राष्ट्रपति चुनावः जदयू करेगा कोविंद को समर्थन

    • Author, मनीष शांडिल्य
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
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भाजपा के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद की उम्मीदवारी को समर्थन देने के मुद्दे पर विपक्ष मुश्किल में पड़ता दिख रहा है.

जनता दल यूनाइटेड ने कोविंद की दावेदारी का समर्थन करने का एलान किया है.

पार्टी प्रवक्ता केसी त्यागी ने बुधवार को कहा कि उनकी पार्टी एनडीए उम्मीदवार का समर्थन करेगी और गुरुवार को होने वाली विपक्षी पार्टियों की बैठक में जदयू शामिल नहीं होगी.

जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों की बैठक में बुधवार शाम इस बात का फैसला लिया गया.

केसी त्यागी ने कहा, "रामनाथ कोविंद का कार्यकाल बेहतरीन कार्यकाल के रुप में जाना गया. कोई भी विवाद उन्होंने नहीं होने दिया. शालीनता के साथ उन्होंने कार्यकाल पूरा किया. लोकतंत्र की स्वस्थ परंपराओं का निर्वहन रामनाथ कोविंद ने किया है, उसका आदर करते हुए उन्हें समर्थन दिया गया है."

त्यागी ने आगे बताया, ''नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद यादव और सोनिया गांधी को इस फैसले और जिन हालातों में ये फैसला लिया गया है, उसके बारे में पहले ही बता दिया है.''

केसी त्यागी के मुताबिक जदयू अब कल राष्ट्रपति चुनाव पर होने वाली विपक्षी दलों की बैठक में शामिल नहीं होगा. हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि जदयू विपक्षी एकता का प्रयास आगे भी करता रहेगा.

जदयू के पूर्व अध्यक्ष और संसदीय दल के नेता शरद यादव ने कहा कि स्थानीय परिस्थितियों में ये फैसला लिया गया है और इसका बिहार के महागठबंधन पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

बिहार में नीतीश राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के साथ गठबंधन सरकार चला रहे हैं.

बसपा प्रमुख मायावती पहले ही कह चुकी हैं कि 'अगर विपक्ष दलित उम्मीदवार नहीं उतारता है तो वे एनडीए के दलित उम्मीदवार का समर्थन करेंगी.'

जबकि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे, ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और तेलंगाना राष्ट्र समिति ने एनडीए उम्मीदवार को अपना समर्थन देने की घोषणा पहले की कर दी है.

विपक्षी दल अभी भी कोविंद को समर्थन देने को लेकर पशोपेश में दिख रहे हैं.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि किसी का समर्थन करने के लिए उसे जानना जरूरी है और उम्मीदवार ऐसा होना चाहिए जो देश के लिए हितकारी हो.

कांग्रेस पार्टी के नेता गुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि 'बीजेपी ने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का नाम तय करते हुए उनसे कोई सलाह मशविरा नहीं किया था, इसलिए समर्थन करने की गुंजाइश नहीं बची.'

माकपा महासचिव सीताराम येचुरी भी कह चुके हैं कि सर्व सम्मति की कोई गुंजाइश नहीं बची है.

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