You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
सात मिनट तक 'मृत' रहे फुटबॉलर ने कोच बनकर वर्ल्ड कप में ब्राज़ील को बाहर किया
- Author, बीबीसी न्यूज़ मुंडो
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 5 मिनट
"मेरी मां मेरे अंतिम संस्कार की तैयारी कर रही थी."
ये शब्द उस शख्स के हैं जो आज भी ज़िंदा है और जिसने हाल ही में इतिहास रच दिया है. उनका नाम है स्टॉल सोलबाकेन.
58 वर्षीय सोलबाकेन नॉर्वे की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के मुख्य कोच हैं. उनकी टीम ने रविवार को अमेरिका में खेले जा रहे फुटबॉल वर्ल्ड कप का सबसे बड़ा उलटफेर करते हुए पांच बार की विश्व चैंपियन ब्राज़ील को रोमांचक मुकाबले में बाहर कर दिया था.
मैच खत्म होने के बाद सोलबाकेन अपने परिवार से गले मिले. इसकी वजह भी खास थी. लगभग 25 साल पहले, 13 मार्च 2001 को उनका दिल सात मिनट तक धड़कना बंद कर चुका था.
वह 26 घंटे तक कोमा में भी रहे थे.
इतालवी अख़बार ला गज़ेटा डेलो स्पोर्ट से बातचीत में उन्होंने कहा, "मेरी मां जब मेरे पास आ रही थीं, तब उन्हें मेरी असली हालत का पता नहीं था. रास्ते भर वह सोच रही थीं कि मेरा अंतिम संस्कार कैसे होगा."
लेकिन सोलबाकेन ने मौत को मात दी और आगे चलकर नॉर्वे की दशकों की सबसे प्रतिभाशाली फुटबॉल पीढ़ी का नेतृत्व किया.
उनकी टीम में मार्टिन ओडेगार्ड (आर्सेनल), अलेक्जेंडर सोरलोथ (एटलेटिको मैड्रिड) और सबसे बड़े सितारे इर्लिंग हालैंड (मैनचेस्टर सिटी) जैसे खिलाड़ी हैं.
ब्राज़ील के ख़िलाफ़ मुक़ाबले में हालैंड ने दो गोल किए. इस वर्ल्ड कप में वह अब तक सात गोल कर चुके हैं, जो लियोनेल मेसी और किलियन एम्बाप्पे के बराबर हैं.
ब्राज़ील पर जीत के बाद सोलबाकेन ने कहा, "यह नॉर्वे के फुटबॉल इतिहास का सबसे बड़ा दिन है."
लेकिन उनकी असाधारण कहानी की शुरुआत भी ब्राज़ील से जुड़ी एक और यादगार जीत से होती है.
मिडफ़ील्डर
1990 के दशक में स्टॉल सोलबाकेन नॉर्वे के प्रमुख मिडफ़ील्डर थे. उसी दौर में तोरे आंद्रे फ्लो और ओले गुनार सोलस्क्यर जैसे खिलाड़ियों के साथ नॉर्वे ने लगातार दो वर्ल्ड कप (1994 और 1998) के लिए क्वालिफाई किया.
1998 वर्ल्ड कप में सोलबाकेन उस टीम का हिस्सा थे जिसने ग्रुप स्टेज के अंतिम मैच में तत्कालीन वर्ल्ड चैंपियन ब्राज़ील को 2-1 से हराया.
उस जीत की बदौलत नॉर्वे पहली बार वर्ल्ड कप के प्री-क्वार्टर फ़ाइनल में पहुंचा, हालांकि बाद में इटली से हार गया.
उस समय तक यही नॉर्वे के फुटबॉल इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी.
साल 2000 में, 33 वर्ष की उम्र में, सोलबाकेन डेनमार्क के क्लब एफसी कोपेनहेगन से जुड़ गए.
13 मार्च 2001 को प्रशिक्षण सत्र के दौरान उन्हें अचानक दिल का दौरा पड़ा और वह मैदान पर गिर पड़े.
