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केरल के 'रियल हीरो' जो बुज़ुर्ग को बचाने के लिए अपनी लाइफ़ जैकेट देने के बाद बाढ़ में बहे
- Author, सिराज
- पदनाम, बीबीसी तमिल
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 6 मिनट
हर साल जुलाई और अगस्त के दौरान केरल में भारी बारिश और बाढ़ आती है. ख़ासतौर पर 2018 में "गॉड्स ओन कंट्री" कहे जाने वाला केरल पानी में डूब गया था. उस समय राज्य ने लगभग 50 वर्षों की सबसे भीषण बारिश और बाढ़ का सामना किया था.
उस आपदा के दौरान केरल के कई आम लोग बचाव अभियान में स्वयंसेवक बनकर आगे आए थे. उनमें से एक थे तिरुवनंतपुरम के रहने वाले राजेश.
इस साल भी मानसून के कारण केरल के कई हिस्से बुरी तरह प्रभावित हुए. राजेश एक बार फिर वॉलंटियर के तौर पर राहत और बचाव अभियान में शामिल हुए.
एक अगस्त की शाम राजेश कन्नूर ज़िले में बाढ़ के पानी में फंसे 61 वर्षीय व्यक्ति को बचाने के अभियान में शामिल थे. बचाव के दौरान उन्होंने अपनी लाइफ़ जैकेट उस बुज़ुर्ग को पहना दी.
बुज़ुर्ग को सुरक्षित बचा लिया गया, लेकिन राजेश तेज़ बहाव में बह गए. उनके परिवार और दोस्तों को उम्मीद थी कि वह जीवित मिल जाएंगे.
हालांकि, तीन दिन तक चले खोज अभियान के बाद उनका शव बरामद हुआ और 6 अगस्त को पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया.
कौन थे राजेश
36 वर्षीय राजेश तिरुवनंतपुरम के थेत्तिविला के रहने वाले थे. वो रैपलिंग प्रशिक्षक थे और एडवेंचर डिज़ास्टर सोसाइटी नाम के स्वयंसेवी आपदा राहत समूह के सदस्य भी थे, जो प्राकृतिक आपदाओं के दौरान बचाव कार्यों में हिस्सा लेता है.
राजेश के मित्र विष्णु कहते हैं, "राजेश की मौत से सिर्फ़ उनका परिवार ही नहीं, बल्कि पूरा थेत्तिविला शोक में डूब गया है."
वह कहते हैं, "उन्होंने 2024 के वायनाड भूस्खलन के दौरान भी बचाव कार्य में हिस्सा लिया था. उन्होंने कई लोगों को आपदा प्रबंधन और बचाव तकनीकों का प्रशिक्षण दिया. वह राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के छात्रों के लिए पर्वतारोहण प्रशिक्षक भी थे."
1 अगस्त को कन्नूर ज़िले में भारी बारिश के कारण कर्नाटक सीमा के पास चेरुपुझा के निकट पुलिंगोम गांव में भीषण बाढ़ आ गई थी.
जिस 61 वर्षीय व्यक्ति को राजेश ने बचाया, उनका नाम बेनी है. वो इलाके में कॉफ़ी बागान के मालिक हैं.
बेनी ने मीडिया से कहा, "अगर राजेश वहां नहीं होते तो मैं निश्चित रूप से बच नहीं पाता. लेकिन मेरे जैसे 61 साल के व्यक्ति को बचाने के लिए राजेश जैसे युवा को अपनी जान जोखिम में नहीं डालनी चाहिए थी."
कैसे पानी में बह गए?
उन्होंने बताया, "एक अगस्त को लगातार बारिश के बावजूद मैं अपने कॉफ़ी बागान में काम के लिए गया था. शुरुआत में पानी सिर्फ़ टखनों तक था. लेकिन अचानक बाढ़ का पानी तेज़ी से बढ़ने लगा. जब मैंने बाहर निकलने की कोशिश की तो पानी कमर तक पहुंच चुका था. घबराकर मैंने अपने परिवार को फ़ोन किया. कुछ ही मिनटों में मैं बाढ़ के तेज़ बहाव में बह गया."
