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झारखंडः मांगें माने जाने के बाद भी आंदोलन जारी, अब वे भी धरने पर बैठे जिनकी नियुक्तियां हुईं रद्द
- Author, आनंद दत्त
- पदनाम, बीबीसी हिन्दी के लिए रांची से
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 6 मिनट
झारखंड में चल रहे स्टूडेंट के आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को बड़ा एलान किया है.
सीएम सोरेन ने टीडीपीएल के संचालन में हुईं जेपीएससी-14, जेएसएससी-सीजीएल की परीक्षाओं को रद्द करने का फै़सला किया है. वहीं, ये भी कहा कि जेपीएससी 11 से 13 की जांच की जाएगी.
इसके साथ ही इन परीक्षाओं के प्रकाशित रिज़ल्ट को भी रद्द करने का एलान किया गया है. मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि टीडीपीएल के माध्यम से जिन अभ्यर्थियों का चयन हुआ है, उन सभी का चयन रद्द किया जाएगा.
मुख्यमंत्री की घोषणा को मोबाइल के माध्यम से लाइव सुन रहे छात्र, जो जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में बैठे थे, खुशी से झूम उठे. एक दूसरे संग मिठाइयां बांटी, गुलाल लगाया और धरनास्थल से अलबर्ट एक्का चौक तक यात्रा निकाली.
हालांकि, स्टूडेंट लीडर देवेंद्रनाथ महतो ने कहा है कि रिफ़ॉर्म की प्रक्रिया के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा.
बातचीत के दौरान जारी रहीं अटकलें
इससे पहले,सोमवार को दिनभर अटकलों का बाजार गर्म रहा. छात्रों और चार सदस्यों वाली मंत्रिमंडलीय समूह के साथ छात्रों की बैठक दोपहर 2 बजे होनी थी. मोरहाबादी स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में मीडिया का जमावड़ा लग गया. लेकिन 4 बजे तक बातचीत शुरू नहीं हो सकी थी.
जानकारी मिली कि सीएम हेमंत सोरेन धुर्वा स्थित सचिवालय में सभी 11 मंत्रियों के साथ इसी मुद्दे पर अहम बैठक ले रहे हैं. लगभग साढ़े चार घंटे चली बैठक के बाद सीएम ने मीडिया को बातचीत के लिए आमंत्रित किया.
जहां उन्होंने कहा, ''नौजवानों का भविष्य और उनका विश्वास न डगमगाए, हम हमेशा इसके पक्ष में रहे हैं. विगत दिनों से हमारे जो नौजवान जयपाल सिंह स्टेडियम में अलग-अलग खेमों में बैठकर अपनी मांगों को लेकर बैठे हैं, मैं उन्हें अलग खेमा नहीं मानता. सभी अपने भविष्य की चिंता को लेकर बैठे थे.''
हेमंत सोरेन ने कहा, ''परीक्षाएं कैसे होनी चाहिए, इसका पहले से ही एसओपी बना हुआ है. अगर उनका पालन होता, तो ये गड़बड़ियां नहीं होती.''
सीएम की घोषणा के मुताबिक जिन परीक्षाओं को रद्द किया गया है, उसमें 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा रेगुलर पीटी, जेपीएससी बैकलॉग पीटी 2023, जेपीएससी बैकलॉग पीटी 2025, फॉरेस्ट रेंज अफसर, सहायक वन संरक्षक, एपीपी रेगुलर नियुक्ति, एपीपी बैकलॉग नियुक्ति और सिविल जज जूनियर शामिल है. इन सभी परीक्षाओं का संचालन जेपीएससी के माध्यम से किया जाता है.
सीएम की ओर से की गई अन्य घोषणाओं के मुताबिक सीजीएल परीक्षा से चयनित 1975 लोगों की नौकरी अब खत्म हो जाएगी. साल 2014 के बाद आयोजित सभी नियुक्ति परीक्षाओं की जांच होगी. इसके अलावा जेपीएससी व सीजीएल परीक्षा की जांच न्यायिक आयोग भी करेगा और रिफॉर्म्स पर आईएएस अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में कमेटी बनेगी.
धरना अब भी जारी
सीएम की घोषणा के बाद छात्रों ने कहा कि यह हमारे पहले चरण की मांग पूरी हुई है. लेकिन सीबीआई जांच होने तक आंदोलन जारी रखेंगे.
इस पूरे आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक छात्र नेता पीयूष कुमार ने कहा, ''हमारी कुछ मांगें अब भी नहीं मानी गई हैं. जिसमें पहली है, जेएसएससी-सीजीएल रद्द करने संबंधी अधियाचना (रिक्वीजीशन) वापस नहीं हुई है. दूसरा, जेपीएससी 11 से 13 तक पर सरकार का स्टैंड स्पष्ट नहीं है. जबकि इस परीक्षा का इंटरव्यू और मेरिट लिस्ट टीडीपीएल कंपनी के माध्यम से ही जारी किया गया था.''
जब राज्य सरकार को आपसे वार्ता करनी थी, लेकिन बातचीत किए बिना घोषणा कर दी गई. क्या इसकी वजह से भी आंदोलन जारी रहेगा? पीयूष ने कहा, ''तय कार्यक्रम के बावजूद मंत्रियों के समूह ने हमारे साथ बातचीत नहीं की. हम अब भी बातचीत के लिए तैयार हैं.''
