वैभव सूर्यवंशी के 14 रन बनाम सचिन के 15 रन लेकिन इन सबके बीच चर्चा में रवि बिश्नोई

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भारत इंग्लैंड से दूसरा टी20 मैच चार विकेट से हार गया. 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने इस मैच के ज़रिए अपना अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया.

सबसे कम उम्र में डेब्यू करने के मामले में उन्होंने सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड तोड़ा है. वैभव ने 15 साल 99 दिन की उम्र में भारत के लिए खेला, जबकि सचिन तेंदुलकर ने जब डेब्यू किया था तब वह 16 साल 205 दिन के थे.

सचिन ने 15 नवंबर 1989 को पाकिस्तान के ख़िलाफ़ कराची में अपना अंतरराष्ट्रीय मैच खेला था. उन्होंने अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय पारी में 15 रन बनाए थे. वहीं वैभव ने अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय पारी में 14 रन बनाए.

इस ऐतिहासिक डेब्यू की वजह से मैच की शुरुआत से वैभव सूर्यवंशी ख़ूब चर्चा में रहे. लेकिन जब मैच का नतीजा आया तो रवि बिश्नोई ने सुर्खियां बटोरीं.

सोशल मीडिया पर फ़ैंस भारत की इस हार के पीछे रवि बिश्नोई को ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं. वहीं क्रिकेट के जानकार भी उनके प्रदर्शन पर सवाल खड़े कर रहे हैं.

रवि बिश्नोई की चर्चा क्यों?

इसकी सबसे बड़ी वजह इंग्लैंड की पारी का 17वां ओवर है. इस ओवर में रवि बिश्नोई ने कुल 29 रन दिए, जिनमें दो नो बॉल भी शामिल हैं.

इस ओवर में जैकब बेथेल ने बिश्नोई के ख़िलाफ़ तीन छक्के और एक चौका जड़ा. बेथेल ने इंग्लैंड के लिए मैच जिताऊ पारी खेली. उन्होंने 46 गेंदों में 76 रन बनाए और अंत तक डटे रहे.

बिश्नोई ने चार ओवर में 60 रन ख़र्चे. वह एक भी विकेट लेने में कामयाब नहीं रहे. इस पूरे मैच में बिश्नोई ने तीन नो बॉल फेंकीं.

मैच के बाद कप्तान श्रेयस अय्यर ने कहा कि रवि बिश्नोई को इससे सीख लेनी होगी.

इंग्लैंड की पारी के 16वें ओवर तक मैच भारत के नियंत्रण में माना जा रहा था. उस वक्त इंग्लैंड का स्कोर पांच विकेट के नुक़सान पर 142 रन था.

इंग्लैंड को जीत के लिए आख़िरी 24 गेदों में 49 रन चाहिए थे. लेकिन 17वें ओवर में बिश्नोई ने 29 रन ख़र्चे, जिसके बाद मैच इंग्लैंड के पाले में चला गया.

इसके बाद इंग्लैंड 19 ओवर में ही मैच जीत गया.

कप्तान श्रेयस अय्यर ने रवि बिश्नोई को लेकर क्या कहा

मैच के बाद भारत के टी20 कप्तान श्रेयस अय्यर से हार को लेकर सवाल किया गया. इसके जवाब में उन्होंने इंग्लैंड की पारी के 17वें ओवर की ओर इशारा किया.

हालांकि, उन्होंने इस हार के पीछे पूरी तरह से रवि बिश्नोई को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया.

श्रेयस ने कहा, "मुझे लगता है कि हम सभी जानते हैं कि मैच कब हमारे हाथ से निकल गया, लेकिन मैं किसी एक खिलाड़ी की ओर इशारा नहीं करना चाहता. 16वें ओवर तक जिस तरह हम कर रहे थे, मुझे लगता है कि हम बहुत अच्छा खेल रहे थे. इसके बाद मैच का रुख़ उनकी (इंग्लैंड) तरफ़ मुड़ गया."

श्रेयस ने इस ओवर में बिश्नोई की ओर से फेंकी गई दो नो बॉल के बारे में भी बात की.

उन्होंने कहा, "पहली नो-बॉल के बाद मैंने सोचा, 'ठीक है, अब वह मज़बूती से वापसी करेगा.' लेकिन इसके बाद दूसरी नो-बॉल ने हमें थोड़ा नुक़सान पहुँचाया. निश्चित तौर पर उसे इससे सीख लेनी होगी."