बेनी ने बताया कि वह किसी तरह एक नारियल के पेड़ को पकड़कर लटके हुए थे, तभी राजेश और उनकी टीम उन्हें बचाने पहुंची.
बचाव अभियान में राजेश के साथ मौजूद बीजू ने उस दिन की घटना का विवरण देते हुए बीबीसी तमिल से कहा, "जिस पेड़ पर बेनी फंसे हुए थे, उसकी ओर एक रस्सी फेंकी गई. उन्होंने उसे पकड़कर नारियल के पेड़ से बांधने की कोशिश की. लेकिन जब राजेश ने देखा कि उन्हें दिक्कत हो रही है तो वह तुरंत तैरकर उनके पास पहुंचे. रस्सी को पेड़ से बांधने के बाद उन्होंने बेनी को बचाना शुरू किया."
बीजू ने बताया, "बेनी पूरी तरह थक चुके थे इसलिए राजेश ने अपनी लाइफ़ जैकेट उतारकर उन्हें पहना दी. राजेश के साथ बचाव दल के दो और सदस्य भी थे. सभी रस्सी पकड़कर नदी किनारे लौटने लगे. तभी अचानक नदी का बहाव बहुत तेज़ हो गया और राजेश उसमें बह गए."
बीजू ने कहा कि राजेश की तलाश तुरंत शुरू कर दी गई.
उन्होंने कहा, "राजेश बहुत अच्छे तैराक थे और उन्हें ऐसे हालात में काम करने का लंबा अनुभव था. लेकिन लंबे समय तक ठंडे पानी में रहने के कारण शायद उनके शरीर में ऐंठन आ गई होगी, जिससे उनके लिए तैरना मुश्किल हो गया. हमें पूरा विश्वास था कि वह जीवित मिलेंगे और उसी उम्मीद के साथ बचाव अभियान चलता रहा."
मुख्यमंत्री की श्रद्धांजलि
हालांकि, तीन दिन बाद 4 अगस्त को करियांगोडे नदी से राजेश का शव बरामद हुआ. इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को उनके गृह नगर ले जाया गया, जहां 5 अगस्त को उनका अंतिम संस्कार किया गया.
राजेश को श्रद्धांजलि देते हुए केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने कहा था, "राजेश का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा. उन्होंने दूसरे व्यक्ति की जान बचाने के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया. उन्होंने कई आपदाओं के दौरान सेवा की है. उनके परिवार को हर संभव सहायता दी जाएगी. सरकार उनके अधूरे मकान का निर्माण भी पूरा कराने में मदद करेगी."
राजेश अपने पीछे पत्नी शफ़िया और दो बेटे, अर्शान और अभिषेक को छोड़ गए हैं.
उनके मित्र विष्णु कहते हैं, "उनका परिवार आर्थिक रूप से कमज़ोर है. इस घटना से सिर्फ एक सप्ताह पहले ही वह कन्नूर में आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण पूरा करके घर लौटे थे. गांव में जब भी कोई जनसेवा का काम होता था, राजेश सबसे पहले आगे आते थे."
2023 में रिलीज़ हुई मलयालम फ़िल्म '2018', जिसमें टोविनो थॉमस, कुंचाको बोबन और आसिफ़ अली ने अभिनय किया था, केरल की 2018 की विनाशकारी बाढ़ पर आधारित थी.
इस फ़िल्म में टोविनो थॉमस ने अनूप नाम के एक युवक की भूमिका निभाई थी, जिसकी बाढ़ में एक बुजुर्ग को बचाने की कोशिश के दौरान मौत हो जाती है.
सोशल मीडिया पर कई लोग राजेश की तुलना इसी किरदार से करते हुए उन्हें केरल का "रियल हीरो" बता रहे हैं.
विष्णु ने अपील करते हुए कहा, "हर साल जब केरल में भारी बारिश और बाढ़ आती है, तो राजेश जैसे स्वयंसेवक सबसे पहले लोगों की मदद के लिए आगे आते हैं, इसलिए सरकार को राजेश के परिवार को हर ज़रूरी सहायता उपलब्ध करानी चाहिए."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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