आंदोलन जारी रखने पर उन्होंने कहा, ''हम सब इस बात पर मजबूती के साथ एकजुट हैं कि जब तक सीबीआई जांच की मांग और अन्य मांगें जो हम पहले दिन से उठा रहे हैं, वो पूरी नहीं होती, हम लगातार बैठे रहेंगे. आंदोलन बिल्कुल भी कमजोर नहीं होने जा रहा.''
वहीं सदर अस्पताल में अनशन पर रहते हुए इलाज करा रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अपना अनशन समाप्त करने की घोषणा की. लेकिन यह भी कहा कि संघर्ष जारी रहेगा.
जो पास हो गए थे, वो भी बैठे धरने पर
देर शाम जब सीएम परीक्षा रद्द होने की घोषणा कर रहे थे, ठीक उसी वक्त और उसी जगह, यानी सचिवालय परिसर में उन लोगों की भीड़ जमा हो गई जो जेएसएससी के माध्यम से इन परीक्षाओं में पास होकर नौकरी पा चुके थे.
सत्यम कुमार रांची जिला के बुढ़मू प्रखंड में बतौर कल्याण पदाधिकारी पदस्थापित थे. जैसे ही उन्हें सरकार के फ़ैसले की सूचना मिली, भागे-भागे सचिवालय पहुंचे.
वो कहते हैं, ''आप ऐसे ही रैंडम स्टेटमेंट देकर 2000 लोगों को नौकरी से नहीं निकाल सकते हैं. ये कैसा न्याय है, सुबह नौकरी पर थे, शाम को निकाल दिए गए. जबकि कोर्ट के आदेश के बाद हमें नौकरी मिली थी.''
बता दें, जेएसएससी-सीजीएल की परीक्षा दिसंबर 2023 में आयोजित की गई थी. पेपर लीक होने के बाद सितंबर 2024 में दोबारा परीक्षा हुई. इसका परिणाम जारी होने के बाद फिर पेपर लीक की आशंका हुई और मामला कोर्ट तक पहुंचा. आठ दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट के आदेश के बाद परिणाम जारी किया गया और 30 दिसंबर को सफल प्रतिभागियों को नियुक्ति पत्र दिया गया.
सत्यम कहते हैं, ''हमारी तो लाइफ खत्म हो जाएगी अब. हाल ही मैंने एक बाइक, फोन और घर का सामान इंस्टॉलमेंट पर लिया है. कुल 55 हजार की सैलरी में 12 हजार रुपए इंस्टॉलमेंट में कट रहा है. अब पैरों तले जमीन खिसक चुकी है. सरकार हमारी जांच कर ले, हमें कोई आपत्ति नहीं है. लेकिन इस तरह नौकरी से नहीं निकाल सकती है. हम सबकी जांच कर लीजिये, कोई आपत्ति नहीं है.''
सत्यम के बैचमेट और प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के पद पर कार्यरत ऋषभ कुमार राय भी इसी हालात से जूझ रहे हैं. वो कहते हैं, ''मैं तो बीते कई दिनों से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लॉ एंड ऑर्डर स्थापित करने की ड्यूटी में ही था. लेकिन अब सब कुछ खत्म हो गया.''
वो आगे कहते हैं, ''सरकार हम सब की जांच कर ले. जो दोषी पाए जाते हैं, उन्हें नौकरी से निकाल दे. लेकिन किसी और की गलती की सजा सबको नहीं दी जानी चाहिए. यह भीड़ के दवाब में लिया गया फैसला है. ''
ऋषभ के मुताबिक वो और उनके जैसे 500 से अधिक लोग भारी बारिश में सचिवालय परिसर में धरने पर बैठे हैं. कुल 2000 लोग इसमें शामिल होने जा रहे हैं. इधर हम जाग रहे हैं, उधर हमारे घरवालों का रो-रो कर बुरा हाल हो गया है.
इधर, पूरे मसले पर राज्य के पूर्व महाधिवक्ता अजीत कुमार ने मीडिया को दिए बयान में कहा है कि सीजीएल के तहत हुई जो नियुक्तियां रद्द की गई हैं, वह सशर्त हुई थी. उनके नियुक्ति पत्र में ही यह लिखा हुआ था कि सीआईडी जांच के अंतिम निर्णय से उनकी नियुक्तियां प्रभावित होंगी, इसलिए इसमें कोई न्यायिक अड़चन नहीं आएगी.
पहले राज्य सरकार को एक फ्रंट पर छात्रों के विरोध का सामना करना पड़ रहा था, अब दो – दो फ्रंट पर निपटना होगा. जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में बड़ी संख्या में छात्र अबीर गुलाल लगा कर जश्न ज़रूर मना रहे हैं, लेकिन कई लोगों का यह भी मानना है कि जिनकी नौकरी गई है, उन पर क्या बीत रही होगी. आंदोलन में शामिल कुछ लोग अपने ऐसे दोस्तों से बात नहीं कर पा रहे हैं जिनकी नौकरी गई हैं.
इधर सचिवालय परिसर में आंदोलन कर रहे पूर्व पदाधिकारियों को मंगलवार की सुबह परिसर से बाहर कर दिया गया है. साथ ही सचिवालय के मुख्य द्वार का गेट भी बंद कर दिया गया है. मूसलाधार बारिश के बीच ये लोग सड़क पर आंदोलन कर रहे हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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