श्रेयस अय्यर ने इंग्लैंड के ऑलराउंडर सैम करन की गेंदबाज़ी और जैकब बेथेल की बल्लेबाज़ी की तारीफ़ की.

उन्होंने कहा, "मुझे लगा कि इस पिच पर यह शानदार स्कोर था, जहां उछाल एक जैसा नहीं था और गेंदबाज़ों को भी मदद मिल रही थी. सैम करन ने हमें मौक़ा नहीं दिया और उन्होंने जिस तरह गेंदबाज़ी की, वह अच्छे तरीक़े से प्लान्ड था."

उन्होंने कहा, "गेंदबाज़ी के दौरान पहले 15 ओवर तक हम मैच पर पूरी तरह हावी थे, लेकिन फिर अचानक... हालांकि जिस तरह जैकब बेथेल ने बल्लेबाज़ी की, उसका श्रेय उन्हें जाता है. उन्हें बल्लेबाज़ी करते देखना शानदार रहा."

क्रिकेट के जानकार क्या कह रहे?

क्रिकेट के विश्लेषक अयाज़ मेमन ने मैच के बाद भारत के उन दो महंगे ओवरों के बारे में बात की, जिनमें भारतीय गेंदबाज़ों ने सबसे ज़्यादा रन लुटाए.

उन्होंने एक्स पर लिखा, "अर्शदीप और बिश्नोई के दो महंगे ओवर, जिनमें कुल 56 रन बने, भारत की हार की बड़ी वजह बने और टीम अब भी जीत का खाता नहीं खोल सकी."

मेमन ने इंग्लिश बल्लेबाज़ों की तारीफ़ भी की. उन्होंने कहा, "सूर्यवंशी ने अपने पहले ही मैच में सुर्खियाँ बटोरीं, लेकिन इंग्लैंड की शानदार रन चेज़ ने उनके प्रदर्शन को पीछे छोड़ दिया. ब्रूक, बेंटन और ख़ास तौर पर बेथेल ने अपनी आक्रामक बल्लेबाज़ी से मैच का रुख़ बदल दिया और महफ़िल लूट ली."

एक अन्य पोस्ट में मेमन ने बिश्नोई की ग़लतियों और भारत के तीन स्पिनरों के साथ खेलने के फ़ैसले पर सवाल उठाए.

उन्होंने लिखा, "बिश्नोई लगातार ग़लतियाँ करते रहे और इंग्लैंड के बल्लेबाज़ों ने उनकी गेंदबाज़ी का जमकर फ़ायदा उठाया. तीन स्पिनरों के साथ उतरने की भारत की रणनीति पूरी तरह नाकाम रही."

वहीं, क्रिकेट कमेंटेटर हर्षा भोगले ने कहा कि किसी भी मैच में नो बॉल स्वीकार्य नहीं की जा सकती और स्पिनर्स से ऐसी ग़लती होना गंभीर मसला है.

उन्होंने एक्स पर लिखा, "किसी भी स्टेज में नो-बॉल स्वीकार्य नहीं है. स्पिनर से ऐसी ग़लती करना तो और भी ज़्यादा स्वीकार्य नहीं है. और एक ही मैच में तीन नो बॉल करना बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया जा सकता."

पूर्व क्रिकेटर इरफ़ान पठान ने किसी भी भारतीय गेंदबाज़ का नाम नहीं लिया. लेकिन इंग्लिश बल्लेबाज़ बेथेल की तारीफ़ करते हुए रवि बिश्नोई के ओवर की ओर इशारा किया.

उन्होंने एक्स पर लिखा, "जैकब बेथेल बेहतरीन खिलाड़ी हैं. उन्होंने वर्ल्ड कप के सेमीफ़ाइनल में हमें लगभग हार्ट अटैक दे ही दिया था. आज भी रन चेज़ के दौरान वह एक बड़े ओवर का इंतज़ार करते रहे. जैसे ही उन्हें वह ओवर मिला, मैच पूरी तरह उनके पक्ष में चला गया."

भारत के पत्रकारों ने भी रवि बिश्नोई के प्रदर्शन पर सवाल उठाया है.

वरिष्ठ खेल पत्रकार विक्रांत गुप्ता ने एक्स पर लिखा, "क्या यह महज संयोग है कि इस मैच में रवि बिश्नोई ने चार ओवर में तीन नो-बॉल डालीं? या फिर वह नेट्स में भी ऐसा कर रहे थे, स्पिन कोच साइराज बहुतुले की मौजूदगी में?"

