You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
कश्मीर में एक शख़्स को ऊंट ख़रीदना क्यों पड़ा भारी
- Author, जहांगीर अली
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर से
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 6 मिनट
कश्मीर के बडगाम ज़िले में गुलाम रसूल भट्ट के घर एक दिन अचानक कुछ लोग पहुंचे और उनके ऊंट को अपने कब्ज़े में ले लिया.
भट्ट को उस समय तक यह नहीं पता था कि वे लोग कौन थे और उनके ऊंट को घर से क्यों ले जाया गया.
उनके ऊंट को श्रीनगर म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के अधिकारियों ने अपने कब्ज़े में लिया था. अधिकारियों को संदेह है कि भट्ट ईद पर ऊंट की कुर्बानी देने वाले थे. भारत में ऊंट को मारना ग़ैरकानूनी है.
भट्ट ने इसी साल एक लाख रुपये से अधिक का कर्ज़ लेकर यह ऊंट खरीदा था. कुर्बानी की बात से इनकार करते हुए भट्ट कहते हैं कि वह ऊंट का इस्तेमाल पर्यटकों से कमाई के लिए करना चाहते थे.
लेकिन पशु अधिकारों के लिए काम करने वाले लोगों को उनकी मंशा पर संदेह था. अब यह मामला अदालत तक पहुंच चुका है.
पूरा मामला क्या है?
गुलाम रसूल भट्ट का कहना है कि कश्मीर में ऊंट देखना पर्यटकों के लिए एक अनोखा अनुभव होता, इसलिए उन्होंने इस साल की शुरुआत में एक ऊंट ख़रीदा.
उन्हें मालूम नहीं था कि इसके मालिकाना हक़ के लिए उन्हें कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाना पड़ेगा.
भट्ट ने बीबीसी न्यूज़ हिंदी को बताया कि उन्होंने ऊंट ख़रीदने के लिए 1 लाख 20 हजार रुपये लोन पर लिए थे. उन्होंने बताया कि वह इस ऊंट को कश्मीर के मशहूर टूरिस्ट रिसॉर्ट, दूधपथरी ले जाने की योजना बना रहे थे.
गुलाम रसूल भट्ट का कहना है, "दूधपथरी में बहुत सारे टूरिस्ट आते हैं. मुझे लगा कि ऊंट की सवारी या उसके साथ फ़ोटो खिंचवाने का आइडिया पर्यटकों को पसंद आएगा. कश्मीर में ऐसा पहली बार होता और इससे मेरी कमाई भी हो जाती."
लेकिन भट्ट के इन दावों के विपरीत कश्मीर में जानवरों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले ग्रुप 'एनिमल राइट्स कश्मीर' को एक सोशल मीडिया पोस्ट देखकर संदेह हुआ.
ग्रुप के फाउंडर दाऊद मोहम्मद ने बताया कि इस साल मई में उन्हें सोशल मीडिया पर एक पोस्ट दिखी, जिसमें कहा गया था कि 'भट्ट ईद पर इस जानवर की क़ुर्बानी देने वाले हैं.'
इस्लाम में ईद-उल-अज़हा पर पैग़ंबर इब्राहिम की अल्लाह के प्रति समर्पण की याद में भेड़, बकरी, भैंस या ऊंट जैसे जानवरों की क़ुर्बानी दी जाती है.
इस्लाम में ईद पर ऊंट की क़ुर्बानी देने की भी इजाज़त है. मध्य पूर्व और अफ़्रीका के कई देशों में ईद पर जानवरों की क़ुर्बानी दी जाती है.
लेकिन, 'पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960' और अन्य क़ानूनों के तहत पूरे भारत में ऊंट को मारने पर प्रतिबंध है.
इसी आधार पर ईद से एक दिन पहले 26 मई को एनजीओ के कुछ सदस्यों के साथ श्रीनगर म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (एसएमसी) के अधिकारियों ने बडगाम में भट्ट के घर पर छापा मारा.
अधिकारी ऊंट को एक स्पेशल वैन में श्रीनगर ले गए.