टीम के डॉक्टर फ्रैंक ओडगार्ड ने तुरंत प्राथमिक उपचार शुरू किया और एम्बुलेंस बुलाई.
सात मिनट तक उनका दिल धड़कना बंद रहा और उन्हें मेडिकली मृत घोषित कर दिया गया.
अस्पताल ले जाते समय डॉक्टरों ने उन्हें दोबारा जीवित किया. इसके बाद वह 26 घंटे तक कोमा में रहे.
उन्होंने बाद में एक पॉडकास्ट में कहा, "मुझे एक नीली रोशनी दिखाई दी और फिर एक सुरंग नज़र आई. उस समय मुझे लगा कि मैं थोड़ी देर और वहीं रहना चाहता हूं."
उनकी मां उस समय नॉर्वे से कोपेनहेगन आ रही थीं. वह सोच रही थीं कि अगर उनका बेटा नहीं बचा तो अंतिम संस्कार कैसे होगा, और अगर बच गया लेकिन दिमाग़ को नुक़सान हुआ तो आगे की ज़िंदगी कैसी होगी.
जांच में पता चला कि उन्हें जन्मजात हृदय संबंधी समस्या थी. डॉक्टरों ने साफ कहा कि अब उन्हें पेशेवर फुटबॉल छोड़नी होगी.
उनके शरीर में पेसमेकर लगाया गया और 33 साल की उम्र में उनका खिलाड़ी के रूप में करियर समाप्त हो गया.
खिलाड़ी से सफल कोच तक
इसके बाद सोलबाकेन ने कोचिंग की शुरुआत की.
पिछले 26 वर्षों में उन्होंने डेनमार्क, इंग्लैंड और जर्मनी में कोचिंग की. एफसी कोपेनहेगन के साथ उन्हें बड़ी सफलता मिली.
दिसंबर 2020 में उन्हें नॉर्वे की राष्ट्रीय टीम का मुख्य कोच बनाया गया.
उसी समय इर्लिंग हालैंड और मार्टिन ओडेगार्ड जैसे युवा सितारे उभर रहे थे.
हालांकि उनकी टीम 2022 वर्ल्ड कप और 2024 यूरोपीय चैम्पियनशिप के लिए क्वालिफाई नहीं कर सकी, लेकिन नॉर्वे फुटबॉल संघ ने उन पर भरोसा बनाए रखा.
2026 वर्ल्ड कप क्वालिफायर में नॉर्वे का सामना इटली सहित कई मजबूत टीमों से हुआ.
टीम ने ग्रुप के सभी आठ मुकाबले जीतकर सीधे वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई किया.
वर्ल्ड कप में भी नॉर्वे ने शानदार प्रदर्शन जारी रखा. ग्रुप स्टेज में फ्रांस के बाद दूसरे स्थान पर रही टीम ने नॉकआउट में पहले आइवरी कोस्ट और फिर ब्राज़ील को हराकर पहली बार वर्ल्ड कप के क्वार्टर फ़ाइनल में जगह बनाई.
नॉर्वे फुटबॉल संघ के साझा किए गए एक वीडियो में सोलबाकेन ने कहा, "इन खिलाड़ियों ने सिर्फ़ नॉर्वे के फुटबॉल का इतिहास नहीं बदला, बल्कि पूरे देश का इतिहास बदल दिया है."
उन्होंने कहा, "आज जो खुशी हम महसूस कर रहे हैं, वही खुशी पूरे नॉर्वे में महसूस की जा रही है. आप सभी का बहुत-बहुत शुक्रिया."
अब नॉर्वे पहली बार वर्ल्ड कप के क्वार्टर फ़ाइनल में पहुंच चुका है और इस उपलब्धि के पीछे उसके कोच की असाधारण यात्रा भी उतनी ही प्रेरणादायक है.
सोलबाकेन ने कभी कहा था, "जब मैं उस दिन बच गया था, तो अब किसी भी चुनौती का सामना कर सकता हूं."
आज यह बात उनके जीवन और उनके फुटबॉल सफर, दोनों पर सटीक बैठती है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.