वहीं, वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने लिखा, "टी20 फ़ॉर्मेट में किसी भी गेंदबाज़ के लिए सहानुभूति होनी चाहिए, लेकिन रवि बिश्नोई आईपीएल 2026 में राजस्थान रॉयल्स के नियमित खिलाड़ी भी नहीं हैं, और फिर भी टीम इंडिया के लिए मैच हराने वाला अहम ओवर उन्हीं से कराया गया? मुझे ज़रा यह बात समझाइए."

सचिन के 15 और वैभव के 14 रन

अंग्रेज़ी अख़बार हिन्दुस्तान टाइम्स में स्पोर्ट्स राइटर प्रबुद्ध भट्टाचार्जी ने सचिन और सूर्यवंशी के डेब्यू की तुलना करते हुए लिखा है, ''1989 में सचिन तेंदुलकर के डेब्यू और 2026 में वैभव सूर्यवंशी के डेब्यू क्रिकेट की दो बिल्कुल अलग दुनिया से जुड़े हैं. तेंदुलकर ऐसे दौर में आए थे, जब रेड-बॉल क्रिकेट की गंभीरता और पाकिस्तान की तेज़ गेंदबाजी का दबदबा था.

''सूर्यवंशी ऐसे दौर में आए हैं, जहाँ आईपीएल का शोर, वायरल क्लिप्स, सोशल मीडिया के फ़ैसले और लोग फौरी तौर पर हर आकलन करते हैं. सचिन 16 साल के थे, वैभव 15 साल के. सचिन ने बॉम्बे के लिए रणजी ट्रॉफी डेब्यू में शतक लगाया था. दूसरी तरफ़ वैभव का उभार आईपीएल से हुआ है. दोनों मामलों में डेब्यू पारी की भी तुलना नहीं हो सकती.''

''सचिन ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ कराची में अपने टेस्ट डेब्यू में 15 रन बनाए थे. काग़ज़ पर देखें तो यह एक मामूली स्कोर था, लेकिन तब क्रिकेट बिल्कुल अलग तेवर में था. एक 16 साल के लड़के को इमरान ख़ान, वसीम अकरम, वक़ार यूनुस और अब्दुल क़ादिर जैसे गेंदबाज़ों के सामने उतारा गया था. वह भी पाकिस्तान में, टेस्ट मैच में, क्रिकेट के सबसे चुनौतीपूर्ण मैदानों में से एक पर. सचिन ने उस मैच में कोई बड़ा स्कोर नहीं बनाया, उन्होंने कोई शतक नहीं लगाया लेकिन वह वहां टिके रहे, परीक्षा का सामना किया और दिग्गजों के बीच खोए हुए बच्चे जैसे बिल्कुल नहीं लगे.''

प्रबुद्ध भट्टाचार्जी ने लिखा है, ''वैभव सूर्यवंशी की पहली अंतरराष्ट्रीय पारी ने भी भावनात्मक रूप से कुछ वैसा ही अहसास दिया. हालांकि फॉर्मेट और रफ़्तार पूरी तरह अलग थी. 10 गेंदों में बनाए गए उनके 14 रन कोई बड़ा स्कोर नहीं था. पारी इतनी जल्दी ख़त्म हो गई कि वह किसी बड़ी घोषणा जैसी पारी नहीं बन सकी. लेकिन वह पारी ख़ाली भी नहीं थी. उनके दो छक्कों ने उस पल को ख़ास बना दिया. उन्होंने दिखाया कि उनके भीतर सहजता, निर्भीकता और बड़े मंच के दबाव के सामने ख़ुद को छोटा न होने देने का स्वभाव है. वह सिर्फ़ अपने डेब्यू में टिके रहने की कोशिश नहीं कर रहे थे.''

''वह उसी साहस और आक्रामकता के साथ खेलना चाह रहे थे, जिसने उन्हें यहां तक पहुंचाया. यही असली तुलना है. न रन की. न किस्मत की. और न ही इस असंभव और अनुचित उम्मीद की कि 15 साल का लड़का सचिन की परछाई में आए और किसी तरह उसे अपना बना ले. असली तुलना संयम और आत्मविश्वास की है. तेंदुलकर के 15 रन ने भारत को बताया था कि यह लड़का इस स्तर की बातचीत का हिस्सा बनने लायक़ है. सूर्यवंशी के 14 रन ने भारत को बताया कि यह मंच उन्हें निगल नहीं पाया.''

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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