उज्जैन में 650 साल पुरानी शाही मस्जिद के हिस्से को हटाने के ख़िलाफ़ याचिका हाई कोर्ट में ख़ारिज

उज्जैन शाही मस्जिद मामला
इमेज कैप्शन, मध्य प्रदेश के उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ मेला 2028 से पहले सड़क चौड़ीकरण के लिए 'शाही मस्जिद' के आंशिक हिस्से को हटाने के ख़िलाफ़ प्रदर्शन के बाद सुरक्षा कर्मी तैनात किए गए

इंदौर में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की डबल बेंच ने उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के लिए शाही मस्जिद का एक हिस्सा हटाने के ख़िलाफ़ दायर रिट याचिका ख़ारिज कर दी है.

इसके साथ ही उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया जारी रहेगी.

दरअसल सिंहस्थ कुंभ 2028 की तैयारियों के लिए शहर में सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है. लेकिन उज्जैन की क़रीब 650 साल पुरानी बताई जा रही शाही मस्जिद को लेकर सोमवार सुबह विवाद बढ़ गया.

रविवार रात से ही छतरी चौक इलाके में बड़ी संख्या में लोग मस्जिद के पास जमा हुए और सोमवार सुबह भीड़ और पुलिस के बीच झड़प हो गई, जो कुछ ही देर में हिंसक हो गई.

शॉर्ट वीडियो देखिए
वीडियो कैप्शन, उज्जैन में शाही मस्जिद के ख़िलाफ़ कार्रवाई को लेकर बढ़ा तनाव

विवाद मस्जिद को लेकर नहीं बल्कि सड़क के विस्तार के लिए इसके एक हिस्से को गिराए जाने को लेकर है.

झड़प के दौरान पथराव और मारपीट की स्थिति बन गई. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे. फ़िलहाल शाही मस्जिद इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात है.

उज्जैन के कलेक्टर रौशन सिंह ने कहा, "सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के लिए मास्टर प्लान के मुताबिक़ सड़कों के चौड़ीकरण और दूसरे निर्माण कार्य चल रहे हैं. सभी धर्म और समुदाय के लोग अपनी इच्छा से इसमें सहयोग कर रहे हैं."

"कई लोग सड़क की जद में आ रहे अपने मकान या धार्मिक स्थल खुद हटा रहे हैं. छतरी चौक में सड़क की जद में आ रहा शाही मस्जिद का हिस्सा भी मुस्लिम समाज के लोग स्वयं हटा रहे हैं. मैं सभी से अपील करता हूं कि किसी भी अफ़वाह में न आएं और शांति व्यवस्था बनाए रखने में शासन का सहयोग करें."

बीबीसी से बात करते हुए उज्जैन के शहर क़ाज़ी खलीक उर रहमान ने बताया, "मस्जिद कमेटी और जिला प्रशासन के बीच रविवार रात हुई बातचीत के बाद कमेटी ने उस हिस्से को खुद हटाने का फैसला किया है. कुछ लोग अफ़वाहों की वजह से गुस्से में हैं. इस वजह से थोड़ी झड़प भी हुई, लेकिन अभी स्थिति सामान्य है."

कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आरपीएफ़ के जवानों को भी मौके पर तैनात किया गया है. वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर मौजूद हैं.

मस्जिद का जो हिस्सा हटाया जाना है, वह उस सड़क के प्रस्तावित अलाइनमेंट में आ रहा है जिसे उज्जैन नगर निगम 15 मीटर तक चौड़ा करना चाहता है.

प्रशासन इसे सिंहस्थ के दौरान बढ़ने वाले यातायात और श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए ज़रूरी बता रहा है.

सोमवार सुबह तनाव के बाद पुलिस ने बल प्रयोग किया
इमेज कैप्शन, सोमवार सुबह तनाव के बाद पुलिस ने बल प्रयोग किया

मस्जिद कमेटी के वकील ने क्या कहा?

मस्जिद कमेटी की तरफ से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अज़हर वारसी ने बताया कि इससे पहले 9 सितंबर को सिंगल बेंच ने याचिका पर आदेश जारी किया था.

उन्होंने बताया, "उस आदेश में मास्टर प्लान के अनुरूप कार्रवाई और उसके पालन की बात कही गई थी. इसके बाद कमेटी की ओर से डिवीजन बेंच में रिट अपील दायर की गई."

सुनवाई के दौरान वैकल्पिक मार्ग तलाशने का सुझाव भी अदालत के सामने रखा गया.

वारसी के अनुसार, "प्रशासन और मस्जिद कमेटी के बीच हुई चर्चा में मस्जिद के करीब तीन फीट हिस्से को यथावत रखने का मुद्दा भी उठाया गया था. वहीं नगर निगम ने अपने शपथ पत्र में कहा था कि सड़क चौड़ीकरण के दौरान लिए जाने वाले हिस्से के बदले नियमानुसार एफ़एआर और टीडीआर का लाभ दिया जाएगा."

