कर्नाटक की सियासत में पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा, उनके बेटे और केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी और मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच दशकों पुरानी सियासी प्रतिद्वंद्विता एक बार फिर सामने आ गई है.
इस बार कुमारस्वामी ने आरोप लगाया है कि बेंगलुरु-मैसूरु इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर परियोजना में एक उद्योगपति के साथ हुए फ्रेमवर्क समझौते में बदलाव की वजह से राज्य के खजाने को तीन लाख करोड़ रुपये का नुक़सान हुआ.
कुमारस्वामी के मुताबिक, साल 2004 में एसएम कृष्णा सरकार में शहरी विकास मंत्री रहे डीके शिवकुमार ने नंदी इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर एंटरप्राइज (एनआईसीई) के अशोक खेनी के साथ मिलकर कॉरिडोर परियोजना के आसपास बनने वाली टाउनशिप में बेचने लायक इलाक़े को 45 फ़ीसदी से बढ़ाकर 55 फ़ीसदी कर दिया था.
कुमारस्वामी का आरोप है कि इसी वजह से इस परियोजना से जुड़े ज़मीन के सौदों में शिवकुमार की संपत्ति चार करोड़ रुपये से बढ़कर 1444 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. उन्होंने कहा कि मूल फ्रेमवर्क समझौते को 1997 में जेएच पटेल की जनता दल सरकार ने मंजूरी दी थी.
आरोपों पर मुख्यमंत्री शिवकुमार क्या बोले
इन आरोपों पर जवाब देते हुए डीके शिवकुमार ने कहा कि उनकी सारी संपत्तियों की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी जा चुकी है.
उन्होंने पत्रकारों से कहा, "मैं अमीर हूं, मैं इसे स्वीकार करता हूं. क्या एक किसान का बेटा, जिसका अपना कारोबार है, संपत्ति नहीं बना सकता?"
शिवकुमार ने कहा कि उनके परिवार की करीब 1,400 करोड़ रुपये की संपत्ति पूरी तरह वैध है. इसे कारोबार और निवेश के जरिए बनाई गई है.
उन्होंने कहा, "इसमें ग़लत क्या है? अगर उनके पास कोई दस्तावेज़ हैं तो वे आयकर विभाग को दे दें."
उन्होंने यह भी कहा कि बंगारप्पा के मुख्यमंत्री रहने के दौरान (1990-92) 99 हज़ार रुपये में खरीदा गया एक प्लॉट आज 20 करोड़ रुपये का हो चुका है.
नीस परियोजना को देवेगौड़ा ने 1994-96 के दौरान मुख्यमंत्री रहते हुए मंजूरी दी थी.
एचडी देवेगौड़ा, एचडी कुमारस्वामी, और डीके शिवकुमार के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता की शुरुआत 1989 के विधानसभा चुनाव से मानी जाती है, जब शिवकुमार ने एचडी देवेगौड़ा को चुनाव में हराया था.