ करके रखे गए

बेकन उस समय किशोरावस्था में थीं. इसके बावजूद वह सोच रही थीं कि इलाज का आगे चलकर उनके शरीर पर क्या असर होगा और भविष्य में मां बनने की उनकी संभावना को कैसे बचाया जा सकता है.

उनके पास अगले पीरियड तक इंतज़ार करने का समय नहीं था. अपने एग्स को निकालकर फ्रीज़ करने की प्रक्रिया के लिए यह इंतज़ार ज़रूरी था.

इसलिए बेकन ने एक दूसरा तरीक़ा अपनाने पर ज़ोर दिया. उस समय इस तरीक़े को प्रयोग के तौर पर देखा जाता था.

इसमें अंडाशय से अंडे बनाने वाले ऊतकों के कुछ हिस्से निकालकर फ्रीज़ किए जाते हैं और बाद में उन्हें दोबारा शरीर में लगाया जाता है.

बेकन के अंडाशय से निकाले गए ऊतकों के नमूनों को 23 साल तक फ्रीज़ करके रखा गया.

जब वह 44 साल की हुईं, तो ये ऊतक दोबारा उनके शरीर में लगाए गए. पिछले महीने उन्होंने अपने पहले बच्चे को जन्म दिया. उनके बेटे का नाम लैंडन है.

माना जा रहा है कि लैंडन दुनिया के पहले ऐसे बच्चे हैं, जिनका जन्म 20 साल से ज़्यादा समय तक फ्रीज़ करके रखे गए अंडाशय के ऊतकों को दोबारा शरीर में लगाने के बाद हुआ है.

बेहद जटिल है ये सर्जरी प्रक्रिया

अपनी किशोरवस्था के दिनों को याद करते हुए बेकन कहती हैं कि वह हमेशा से मां बनना चाहती थीं.

जब उनके सामने यह संभावना आई कि शायद वह अपने बच्चे को जन्म नहीं दे पाएंगी, तो वह उम्मीद बचाए रखने के लिए कुछ भी करना चाहती थीं.

वह कहती हैं, "मुझे नहीं पता क्यों, लेकिन मैं यह मानने के लिए तैयार नहीं थी कि अगर आगे चलकर वही हुआ, जिसका डर था और मैं प्राकृतिक तरीक़े से गर्भधारण नहीं कर पाई, तो मुझे उम्मीद देने के लिए कुछ भी नहीं किया जा सकता."

अंडे फ्रीज़ करना उन महिलाओं के लिए इस्तेमाल होने वाला एक आम तरीक़ा है, जिन्हें आगे चलकर प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने में परेशानी हो सकती है.

लेकिन अंडे निकालने से पहले कई हफ़्तों तक हार्मोन के इंजेक्शन लेने पड़ते हैं. डॉक्टरों ने बेकन से कहा था कि उनके पास इतना समय नहीं है.

बेकन ने डॉक्टरों को इलाज शुरू होने से पहले उनके अंडाशय के कुछ ऊतक निकालने के लिए मनाया.

इसके बाद उन्हें डॉ. सारा मैथ्यूज़ मिलीं. वह ब्रिटेन के उन गिने-चुने सर्जनों में शामिल थीं, जो इस ख़ास तरह की सर्जरी कर सकती थीं.

डॉ. मैथ्यूज़ ने बेकन के अंडाशय से ऊतकों के चार छोटे नमूने निकाले.

लेकिन उस समय इस बात की कोई गारंटी नहीं थी कि इन ऊतकों की मदद से भविष्य में बच्चा पैदा हो पाएगा.

'मेरी इकलौती उम्मीद'

बेकन की जान बचाने के लिए उनका बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया गया और उन्हें कीमोथेरेपी दी गई. यह इलाज सफल रहा और वह एक बार फिर कैंसर से मुक्त हो गईं.

लेकिन जैसा डॉक्टरों को डर था, इस तेज़ इलाज से उनके अंडाशय को काफ़ी नुक़सान पहुंचा. बेकन 33 साल की उम्र में ही समय से पहले मेनोपॉज़ में चली गईं. यानी उनके मासिक धर्म बंद हो गए.

अब वह बच्चा चाहती थीं. इसके बाद उन्होंने ऐसा डॉक्टर खोजने के लिए दस साल तक कोशिश की, जो उनके फ्रीज़ किए गए स्वस्थ ऊतकों को दोबारा उनके शरीर में लगा सके.

जब बेकन के अंडाशय से ऊतक निकालने की सर्जरी हुई थी, तब ब्रिटेन में इस प्रक्रिया से जुड़ा क़ानून नहीं बना था.

इसका मतलब था कि उनके पास वे ज़रूरी काग़ज़ात नहीं थे, जिनकी 20 साल बाद अंडाशय के ऊतकों को दोबारा शरीर में लगाने के लिए ज़रूरत पड़ती.

इस पूरी कोशिश के दौरान डॉ. मैथ्यूज़ ने उनका साथ दिया. आख़िरकार उन्होंने इसराइल में एक ऐसा क्लीनिक खोजने में बेकन की मदद की, जो यह प्रक्रिया करने के लिए तैयार था.

फ्रीज़ किए गए ऊतक इसराइल के रमत गान शहर में स्थित शेबा मेडिकल सेंटर भेजे गए. लेकिन बेकन जिस प्रक्रिया का लंबे समय से इंतज़ार कर रही थीं, उसमें उस समय देरी हो गई, जब हमास के लड़ाकों ने सात अक्तूबर 2023 को इसराइल पर हमला किया.