अदालत पहुंचा मामला
भट्ट बताते हैं कि उन्हें पता ही नहीं चला कि उनके ऊंट के ले जाने वाले कौन लोग थे.
उन्होंने कहा, "जब मैंने लोकल पुलिस से संपर्क किया, तब पता चला कि वे एसएमसी के अधिकारी और एनजीओ के एक्टिविस्ट थे."
तो क्या भट्ट ईद पर ऊंट की कुर्बानी की योजना बना रहे थे?
इस आरोप पर उन्होंने कहा, "मैं एक ग़रीब आदमी हूं. मैं लिखकर देने को तैयार हूं कि मैं उसकी देखभाल करूंगा. मैं उसे वापस जम्मू ले जाकर पशु व्यापारी को लौटाने को भी तैयार हूं ताकि मैं अपना कर्ज़ चुका सकूं."
भट्ट ने अब एसएमसी से अपना ऊंट वापस हासिल करने के लिए श्रीनगर की एक अदालत का दरवाज़ा खटखटाया है.
उन्होंने कहा, "अदालत ने एसएमसी और एनजीओ को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है. लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया है. अब एक महीना हो गया है. मैं सच में परेशान हूं. क्या करूं."
बीबीसी ने एसएमसी कमिश्नर फ़ैज़ लुल हसीब से इस मामले में बात करने की कोशिश की, लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई.
वहीं मोहम्मद ने कहा कि ऊंट कश्मीर का नहीं है और अगर उसे घाटी में ही रखा गया तो वह कड़ाके की ठंड में ज़िंदा नहीं रह पाएगा.
उन्होंने कहा कि 'एनिमल रेस्क्यू कश्मीर' अब जम्मू-कश्मीर सरकार की मदद से 'शेट्टी' को राजस्थान ले जाने की योजना बना रहा है, जहां उसे एक वाइल्डलाइफ़ सैंक्चुअरी में छोड़ा जाएगा.
मोहम्मद ने कहा, "हमें कोर्ट से कोई आदेश नहीं मिला है. इस जानवर को रेस्क्यू किया गया है और उसे वापस वहीं भेजा जाएगा जहां उसका कुदरती आवास है."
ऊंट को मिला नया घर और नया नाम
इधर ऊंट को रेस्क्यू करने वाली टीम ने इसका नाम 'शेट्टी' रखा है. उसकी देखभाल करने वालों के मुताबिक़, इस ऊंट की उम्र क़रीब तीन साल है. अब यह श्रीनगर के टेंगपोरा इलाक़े में एसएमसी के म्युनिसिपल वेटेरिनरी सर्विसेज़ कॉम्प्लेक्स में एक अनोखा नज़ारा बन गया है.
वेटनरी कॉम्प्लेक्स के एक कोने में बैडमिंटन कोर्ट के आकार का एक ठीक-ठाक मिट्टी वाला प्लॉट 'शेट्टी' के लिए रिज़र्व किया गया है, जहां वह ज़्यादातर समय बिताता है.
लेकिन उसकी देखभाल करने वालों को उसे संभालने में थोड़ी मुश्किल हो रही है.
वेटनरी कॉम्प्लेक्स के एक कर्मचारी ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर कहा," 'शेट्टी' के लिए सही खाना ढूंढना एक मुश्किल काम रहा है."
उन्होंने कहा, "पिछले तीन दिनों से उसे पेट फूलने की समस्या थी, जिसकी वजह से हमें उसकी हालत का पता लगाने के लिए स्पेशलिस्ट की एक टीम बनानी पड़ी. हमारे डॉक्टर ऐसे जानवरों का इलाज करने के आदी नहीं हैं."
फ़िलहाल लोग ऊंट के साथ सेल्फ़ी तो ले रहे हैं, लेकिन गुलाम रसूल भट्ट की योजना ऐसी सेल्फ़ी की नहीं थी. अब इस ऊंट और भट्ट का भविष्य अदालत के आदेश में टिका है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.