डिवीजन बेंच ने निगम को उसके शपथ पत्र में दी गई शर्तों का पालन करने के निर्देश दिए हैं.

कोर्ट के आदेश के बाद उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई आगे जारी रहेगी. मस्जिद कमेटी की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था और प्रभावित हिस्से से जुड़े मुद्दे सुनवाई के दौरान प्रमुखता से रखे गए.

सड़क चौड़ीकरण को लेकर विवाद

उज्जैन में बुलडोज़र एक्शन
इमेज कैप्शन, नगर निगम का कहना है कि सिंहस्थ 2028 के दौरान उज्जैन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आएंगे इसलिए सड़कें चौड़ी की जा रही हैं

उज्जैन नगर निगम के मुताबिक, सड़क चौड़ीकरण का काम उज्जैन विकास योजना 2035 के तहत किया जा रहा है.

शाही मस्जिद भी सड़क के उसी हिस्से में मौजूद है, जिसे 15 मीटर तक चौड़ा करने की योजना है. मस्जिद का एक हिस्सा इस प्रस्तावित सड़क की जद में आ रहा है.

क़ाज़ी खलीक उर रहमान ने कहा कि मुस्लिम समुदाय सिंहस्थ का विरोध नहीं करता.

उन्होंने पत्रकारों से कहा, "सिंहस्थ पहले भी हुआ था आगे भी होगा. मुस्लिम समुदाय हमेशा उसका पक्षधर रहा है. हम बस ये कह रहे हैं कि वैकल्पिक व्यवस्था तलाशी जाए और किसी भी धार्मिक स्थल को न तोड़ा जाए. क्योंकि इनमें से कई तो हिस्टोरिकल मॉन्यूमेंट्स हैं. अब शाही मस्जिद को ही ले लीजिए, यह लगभग 650 साल पुरानी है."

हाई कोर्ट ने पहले ख़ारिज की थी याचिका

मस्जिद
इमेज कैप्शन, उज्जैन में 650 साल पुरानी शाही मस्जिद के बाहर सड़क चौड़ीकरण को लेकर विवाद बढ़ गया है

इस विवाद में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 9 सितंबर के अपने आदेश में शाही मस्जिद के उस हिस्से को हटाने के नगर निगम के फैसले को चुनौती देने वाली दो याचिकाएं ख़ारिज कर दी थीं.

याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई से मस्जिद के प्रार्थना स्थल का एक हिस्सा, करीब 120 फुट ऊंची मीनार और मजहर चौक शाही प्रभावित होगा.

जस्टिस संदीप एन भट्ट की पीठ ने कहा था कि नगर निगम ने तय कानूनी प्रक्रिया का पालन किया और प्रभावित पक्षों को अपनी आपत्तियां रखने का अवसर दिया.

मस्जिद पक्ष की यह दलील भी थी कि धार्मिक स्थल होने की वजह से एक समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है. कोर्ट ने इस दलील को अस्वीकार कर दिया था.

अदालत के सामने रखे गए रिकॉर्ड के मुताबिक़, इसी सड़क पर दस मंदिरों और एक मस्जिद के हिस्से पहले हटाए जा चुके हैं.

कोर्ट के आदेश में उज्जैन में करीब 80 धार्मिक स्थलों से जुड़े निर्माण पर कारवाई का भी उल्लेख है.

अदालत ने कहा था कि सिर्फ इसलिए कि संबंधित संपत्ति धार्मिक स्थल है, नगर निगम की कार्रवाई को मनमाना नहीं माना जा सकता.

सिंहस्थ की तैयारियों के बीच हुआ विवाद

उज्जैन
इमेज कैप्शन, शाही मस्जिद महाकालेश्वर मंदिर के लगभग सामने और क्षिप्रा नदी के पास स्थित है
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अदालत ने अपने आदेश में सिंहस्थ 2028 के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या और यातायात प्रबंधन की जरूरत का भी ज़िक्र किया.

शाही मस्जिद महाकालेश्वर मंदिर के लगभग सामने और क्षिप्रा नदी के पास स्थित है.

अदालत ने कहा था कि सिंहस्थ के दौरान इस इलाके में बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही होगी और सड़क चौड़ीकरण का उद्देश्य यातायात और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा है.

मस्जिद कमेटी से जुड़े लोगों ने कहा था कि अगर हाई कोर्ट से राहत नहीं मिलती है तो वे सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकते हैं.

शहर क़ाज़ी के मुताबिक, इस मस्जिद का निर्माण करीब 1390 में हुआ था.

फ़िलहाल छतरी चौक और शाही मस्जिद के आसपास पुलिस बल तैनात है. मस्जिद कमेटी और जिला प्रशासन के बीच हुई बातचीत के बाद तय व्यवस्था के तहत कमेटी प्रभावित हिस्से को खुद हटाने की कारवाई कर रही है.

(उज्जैन से समीर ख़ान की रिपोर्टिंग के साथ)

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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