इसके बाद इसराइल ने ग़ज़ा में बड़े स्तर पर सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी.

लगा मेरी इकलौती उम्मीद ख़त्म हो जाएगी

बेकन ने बीबीसी वर्ल्ड सर्विस से कहा, "मैंने सोचा, क्या मेरी इकलौती उम्मीद भी ख़त्म हो जाएगी?"

मई 2024 में कुछ समय के लिए संघर्षविराम हुआ. इसकी वजह से बेकन इसराइल जा सकीं और सुरक्षित रूप से उनके ऊतकों को दोबारा शरीर में लगाया गया.

ब्रिटेन लौटने के लिए उनके विमान में बैठने के कुछ ही घंटों के भीतर संघर्षविराम ख़त्म हो गया.

वह कहती हैं, "ऐसी कहानी आप लिख भी नहीं सकते."

अंडाशय के ऊतकों को दोबारा शरीर में कैसे लगाया जाता है? सर्जन अंडाशय से अंडे बनाने वाले ऊतक के कुछ हिस्से निकालते हैं.

इन्हें प्रयोगशाला में फ्रीज़ करके तब तक रखा जाता है, जब तक मरीज़ बच्चा पैदा करने के लिए तैयार न हो जाए.

इन ऊतकों को दोबारा शरीर में लगाने की प्रक्रिया त्वचा का एक हिस्सा दूसरी जगह लगाने जैसी होती है.

फ्रीज़ किए गए ऊतक को पिघलाकर बचे हुए अंडाशय के ऊपर या उसके पास लगाया जाता है.

इसके बाद ये ऊतक आसपास की ख़ून की नसों से दोबारा जुड़ सकते हैं और अंडाशय हर महीने अंडा छोड़ना शुरू कर सकता है.

साल 2024 में हुए एक अध्ययन के मुताबिक़, 94 फ़ीसदी तक मामलों में महिलाओं का मासिक धर्म और अंडे बनने का चक्र दोबारा शुरू हो जाता है.

वहीं 2022 के एक दूसरे अध्ययन के मुताबिक़, अंडाशय के ऊतकों को दोबारा शरीर में लगाने के लगभग 28 फ़ीसदी मामलों में जीवित बच्चे का जन्म हुआ.

साल 2016 में दुबई की रहने वाली 24 साल की मोआज़ा अल मतरूशी को दुनिया की पहली ऐसी महिला माना गया था, जिन्होंने बच्चे को जन्म देने से पहले अपना अंडाशय फ्रीज़ करवाया था. उनका अंडाशय किशोरावस्था शुरू होने से पहले फ्रीज़ किया गया था.

अनुमान है कि दुनिया भर में अंडाशय के ऊतकों को दोबारा शरीर में लगाने के बाद 200 से ज़्यादा बच्चों का जन्म हो चुका है.

'मुझे ख़ुद को धन्यवाद देना चाहिए'

साल 2024 में ऊतकों को दोबारा शरीर में लगाए जाने के कुछ ही महीने बाद बेकन का मासिक धर्म लौट आया.

उन्होंने प्राकृतिक तरीक़े से गर्भधारण करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली.

इसके बाद डॉक्टरों ने बेकन और उनके साथी को आईवीएफ़ कराने की सलाह दी.

दोनों ने तीन बार आईवीएफ़ कराया. आख़िरकार क्रिसमस के दिन, 2025 में बेकन के हाथ में गर्भधारण की पुष्टि करने वाला टेस्ट था.

वह कहती हैं, "19 साल की उम्र में मेरे शरीर में मां बनने की जो क्षमता थी, उसने 43 साल की उम्र में मुझे नई ज़िंदगी दी."

बेकन के बेटे लैंडन का जन्म इस साल सितंबर में हुआ. बेकन पिछले 25 साल से कैंसर से मुक्त हैं.

उनकी कहानी और मज़बूत इरादे को लोगों ने सराहा

अपनी कहानी लोगों के साथ साझा करने के बाद बेकन को बड़ी संख्या में महिलाओं के संदेश मिले हैं. इन महिलाओं ने कहा कि उनकी कहानी से उन्हें हिम्मत मिली है.

डॉ. मैथ्यूज़ कहती हैं कि आजकल कैंसर से जूझ रहे कम उम्र के मरीज़ों के साथ भविष्य में माता-पिता बनने के विकल्पों पर बातचीत को पहले से ज़्यादा अहमियत दी जाती है.

इसकी एक वजह यह है कि बचपन में होने वाले कैंसर से उबरने की संभावना अब काफ़ी बेहतर हो गई है.

वह कहती हैं, "हम चाहते हैं कि ये बच्चे बड़े हों और सामान्य जीवन जिएं. अपना परिवार बना पाने की संभावना इस जीवन का एक बड़ा हिस्सा है."

बेकन की कहानी सुनने वाले दूसरे लोगों की तरह वह ख़ुद भी इस बात से हैरान हैं कि इतनी कम उम्र में उन्होंने कितनी हिम्मत और मज़बूत इरादा दिखाया था.

वह कहती हैं, "मैं अब भी ख़ुद को 18 साल की उम्र में रखकर सोचने की कोशिश करती हूं कि मैं इतनी कोशिश कैसे करती रही? मैं अपने फ़ैसले पर इतनी मज़बूती से कैसे डटी रही?"

"मुझे लगता है कि यह उन बातों में से एक है, जिसके लिए मुझे पीछे मुड़कर ख़ुद को धन्यवाद देना चाहिए."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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